UP Flood: दर्द दे रहा गंगा-यमुना का उफान, फर्रुखाबाद, हमीरपुर में मकान-झोपड़ी बहीं, कटान बना मुसीबत
उत्तर प्रदेश में गंगा यमुना रामगंगा सहित कई नदियों ने कहर बरपाया है। कई जगह जलस्तर कम हो रहा है तो कुछ जिलों में उफान से मकान झोपड़ियां कटान की वजह से नदी में समा रहे हैं। फर्रुखाबाद में सबसे ज्यादा हालात खराब हैं। शनिवार को भी नौ मकान गंगा में समा गए।

जागरण टीम, कानपुर। गंगा व यमुना का जलस्तर कम होने लगा हैं। फर्रुखाबाद, उन्नाव, कन्नौज, फतेहपुर में तटवर्ती तटवर्ती गांवों के संपर्क मार्ग बाढ़ के पानी में डूबे हुए हैं। फर्रुखाबाद में नौ मकान बाढ़ के पानी में समा गए तथा चार झोपड़ियां बह गईं। हमीरपुर में यमुना की कटान से एक मकान ढह गया।
फतेहपुर व फर्रुखाबाद में गंगा के तटवर्ती गांवों में बाढ़ का पानी भरा है। शनिवार को नौ मकान कटान के चलते गंगा में समा गए और चार झोपड़ियां बह गईं। कन्नौज में एक सप्ताह तक गंगा का जलस्तर स्थिर रहने के बाद एक सेंटीमीटर बढ़ा है। उन्नाव में गंगा का जलस्तर 14 घंटे में एक सेंटीमीटर और घटा है। हमीरपुर में यमुना व बेतवा का जलस्तर लगातार घट रहा है। यमुना किनारे हुई कटान से सदर कोतवाली के मेरापुर मुहल्ले में एक कच्चा घर जमींदोज हो गया। परिवार बाल बाल बच गया। बांदा में केन व यमुना नदी का जलस्तर कम होने लगा।
फर्रुखाबाद में गांव आशा की मड़ैया में नाव से आवागमन करते ग्रामीण। जागरण
Farrukhabad के पंखियन की मड़ैया में आंखों के सामने बह रहे आशियाने
फर्रुखाबाद के तहसील सदर का हंसता खेलता गांव पंखियन की मड़ैया कटरी धर्मपुर इस बार कटान से पूरी तरह तबाह हो गया है। आशियाने ग्रामीणों की आंखों के सामने गंगा में समाते जा रहे हैं। सात अगस्त को गांव में बाढ़ का प्रकोप शुरू हुआ था। शनिवार को कटान के चलते नौ मकान और गंगा में समा गए व चार झोपड़ियां बह गईं। अब तक गांव के 43 मकान व कई झोपड़ियां कटान की भेंट चढ़ चुकी हैं। गांव के अधिकांश लोग बाढ़ शरणालयों में समय काट रहे हैं। गंगा के किनारे बसे गांव पंखियन की मड़ैया कटरी धर्मपुर में कुल 485 अल्पसंख्यक परिवार रहते हैं।
गंगा खतरे से ऊपर, रामंगगा स्थिर
गंगा का खतरे का निशान 137.10 मीटर दर्ज है। गंगा खतरे के निशान से 20 सेंटीमीटर ऊपर बह रही हैं। तटवर्ती गांव के घरों में बाढ़ का पानी भरा है। बाढ़ के पानी की तेज धार में कई गांवों के संपर्क मार्ग कट गए हैं। सड़कों पर तीन फीट से अधिक पानी तेज धार से बह रहा है। ग्रामीण नाव के सहारे आवाजाही करने को मजबूर हैं। भुड़िया भेड़ा के ग्रामीण कटी सड़क पर जान जोखिम में डालकर बल्लियों के अस्थाई पुल पर आवाजाही कर रहे हैं। शनिवार को केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक नरौरा बांध से 1,22,848 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। रामगंगा का जलस्तर 135.25 मीटर ऊंचाई पर स्थिर है। रामगंगा का चेतावनी बिंदु 136.60 मीटर पर दर्ज है। खो, हरेली व रामनगर से रामगंगा में 15,700 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। जिससे रामगंगा का जलस्तर बढ़ेगा। गंगा की बाढ़ का पानी फखरपुर, करनपुर घाट, कुड़री सारंगपुर, मंझा की मड़ैया, कलक्टरगंज, आशा की मड़ैया, उदयपुर कंचनपुर, रामपुर, जोगराजपुर, जगतपुर, अंबरपुर की मड़ैया, चित्रकूट, गौटिया, बरुआ व सैदापुर गांवों में भरा है। घरों में पानी भरा होने से ग्रामीण सड़क व मकान की छत पर रहने को मजबूर हैं।
फर्रुखाबाद के भुड़िया भेड़ा में कटी सड़क पर बल्ली के सहारे निकालते ग्रामीण। जागरण
नाव पलटी, बल्लियों का सहारा
