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Kanpur Fake Cement Racket: 7 साल में त्रिदेव फर्म का 5 करोड़ से अधिक का टर्न ओवर, 17 से अधिक फर्मों को सीमेंट सप्लाई

Published: Sun, 25 Oct 2026 09:00 PM (IST)

कानपुर में नकली सीमेंट बेचने वाले गिरोह का पर्दाफाश हुआ है, जिसमें मुख्य आरोपी अभी फरार है। अदाणी ग्रुप की ...और पढ़ें

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HighLights

  1. तीन महीने से संदिग्ध सप्लाई चेन खंगाल रही थी अदाणी ग्रुप की विजिलेंस टीम

  2. मेरठ की त्रिदेव इंटरप्राइजेज फर्म के मालिक सुनील मित्तल पहले भी नकली सीमेंट के मामले में पकड़े जा चुके

रितेश द्विवेदी, कानपुर। नकली सीमेंट को नई बोरियों में भरकर बेचने के मामले में मुख्य आरोपित पुलिस की पकड़ से अभी दूर है। पुलिस इस मामले में आरोपितों के पकड़े जाने के बाद ही पूरे मामले का राजफाश करने की बात कह रही है। वहीं अदाणी ग्रुप की विजिलेंस टीम की बीते तीन माह से इस मामले की पड़ताल करने में जुटी थी।

14 अक्टूबर को पनकी पुलिस की छापेमारी के बाद मगौती इंटरप्राइजेज, महादेव बिल्डर्स, अराना डिस्ट्रीब्यूटर्स और त्रिदेव इंटरप्राइजेज के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई है। इनमें त्रिदेव इंटरप्राइजेज के जरिये 17 से अधिक फर्मों को सीमेंट की आपूर्ति किए जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, इन फर्मों के नाम, पते और वे किन जिलों में कारोबार कर रही थीं, इसकी पूरी जानकारी अभी तक सामने नहीं आ सकी है।

इस पूरे प्रकरण में सबसे अहम कड़ी त्रिदेव इंटरप्राइजेज के मालिक सुनील कुमार मित्तल बताए जा रहे हैं। जीएसटी विभाग की आनलाइन डेटा के अनुसार उन्होंने वर्ष 2017 में फर्म का पंजीकरण कराकर सीमेंट कारोबार शुरू हुआ। इस फर्म का सात साल में पांच करोड़ से अधिक का टर्नओवर सरकारी रिकार्ड में दर्ज है।

वर्ष 2019 से इस्पात नगर में गोदाम संचालित हो रहा है। यहां से हर महीने करीब 30 हजार बोरियों की सप्लाई होने की बात सामने आई है। त्रिदेव इंटरप्राइजेज के मालिक सुनील कुमार मित्तल का नाम पहले भी नकली सीमेंट के मामले में सामने आ चुका है।

ऐसे में पुलिस की जांच का दायरा केवल मौजूदा फैक्ट्री और गोदाम तक सीमित नहीं रह सकता। वर्ष 2017 में फर्म के पंजीकरण से लेकर वर्ष 2019 में इस्पात नगर में गोदाम शुरू होने और अब सामने आए कथित नेटवर्क तक के कारोबार की कड़ियां जोड़ना जरूरी है।


तीन माह से विजिलेंस टीम कर रही थी पीछा

अदाणी ग्रुप की विजिलेंस टीम पिछले तीन महीने से सीमेंट की संदिग्ध सप्लाई चेन की पड़ताल कर रही थी। प्लांट से सीमेंट की आपूर्ति में कमी और बाजार में गोदाम भरे होने के बाद जांच का दायरा बढ़ाया गया। जिसके बाद टीम इस्पात नगर स्थित गाेदाम तक पहुंची। यहीं पर पुरानी और खराब सीमेंट को नई बोरियों में भरकर बाजार में बेचने का खेल चल रहा था। 14 अक्टूबर को अदाणी ग्रुप की विजिलेंस टीम की ओर दर्ज कराए गए मुकदमें एक मुंशी को गिरफ्तार किया गया था। विजिलेंस टीम के अधिकारियों का कहना है कि छापेमारी के दौरान एक युवक गाेदाम के बाहर मुंशी की बाइक में लगे झोले में रखें बिलों को लेकर फरार हो गया था।


