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मैं समय हूं... Mahabharat की बुलंद आवाज गूंजी CSJMU Kanpur में, हरीश भिमानी ने युवाओं को बताया Voice Artist बनने का मंत्र

By Alok TiwariEdited By: Anurag Shukla
Published: Tue, 06 Oct 2026 10:01 PM (IST)

महाभारत में 'समय' की आवाज देने वाले हरीश भिमानी ने कानपुर के सीएसजेएमयू में युवाओं से संवाद किया। उन्होंने अपने ...और पढ़ें

हरीश भिमानी। जागरण

हरीश भिमानी। जागरण

HighLights

  1. हरीश भिमानी ने कानपुर के सीएसजेएमयू में युवाओं से संवाद किया

  2. महाभारत में 'समय' की भूमिका और लता जी संग अनुभव बताए

  3. युवा वॉयस आर्टिस्टों को वॉयस टाइपिंग अभ्यास की सलाह दी

जागरण संवाददाता, कानपुर। मैं समय हूं... 90 के दशक में ये सुनकर लोग सहज अंदाजा लगा लेते थे कि धारावाहिक महाभारत शुरू हो गया है। हालांकि आवाज का जादू बिखेरने का ये सिलसिला टेलीविजन पर समाचार पढ़ने से शुरू हो गया था और एडवरटाइजिंग फिल्मों से युवा होते-होते लता जी के शो में एंकरिंग के जरिये अर्श की ओर आगे बढ़ा।

शहर पहुंचे आवाज के जादूगर राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और वायस ओवर/नेरेशन श्रेणी में राष्ट्रपति पदक पाने वाले हरीश भिमानी से जागरण संवाददाता आलोक तिवारी ने खास बातचीत की। उन्होंने करियर की शुरुआत से लेकर लता जी के साथ गुजारे पलों और महाभारत धारावाहिक के अनुभवों को साझा किया।

इस दौरान उन्होंने नवोदित वायस आर्टिस्टों को सलाह दी कि मोबाइल फोन पर वायस टाइपिंग करें, इससे शब्द वाचन की कला निखरेगी। पेश हैं बातचीत के मुख्य अंश...

Harish Bhimani in Kanpur CSJMU

सीएसजेएमयू में आयोजित कार्यक्रम काे संबोधित करते स्वर कलाकार हरीश भिमानी। जागरण

 

  • वायस आर्टिस्ट के करियर की शुरुआत कैसे हुई?
  • देखिए, मैं तो टेलीविजन में समाचार पढ़ता था और रेडियो के लिए प्रोग्राम रिकार्ड करता था। लाइव स्टेज एंकरिंग के लिए स्वर कोकिला लता मंगेशकर की ओर से बुलावा आया था। उनके साथ मैंने 21 देशों में 123 शो किए, बस यहीं से कारवां आगे बढ़ता चला गया।

 

  • महाभारत में ‘समय’ का किरदार कैसे मिला?
  • मुस्कुराते हुए... मेरा तो पहले ही चयन हो गया था। ये बात मुझे धारावाहिक के निर्माता बीआर चोपड़ा ने 78 वें एपिसोड की शूटिंग के दौरान बताई। मुझसे पहले इस किरदार के लिए दिलीप कुमार को चुना गया था लेकिन, ‘समय’ की कास्ट्यूम, हुलिया और आयु निर्माता और उनके बेटे व निर्देशक रवि चोपड़ा तय नहीं कर पा रहे थे। ऐसे में उन्हें एक ऐसा किरदार चाहिए था, जिसकी आवाज गीली मिट्टी की तरह हो और उसके किसी भी आकार में ढाला जा सके। इसके बाद उन्होंने मेरी आवाज वाली कई एडवरटाइजिंग फिल्में देखीं और मुझे इस किरदार के लिए फिट पाया।
 
  • लता जी के साथ आपने लंबे समय तक काम किया, सबसे यादगार किस्सा कौन सा रहा?
  • लता जी के किस्सों पर मैंने पूरी किताब 'इन सर्च आफ लता मंगेशकर: अजीब दास्तां है ये' लिखी। हालांकि उनसे पहली मुलाकात का किस्सा हमेशा यादगार रहेगा। वह मेरे लिए बहुत ही खास दिन था। 28 सितंबर 1978 को मैं मुंबई के एक ड्राई (डबिंग) स्टूडियो में गांधी फिल्म (1982) के लिए कथानक की रिकार्डिंग कर रहा था। शाम को सात बजे मुझे पहली बार लता जी से मिलना था। लोगों से सुना था कि वह समय की बड़ी पाबंद हैं। इसलिए मैं 6:50 बजे ही उनके द्वारा बताए तय स्थान पर पहुंच गया। ठीक सात बजे लता जी आईं। उन्होंने मुझे देखते ही बोला ओह! आप आ गए, घड़ी की तरफ देखते हुए बोलीं कि आप तो समाचार वाले हैं। इसके बाद वे मुझे वे कोल्हापुर में होने वाले शो के रिहर्सल के लिए ले गईं।

 

  • स्टेज एंकरिंग के विधा में आपने क्या बदलाव किए?
  • पहले एंकर किसी कलाकार की प्रस्तुति से पहले चुटकुले और शायरियां सुनाते थे। मुझे जब लता जी के पहले शो की एंकरिंग का प्रस्ताव मिला तो मैंने उनसे बड़ी सहजता से कहा कि आपके शो से पहले ये सब करना श्रोताओं का समय बर्बाद करने जैसा है। इसलिए मैं चाहता हूं कि अपनी एंकरिंग के दौरान ये सब न करूं और न तो आपके द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले गाने का नाम लूं, ना ही वह किस फिल्म का है ये बताऊं। इस पर लता जी ने सवाल किया तो क्या करोगे? इस पर मैंने बड़ी सहजता से कहा कि अभी मुझे ये नहीं पता कि क्या करना है। मुझे सिर्फ ये पता है कि क्या नहीं करना है। इसके बाद जो किया वो एंकरिंग की नई विधा बन गई।

 

  • एआई के दौर में वायस ओवर आर्टिस्ट खुद को कैसे तैयार करें?
  • देखिए, सबसे पहले यह समनझना होगा कि वायस इंडस्ट्री दो भागों में बंटी हैं, वायस ओवर और डबिंग (वायस आर्ट)। आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) एक तरह की मशीन है और वह बिना किसी भाव के वायस ओवर कर सकती है, लेकिन भाव के साथ आवाज की प्रस्तुति सिर्फ वायस ओवर आर्टिस्ट ही दे सकता है। ऐसे में युवा सबसे पहले अपनी खासियत पहचानें। हर किसी की आवाज में एक खासियत होती है। इसके अलावा युवा कलाकारों को चाहिए कि वह अपने मोबाइल फोन पर वायस टाइपिंग का अभ्यास करें। इससे उनके बोलने की लय अच्छी होगी। साथ ही उनके शब्द वाचन का तरीका (डिक्शन) भी बेहतर होगा।

 

  • ‘समय’ ने समय के बदलते दौर को देखा, दूरदर्शन से इंटरनेट तक की दुनिया में क्या फर्क आया है?
  • इंटरनेट की दुनिया में चीजें आसान हो गई हैं। तकनीकी और नवाचार ने युवाओं के लिए कई नए अवसर सृजित किए हैं। युवाओं के चाहिए कि तकनीक का बेहतर उपयोग करके इनका लाभ उठाएं।

 

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