फतेहपुर, जागरण संवाददाता। Genral Bipin Rawat death news राष्ट्रीय रक्षा अकादमी में सीडीएस बिपिन रावत को प्रशिक्षण देने वाले कर्नल आरडीएस चौहान ने कहा कि बिपिन प्रशिक्षण अवधि में ही अपनी प्रतिभा व जांबाजी को लेकर सुर्खियों में आ गए थे। सहसा ही मुख से निकलता था कि यह तो लंबी रेस का घोड़ा है, बहुत आगे तक जाएगा। साढ़े तीन साल के प्रशिक्षण के बाद वर्ष 1978 में बिपिन रावत को कमीशन मिला और लेफ्टीनेंट बन गए थे।

बातचीत में उन्होंने रुंधे गले से कहा कि हमने एक जांबाज अफसर खो दिया। एनडीए प्रशिक्षण केंद्र खड़कवासला महराष्ट्र में प्रशिक्षण दौरान वह अपने अन्य कैडेट से अलग थे। शुरू से ही जुझारू और हर कार्य में रुचि लेते थे। उन्होंने कहा कि सीडीएस विपिन रावत के पिता भी फौज में थे और उनके सगे भाई फौज में थे। देश सेवा का जज्बा शुरू से ही उनमें झलकता था।

सबके प्रति रखते थे आत्मीयता के भाव: सेना में सूबेदार पद से सेवानिवृत्त हुए विद्याभूषण तिवारी ने पुरानी यादों को साझा करते हुए बताया कि वर्ष 2006 में सीडीएस विपिन रावत बीनागुड़ी ट्रेनिंग एकेडमी पश्चिम बंगाल निरीक्षण के लिए आए थे। उस समय वे मेजर जनरल पद पर कार्यरत थे। उनके आगमन पर मुझे लाइजिंग की जिम्मेदारी मिली थी। उन्होंने बहुत ही आत्मीयता का भाव प्रदर्शित करते हुए हम लोगों से बातचीत की थी। वे सेना में छोटे-बड़ों का ख्याल किए बिना सबके प्रति आत्मीयता का भाव रखते थे।

Edited By: Shaswat Gupta