17 से अधिक फर्मों तक पहुंची सप्लाई

मेरठ की त्रिदेव इंटरप्राईजेज का जीएसटी विभाग में दर्ज पंजीकरण के अनुसार फर्म का सालाना टर्नओवर पांच करोड़ रुपये से अधिक का था, इस फर्म के बिलों की जांच के दौरान पता चला कि यह फर्म मुस्कान ट्रेडर्स, अयाना एंटरप्राइजेज, श्री सांवरिया सेठजी ट्रेडिंग कंपनी, मेसर्स देवेंद्र सिंह चौहान, मेसर्स गंगा ट्रेडिंग कंपनी, मेसर्स रियासत कांट्रेक्टर, चंचल एंटरप्राइजेज, दिया एंटरप्राइजेज, हरेंद्र एंटरप्राइजेज, अयाना एंटरप्राइजेज, मेसर्स बिरजू ट्रेडर्स, मेसर्स तिवारी ट्रेडर्स, डीपी डेवलपर्स, मेसर्स अग्रवाल सीमेंट ट्रेडर्स, कुनाल कंस्ट्रक्शन, शारदा ट्रेडर्स, शिवायु इंडस्ट्रीज को एक साल में सीमेंट की सप्लाई की है। वहीं मुकदमा दर्ज कराने वाली एसीसी कंपनी के प्रतिनिधियों का आरोप है कि आरोपित छह अलग-अलग कंपनियों के नाम की बोरियां अपने कारखाने में छपवा कर सप्लाई कर रहे थे।

 

प्लाट संख्या एफ-181 के भूस्वामियों पर पुलिस की चुप्पी

इस्पात नगर में जिस प्लांट संख्या एफ-181 इस गोदाम का संचालन किया जा रहा था, उस पर पुलिस ने अभी तक चुप्पी साध रखी है। मुकदमें में प्लाट संख्या का जिक्र तो किया गया है, लेकिन उसके मालिकों का कोई जिक्र नहीं हैं। चर्चा है कि कुछ सफेदपोश लोगों का नाम सार्वजनिक करने से पुलिस भी इस मामले में बच रही है।


बोले अधिकारी...

फरार गोदाम संचालकों की गिरफ्तारी के लिए टीमें लगी हैं। वहीं गाेदाम में मिली सीमेंट की गुणवत्ता जांचने के लिए नमूने एसीसी, अंबुजा सीमेंट की लैब के साथ ही आइआइटी या एचबीटीयू से भी कराई जाएगी। इस मामले में जो भी आरोपित होंगे सभी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
रघुबीर लाल, पुलिस आयुक्त

 

बोले कारोबारी...

नकली और मिलावट से बचने के लिए ग्राहकों को प्रतिष्ठित डीलर से ही सीमेंट खरीदनी चाहिए। लोग सस्ते के चक्कर में अपने आशियाने की मजबूती से खिलवाड़ कर लेते हैं। प्लास्टिक बोरी के बजाय पेपर पैकिंग वाली सीमेंट लेनी चाहिए उसमें मिलावट नहीं हो सकती,बस ये पांच या 10 रूपये महंगी पड़ती है।
अजय यादव, अजय इंटरप्राइजेज,कल्याणपुर (प्रदेश उपाध्यक्ष उत्तर प्रदेश सीमेंट एसोसिएशन)


कंपनी के अधिकृत डीलर द्वारा ही हमेशा सीमेंट खरीदी है। अभी तक ग्राहक द्वारा सीमेंट के विषय में शिकायत नहीं आई है। कंपनी से सीमेंट खरीदने में गुणवत्ता की गारंटी रहती है। खुदरा व्यापार में कंपटीशन के चलते गड़बड़ी की आशंका कम रहती है।
- आशुतोष शुक्ल, मां कूष्मांडा इंटरप्राइजेज


कंपनी में आर्डर लगाने के बाद माल आता है। कंपनी से सीमेंट निकलते ही उसमें तारीख और फैक्ट्री कोड पड़ा होता है। इससे गड़बड़ी की आशंका नहीं रहती। फिलहाल अभी तक सीमेंट के संबंध में ग्राहकों से कोई शिकायत नहीं आई है।
- वीरेंद्र बहादुर सिंह, लक्ष्मी सीमेंट एंड हार्डवेयर


घर बनाने का सपना हर इंसान देखता है और आज के समय मे सब समझदार भी हैं । सभी ब्रांडेड सीमेंट कम्पनियों ने अब पेपर पैक बोरी बनानी शुरू कर दी है। मकान बनाने में लाखों का खर्च होता है, विश्वसनीय दुकानदार से बिल के साथ सीमेंट व सरिया लेनी चाहिए।असली सीमेंट चिकनी होती है और पानी में डालने पर कुछ देर पानी में तैरती है जबकि एक्सपायरी व नकली सीमेंट पानी में तुरंत डूब जाती है।
दीपक अवस्थी,अवस्थी ट्रेडर्स ,सिंहपुर

 

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