कानपुर दवा कारोबारी हत्याकांड: बेटे ने मां को दी पावर ऑफ अटॉर्नी की सहमति
दवा कारोबारी विनीत मिनोचा हत्याकांड में उनकी पत्नी की अर्जी पर सुनवाई हुई, जिसमें बेटे सुब्रत ने मां के नाम ...और पढ़ें

HighLights
दवा कारोबारी विनीत मिनोचा हत्याकांड में कोर्ट में सुनवाई हुई।
बेटे सुब्रत ने मां पुनीता को पावर ऑफ अटॉर्नी देने पर सहमति।
व्यापारिक लेनदेन की समस्या सुलझाने के लिए यह कदम उठाया।
जागरण संवाददाता, कानपुर। दवा कारोबारी विनीत मिनोचा की हत्या के बाद उनकी पत्नी की बेटे से पावर आज अटार्नी पंजीकृत कराने की मांग की अर्जी पर शुक्रवार को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की कोर्ट में सुनवाई हुई। जेल से तलबी पर आए बेटे ने कहा कि वह मां के नाम पावर आफ अटार्नी करने को तैयार है। अभी सुनवाई जारी है।
विनीत की वसीयत के मुताबिक उनकी पत्नी पुनीता व्यापार में 70 प्रतिशत हिस्से और सुब्रत 30 प्रतिशत का की मालिक है। ऐसे में व्यापारिक लेनदेन में आ रही समस्या को लेकर पुनीता ने जेल में बंद बेटे सुब्रत से 30 फीसद हिस्से की पावर आफ अटार्नी मांगी है। इसी मामले में कोर्ट ने सुब्रत को जेल से तलब किया था। बेटे ने इस पर हामी भर दी है।
कल्याणपुर के इंदिरा नगर स्थित रतन आर्बिट अपार्टमेंट में रहने वाले करोड़पति दवा कारोबारी विनीत मिनोचा (63 वर्ष) की हत्या हुई थी। पांच सितंबर को इंदिरा नगर के रतन आर्बिट अपार्टमेंट के फ्लैट संख्या सी-104 में विनीत मिनोचा की चाकुओं से गोदकर बेरहमी से हत्या कर दी गई।
हत्या के वक्त विनीत का बेटा सुब्रत मिनोचा और बहू शालू मिनोचा एक लाउंज में पार्टी कर रहे थे। सुब्रत ने घर के सीसीटीवी कैमरे पहले ही बंद करवा दिए थे। मर्डर वाली रात नौकर विशाल ने सुब्रत को 6 बार फोन भी किया था।
पुलिस ने छह सितंबर की शाम को एक मुठभेड़ के बाद पुराने नौकर विशाल गौतम और उसके साथी राजकिशोर को गिरफ्तार किया। पूछताछ में विशाल ने आरोप लगाया कि विनीत मिनोचा की बहू शालू मिनोचा ने 6 लाख रुपये की सुपारी देकर यह हत्या करवाई है। पुलिस ने उसी दिन शालू को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
पुलिस ने नौकर विशाल को रिमांड पर लेकर कड़ाई से पूछताछ की, तो उसने सच उगल दिया। विशाल ने बताया कि इस हत्याकांड का असली मास्टरमाइंड शालू नहीं, बल्कि विनीत का बेटा सुब्रत मिनोचा है। सुब्रत ने विशाल से कहा था कि अगर पकड़े जाओ, तो मेरी पत्नी शालू का नाम ले लेना" ताकि वह खुद बच सके।
हत्या की वजह सुब्रत ने 40 लाख रुपये का कर्ज बताया था, जबकि उसके पिता उसे बेहद कम पैसे देते थे। साथ ही उसे डर था कि उसके पिता अपनी संपत्ति किसी और के नाम न कर दें। पुलिस ने सुब्रत को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
पुलिस जांच में शालू के खिलाफ कोई भी स्वतंत्र या विश्वसनीय सबूत नहीं मिला और यह साफ हो गया कि वह पूरी तरह निर्दोष है। पुलिस ने कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की। अदालत ने 50 हजार रुपये के मुचलके पर शालू को 21 दिन जेल में रहने के बाद तुरंत रिहा करने का आदेश दिया।
