IIT Kanpur के लैब से बाजार में उतरेंगे 6 अनूठे आविष्कार, स्मार्ट पेंट से सल्फर बैटरी तक इन तकनीकों पर दांव, जानें क्या है खास
आईआईटी कानपुर ने अपने गहन तकनीकी अनुसंधानों को सीधे उद्योग और बाजार से जोड़ने के लिए 'स्केल-ट्रांसेंड' कार्यक्रम शुरू किया ...और पढ़ें
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आईआईटी कानपुर। जागरण अर्काइव
HighLights
आईआईटी कानपुर ने 'स्केल-ट्रांसेंड' कार्यक्रम लॉन्च किया।
6 लैब आविष्कार वाणिज्यिक उत्पादों में बदलेंगे।
शोधकर्ताओं को फंडिंग, मेंटरशिप और निवेशक मिलेंगे।
जागरण संवाददाता, कानपुर। आईआईटी कानपुर की प्रयोगशालाओं में तैयार अत्याधुनिक तकनीकें अब सिर्फ शोध पत्रों और फाइलों तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि सीधे बाजार में वाणिज्यिक उत्पादों के तौर पर उतरेंगी। संस्थान ने अपने शिक्षकों के गहन तकनीकी अनुसंधानों को सीधे उद्योग और बाजार से जोड़ने के लिए एक नया मंच ''स्केल-ट्रांसेंड'' शुरू किया है।
इस कार्यक्रम के तहत आईआईटी ने अपने छह प्रोफेसरों की टीम तैयार की है। जो 10 सप्ताह तक चलने वाले इस विशेष कार्यक्रम के पहले चरण के तहत सभी प्रोफेसर अपने नेतृत्व वाली अनुसंधान टीमों के साथ मिलकर काम करेंगे।
इन टीमों की देखरेख में अनुसंधान एवं नवाचार के लिए उपयुक्त तकनीकों को इस स्तर तक विकसित किया जाएगा जिससे वह व्यावसायिक गतिविधियों के लिए मददगार हो सकें। इससे स्टार्टअप को व्यावहारिक कारोबार खड़ा करने के लिए तैयार किया जाएगा।
स्केल ट्रांसेंड के आर्किटेक्ट व धनवृत्ति एलएलपी के एमडी अनुराग सिंह के अनुसार केवल बेहतरीन शोध से कंपनियां नहीं बनतीं। विज्ञानियों को पूंजी के साथ-साथ उन लोगों के तजुर्बे की जरूरत होती है जिन्होंने शून्य से बड़े उद्यम खड़े किए हैं। यह पहल शोधकर्ताओं को अनुभव और वित्तीय साधन एक साथ उपलब्ध कराती है।
फंडिंग के साथ सीधे निवेशकों और मेंटर्स से जुड़ाव
आईआईटी का उद्यम विकास मंच ''स्केल'' (स्ट्रैटेजिक कैपिटल एंड एडवाइज़री फार लांच एंड एक्सपैंशन) इस कार्यक्रम को संचालित कर रहा है। संस्थान में यह पहला अवसर है जहां शोधकर्ताओं को एक साथ तीन बड़े लाभ मिलेंगे। संस्थान से शुरुआती वित्तीय मदद (सीड फंडिंग), अनुभवी उद्योगपतियों का व्यक्तिगत मार्गदर्शन (वन-टू-वन मेंटरशिप), और सीधे वेंचर कैपिटलिस्ट्स व बड़े निवेशकों के सामने अपनी तकनीक पेश करने का मौका। इसके जरिए संस्थान के विज्ञानी भी यह समझ सकेंगे कि प्रयोगशाला के प्रोटोटाइप को बाजार में ग्राहक की मांग, उत्पाद की लागत और बड़े पैमाने पर उत्पादन की कसौटियों पर कैसे खरा उतारा जाए।
'हमारा स्पष्ट ध्येय है कि आईआईटी का अत्याधुनिक शोध सिर्फ चारदीवारी में बंद न रहे, बल्कि जमीनी समाधान बनकर देश के आर्थिक और सामाजिक विकास में भूमिका निभाए। यह पहल हमारे संकाय इनोवेटर्स को लैब से बाजार का सफर तय कराने में सक्षम बनाएगी।'
प्रो. मणीन्द्र अग्रवाल, निदेशक, आईआईटी कानपुर
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