सड़क पर ईंट का चूल्हा बनाकर पीड़ित भोजन बना रहे हैं। बाढ़ के पानी की तेज धार में भुड़िया भेड़ा, कुतलुपुर व डांड़ीपुर सहित कई गांवों के संपर्क मार्ग कट गए हैं। भुड़िया भेड़ा में कटी सड़क पर बह रहे पानी में नाव पलट जाने से ग्रामीणों यूकेलिप्टस के पेड़ काटकर बल्लियां लगाकर जान जोखिम में डालकर आवाजाही कर रहे हैं। भुड़िया भेड़ा निवासी रविप्रकाश, कौशल, भृगनंदन, राजेश शुक्ला, रामवीर, जगराम व इंद्रपाल सहित कई ग्रामीणों ने ईंट पत्थर बोरियों में भरकर कटी सड़क पर डालकर धार रोकने के प्रयास किया। जब सफलता नहीं मिली तो ग्रामीणों ने कई बल्लियां लगाकर आवागमन शुरू कर दिया। गांवों में बाढ़ का पानी भरा होने से ग्रामीण जुकाम, बुखार, खाज व खुजली से परेशान हैं। फखरपुर के बबलू, मनोज, लल्ला तिवारी, गोविंद व जगवीर बताते हैं कि बाढ़ के पानी में निकलने से पैर सड़ गए हैं। कई लोग बुखार से परेशान हैं। एसडीएम संजय कुमार सिंह ने बताया कि बाढ़ प्रभावित गांवों में स्वास्थ्य टीम कैंप लगाकर दवाइयां वितरित कर रही हैं।
नाव बंद होने से स्कूल जाने के इंतजार में खड़े रहे छात्र
शमसाबाद में बाढ़ के पानी में कटी सड़क पर चल रही नाव शुक्रवार को पलट गई। जिससे कई छात्र व ग्रामीण गंगा में गिर गए। शनिवार को पुलिस मामले में एक नाविक को पूछताछ के लिए लाई। इस पर दूसरा नाविक भी नाव खड़ी करके चला गया और प्राइवेट स्टीमर भी नहीं चली। इस पर छात्र घर वापस चले गए। वहीं कुछ लोग इंतजार करते रहे और कुछ पानी में घुसकर निकले। वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर तीन घंटे बाद नाव व स्टीमर चलना शुरू हुए। वहीं बाढ़ के पानी के कटान से बालू ठेकेदार के कर्मचारियों के कमरे व एक मोबाइल टावर बह गया। गांव बिरिया डाड़ा से कुआंखेड़ा जाने वाला मार्ग बाढ़ के पानी में गांव कासिमपुर तराई के पास कट गया। गांव के किनारे कटान भी शुरू हो गया है। ग्रामीणों ने बताया कि शनिवार दोपहर 40 साल से अधिक पुराना बरगद का पेड़ भी गंगा में समा गया।
हमीरपुर में यमुना में हुई कटान से जमींदोज हुआ कच्चा घर व मौजूद लोग। जागरण
Hamirpur यमुना की कटान से जमींदोज हुआ कच्चा घर
यमुना नदी के कटान के कारण शनिवार सुबह एक कच्चा घर जमींदोज हो गया, जिससे पीड़ित परिवार बेघर हो गया है। पीड़ित परिवार ने जिलाधिकारी को ज्ञापन देकर मुआवजा और आवास की मांग की है। मेरापुर मुहल्ले के निवासी राजू भटनागर ने बताया कि उनका मकान यमुना नदी के निकट स्थित था, जहां सरकारी पिचिंग भी बनी हुई थी। बाढ़ के कारण पिचिंग बह गई, जिससे उनका कच्चा मकान भी गिरकर बह गया। अब परिवार को रहने में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। मुहल्ले के सभासद रजनीश सविता ने पीड़ित के घर जाकर स्थिति का जायजा लिया और मदद का आश्वासन दिया। नगर पालिका चेयरमैन कुलदीप निषाद ने कहा कि पीड़ित परिवार को हर संभव सहायता प्रदान की जाएगी।
Unnao में घट रहा गंगा का जलस्तर, गंदगी व मच्छरों से ग्रामीण परेशान
गंगा नदी का जलस्तर बीते 24 घंटे में एक सेंटीमीटर और घट गया है। शुक्रवार को शाम छह बजे गंगा नदी का जलस्तर 112.560 मीटर दर्ज किया गया था। जो शनिवार को शाम छह बजे 112.550 मीटर हो गया है। गंगा अब खतरे के निशान से 45 सेंटीमीटर नीचे पहुंच गई है। हालांकि गंगा अभी भी चेतावनी बिंदु से 55 सेंटीमीटर ऊपर बह रही हैं। कटरी क्षेत्र में पानी कम होने के बाद गंदगी से लोग बीमार हो रहे हैं। मच्छरों की भरमार होने से लोग परेशान हैं। माना बंगला से बाबू बंगला, टपरा व बसधना मार्ग में अभी भी बाढ़ का पानी भरा होने से यहां के लोगों को आने जानें में कठिनाई हो रही है। लोग पानी मझा का आ जा रहे है। गांव की गलियों और घरों के सामने बदबूदार पानी व कीचड़ भरा हुआ है।
Shuklagunj में घटा गंगा जलस्तर, दिक्कतें नहीं कम
मोहम्मदनगर, गोताखोर, हुसैननगर, शाहीनगर, करबला, गायत्रीनगर भातूफार्म, बालूघाट, सीताराम कालोनी, राजीवनगर, अंबिकापुरम, श्रीनगर, मालवीय नगर, गंगानगर व रविदासनगर समेत अधिक बस्तियों में अभी भी बाढ़ का पानी भरा हुआ है। गंगा नदी का पानी कम होने के बाद गंदगी व्याप्त है। मच्छरों का प्रकोप काफी बढ़ गया है। तमाम घरों में लोग बीमार हो रहे हैं। संक्रामक रोगों का खतरा बढ़ गया है। कीचड़ व गंदगी की वजह से आवागमन में लोगों को परेशानी हो रही है।
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