Trump Tariff: कानपुर के कारोबारियों के पास अमेरिकी टैरिफ की काट, वहां निर्यात बंद, 'वाना रीजन' सहारा
Trump Tariff अमेरिका में ट्रंप के टैरिफ ने भारत के कारोबारियों की चिंता बढ़ा दी है। लेकिन कानपुर के कारोबारियों ने इसका काट खोज लिया है। अमेरिका को निर्यात पूरी तरह से बंद कर दिया गया है। अब कारोबारियों के लिए वाना रीजन सहारा बन गया है। इन देशों में भारतीयों की भी संख्या काफी अच्छी है।

जागरण संवाददाता, कानपुर। Trump Tariff: अमेरिका में भारतीय उत्पादों पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगने के बाद निर्यातक अब 'वाना रीजन' के देशों की ओर रुख कर रहे हैं। वाना रीजन यानी वेस्ट एशिया और नार्थ अफ्रीका के देश, जहां भारतीय माल की खपत होती है और कई देशों में कानपुर से भी माल जाता है। इन देशों में खासतौर पर टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग, फैशन एसेसरीज, मसाले आदि भेजे जा रहे हैं।
कानपुर से दुनिया के छोटे-बड़े 100 देशों में माल निर्यात होता है। अकेले अमेरिका के लिए सालाना 2500 करोड़ रुपये का निर्यात होता था। इसमें एक हजार करोड़ रुपये के चर्म उत्पाद और बाकी डेढ़ हजार करोड़ में अन्य वस्तुएं थीं। वहां जाने वाले माल पर अलग-अलग छह से 12 प्रतिशत तक शुल्क लगता था। इसके साथ टैरिफ 50 प्रतिशत कर दिया गया है, यानी अब वहां माल भेजने पर 56 से 62 प्रतिशत तक शुल्क चुकाना होगा। इसलिए अमेरिका को निर्यात पूरी तरह बंद हो चुका है। इसलिए नए बाजार की तलाश के लिए निर्यातक यूरोप, यूनाइटेड किंगडम और रूस के साथ ही वाना रीजन के देशों के बारे में भी जानकारी कर रहे हैं।
ये है वाना रीजन
वाना रीजन में बहरीन, इजिप्ट, जार्डन, कुवैत, मोरक्को, ओमान, अल्जीरिया समेत करीब डेढ़ दर्जन देश हैं। जो निर्यातक अमेरिका के साथ इन देशों में भी माल भेज रहे हैं, वे अब अपना कारोबार बढ़ाने की कवायद में जुट गए हैं। वहीं, जिन्होंने अभी तक इन देशों से कारोबार नहीं किया है, वे इनके बारे में जानकारी कर रहे हैं। इन देशों में लगभग 500 करोड़ का सालाना निर्यात हो रहा है। कारोबारी इसे बढ़ाकर 1500 करोड़ तक पहुंचने की उम्मीद जता रहे हैं। खास बात यह है कि इन देशों में भारतीयों की संख्या अच्छी है।
फेडरेशन आफ इंडियन एक्सपोर्ट फेडरेशन (फिओ) के सहायक निदेशक आलोक श्रीवास्तव के मुताबिक, ये वे देश हैं जो अमेरिका की तरह विकसित नहीं हैं, लेकिन निर्यातकों का मानना है कि अगर उन्हें कई देशों में छोटे-छोटे आर्डर भी मिलने लगे तो बड़े झटके को सहना आसान हो जाएगा। अगले माह ओमान में निर्यात को लेकर राष्ट्रीय स्तर का प्रतिनिधिमंडल जा भी रहा है। इससे इस रीजन में निर्यात के अच्छे अवसर मिल सकते हैं।
ट्रंप का टैरिफ झटका नहीं, वैश्विक बाजार में अवसर तलाशने का मौका : पंकज अरोड़ा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ को कन्फेडरेशन आफ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) भारत के लिए झटका नहीं वैश्विक बाजार में अवसर तलाशने का मौका बता रहा है। कैट के राष्ट्रीय संयुक्त महासचिव पंकज अरोड़ा के मुताबिक व्यापार करने के लिए अमेरिका ही एकमात्र स्थान नहीं है। वैश्विक व्यापार परिदृश्य बहुत बड़ा है। यूके, यूरोपीय देश, दक्षिण अफ्रीका, आसियान देश, लैटिन अमेरिका, यूएई आदि में भारत के लिए अपार संभावनाएं मौजूद हैं।
उनके मुताबिक भारतीय व्यापारी चुनौतियों से नहीं डरते हैं। हर नई परिस्थिति नया अवसर लेकर आती है। हम इसे एक ऐसे मोड़ के रूप में देख रहे हैं, जो हमारे व्यापारिक दायरे को और विस्तृत करेगा। देश के नौ करोड़ व्यापारियों की दृढ़ता और उद्यमशीलता की भावना ने घरेलू अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाए रखा है। आज भारतीय व्यापारी अपनी रणनीतियों को नया रूप देने के साथ आपूर्ति शृखलाओं को मज़बूत करने और डिजिटल प्लेटफार्म को अपनाकर नए बाजारों में प्रवेश करने के लिए तैयार हैं। मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत अभियानों से भारत एक विश्वसनीय वैश्विक भागीदार के रूप में उभर रहा है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि यूरोप, अफ्रीका और एशिया-प्रशांत देशों के साथ व्यापारिक संवाद तेज़ किए जाए ताकि व्यापारियों को इन देशों के बाजार तक पहुंच मिले।
कैट के प्रदेश महामंत्री अशोक वाजपेई के अनुसार व्यापार भारत की रगों में है। सिंधु घाटी सभ्यता के युग से ही भारत वैश्विक वाणिज्य का केंद्र रहा है। कोई भी अवरोध भारतीय व्यापारियों को व्यापार करने से रोक नहीं सकता। यह कोई संकट नहीं बल्कि अपने क्षितिज को फैलाने का अवसर है।
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