ग्राहकों के भरोसे का कत्ल! कानपुर में हालमार्क के नाम पर छल... तांबे-पीतल पर लेजर मशीन से लग रही थी सोने की मुहर
कानपुर में सोने की शुद्धता के नाम पर बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है, जहां नकली हॉलमार्किंग सेंटर तांबे-पीतल के जेवरों ...और पढ़ें

जब्त की गई हालमार्किंग मशीन। पुलिस
HighLights
कानपुर में नकली हॉलमार्किंग सेंटर का भंडाफोड़
तांबे-पीतल पर लेजर मशीन से लग रही थी मुहर
तीन साल से चल रहा था ग्राहकों के साथ छल
जागरण संवाददाता, कानपुर। जिस हालमार्क के निशान को आम उपभोक्ता सोने की शुद्धता की अंतिम गारंटी और अपनी गाढ़ी कमाई की सुरक्षा समझता था, सराफा बाजार में उसी भरोसे का कत्ल हो गया। बिरहाना रोड के एक शोरूम में मिलावटी सोना पकड़े जाने के बाद अवैध हालमार्किंग सेंटर का पता चला।
जांच में पता चला कि सराफा बाजार में पिछले तीन साल से नकली हालमार्किंग का खेल चल रहा था। बिना जांच और मानकों का पालन किए सामान्य लेजर मशीन से जेवरों पर सोने की शुद्धता दर्शाने वाले निशान और बीआइएस के लोगो जैसी मुहर उकेरी जा रही थी।
हैरानी की बात यह है कि अधिकृत हालमार्किंग केंद्रों के संचालकों ने बीआइएस (ब्यूरो आफ इंडियन स्टैंडर्ड्स) की बैठकों और सेमिनारों में इस फर्जीवाड़े की शिकायतें कीं, लेकिन प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।
शहर में बीआइएस से मान्यता प्राप्त आठ हालमार्किंग सेंटर हैं। चौक बाजार में जिस सेंटर को पकड़ा गया है वह अवैध बताया जा रहा है। अधिकृत केंद्रों पर सोने की शुद्धता जांचने के लिए निर्धारित मानकों के अनुरूप उपकरण और तकनीकी व्यवस्था की जरूरत है जिसमें 25 से 30 लाख रुपये का निवेश होता है।
पुलिस ने जो मशीन जब्त की है वह दो से ढाई लाख रुपये की सामान्य लेजर मार्किंग मशीन है। ऐसी मशीनों का उपयोग विभिन्न धातुओं पर नाम या डिजाइन उकेरने जैसे कामों में भी होता है। हालमार्क सेंटर संचालक अमोल गुप्ता के अनुसार ऐसे मामलों से न केवल ग्राहकों के साथ धोखाधड़ी का खतरा बढ़ता है, बल्कि नियमों का पालन कर कारोबार करने वाले अधिकृत केंद्रों की विश्वसनीयता भी प्रभावित होती है। अब पुलिस की कार्रवाई के बाद मामले की जांच और फर्जीवाड़े में शामिल लोगों का नाम उजागर होने की उम्मीद है।
छह अंकों के एचयूआइडी के बिना कैसे हो रही थी मार्किंग
नियमों के तहत हालमार्क वाले सोने के आभूषणों पर बीआइएस के मानक चिह्न, कैरेट और शुद्धता की जानकारी के साथ छह अंकों का विशिष्ट हालमार्क यूनिक आइडेंटिफिकेशन (एचयूआइडी) कोड दर्ज होता है। ग्राहक इसे बीआइएस केयर एप पर जाकर जांच भी सकते हैं। इस एप पर जेवर की पूरी जानकारी और फोटो भी होती है। अगर एप पर एचयूआइडी कोड के साथ जेवर की फोटो नहीं है तो वह नकली हो सकता है।
वास्तविक शुद्धता की पुष्टि के लिए मान्य जांच प्रक्रिया जरूरी
आल इंडिया ज्वैलर्स एंड गोल्डस्मिथ फेडरेशन के अध्यक्ष पंकज अरोड़ा के अनुसार आभूषण की वास्तविक शुद्धता की पुष्टि के लिए मान्य जांच प्रक्रिया जरूरी है। बीआइएस केयर एप पर जेवर की फोटो नहीं है तो ज्वैलर्स को भी ऐसे जेवर की खरीद नहीं करनी चाहिए। सराफा बाजार में नकली हालमार्क के मामले आ रहे थे लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई थी।
हालमार्क लगे होने के बाद भी बाजार में नकली जेवर पहुंच रहे हैं यह शिकायत लंबे समय से मिल रही थी अब मामला पकड़ में आया है तो उम्मीद है कि जो लोग फर्जीवाड़े में शामिल हैं उन पर ठोस कार्रवाई होगी।
-रवि गुप्ता, महामंत्री, नयागंज सराफा एसोसिएशन
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