कानपुर में IGRS Portal पर शिकायतों पर फर्जी रिपोर्ट! समाज कल्याण अधिकारी व एसडीओ जल निगम ने अपलोड कर दी बोगस रिपोर्ट
कानपुर में आइजीआरएस पोर्टल पर शिकायतों के निस्तारण में अधिकारियों की घोर लापरवाही सामने आई है, जिसमें समाज कल्याण अधिकारी ...और पढ़ें

HighLights
आइजीआरएस शिकायतों के निस्तारण में अधिकारियों की घोर लापरवाही।
समाज कल्याण अधिकारी, जल निगम एसडीओ ने फर्जी रिपोर्टें लगाईं।
लापरवाह अफसरों पर मंडलायुक्त, डीएम ने सख्त कार्रवाई शुरू की।
जागरण संवाददाता, कानपुर। प्रार्थना पत्र लेकर अधिकारियों के दर-दर भटकने के बाद भी जब सुनवाई नहीं हुई तो पीड़ितों ने आइजीआरएस पोर्टल का सहारा लिया। इसमें भी निस्तारण में लापरवाही बरती जा रही है। समाज कल्याण अधिकारी और एसडीओ जल निगम ग्रामीण ने तो हद कर दी, इन दोनों ने शिकायत के निस्तारण में बोगस रिपोर्ट लगा दी। ऐसे सभी छह लापरवाह अफसरों की वजह से जिले की रैंक प्रभावित हुई तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई शुरू हो गई है।
मंडलायुक्त ने जिन प्रार्थना पत्रों के निस्तारण में गुणवत्ता खराब मिली है, उन तीन मामलों को सी-श्रेणी में रखा है और इसके लिए जिम्मेदार पीडब्ल्यूडी निर्माण खंड-दो के अधिशासी अभियंता और सदर व बिल्हौर तहसीलों के एसडीएम भी हैं। ऐसे ही मुख्यमंत्री कार्यालय से भी दो मामले चिह्नित हुए हैं। ये प्रकरण सहायक श्रम आयुक्त और लीड बैंक प्रबंधक से जुड़े हैं। ऐसे ही कई अन्य लापरवाह अधिकारियों को चिह्नित किया जा रहा है। जिनके विरुद्ध कार्रवाई के लिए डीएम शासन में लिखापढ़ी कर रहे हैं।
यही नहीं, शिकायतों के निस्तारण की स्थिति इतनी अधिक खराब है कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन के चार मामलों में समाज कल्याण अधिकारी ने बोगस रिपोर्ट लगा दी। ऐसे ही एक शिकायत में सहायक अभियंता जल निगम ग्रामीण ने भी बोगस रिपोर्ट पोर्टल पर अपलोड कर दी। इन अफसरों को डीएम ने कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है।
केस-एक
बिरहाना खंड बरौली के गौरव कटियार ने 28 सितंबर को आइजीआरएस पर शिकायत की थी। उनकी समस्या गांव के गाटा-583 पर आठ विस्सुआ जलाशय पर कब्जा होने, आबादी के बीच कूड़ा डालने और गांव में जल निकासी की व्यवस्था न होने की है। ये शिकायत एसडीएम बिल्हौर के स्तर पर निस्तारित हुई है। निस्तारण गुणवत्तापरक न होने से मंडलायुक्त ने आपत्ति जता दी है। गौरव ने बताया कि उन्होंने पांच आइजीआरएस की हैं, कार्रवाई शून्य है।
केस-दो
सतीश चंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि उन्होंने एक सड़क के मामले में पीडब्ल्यूडी निर्माण खंड-दो के अधिशासी अभियंता अखंडेश्वर प्रसाद से कई बार समस्या बताई, पर सुनवाई नहीं हुई। 22 अगस्त को आइजीआरएस पर शिकायत की। उसके निस्तारण में लापरवाही बरती गई। बताया कि पीडब्ल्यूडी के अधिकारी जब शिकायत के निस्तारण की निर्धारित अवधि के दो दिन बचते हैं तो काल कर बुलाते हैं और साक्ष्य मांगते हैं।
केस-तीन
अमित रस्तोगी ने बैकिंग के मामले में आइजीआरएस पोर्टल पर शिकायत थी। निस्तारण में अग्रणी बैंक के जिला प्रबंधक के स्तर पर लापरवाही हुई है। मुख्यमंत्री कार्यालय से आपत्ति जताई गई है। इनकी तरह किशोर कुमार ने भी एक प्रकरण में आइजीआरएस पर शिकायत की थी, जिसका निस्तारण सहायक श्रम आयुक्त को करना था। इनके स्तर पर निस्तारण में हुई लापरवाही को भी मुख्यमंत्री कार्यालय से पकड़ा गया है।
आइजीआरएस पोर्टल पर आने वाली एक-एक शिकायत के निस्तारण की मानीटरिंग हो रही है। इसमें जिन अफसरों ने लापरवाही बरती है, उन्हें प्रारंभिक तौर पर नोटिस जारी किए गए हैं। इनके विरुद्ध शासन में भी लिखा जा रहा है। ऐसे लापरवाह लोगों की वजह से ही जिले की रैंक प्रभावित हुई है।
- सौरभ सिंह, प्रभारी अधिकारी आइजीआरएस/एडीएम सिटी
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