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    कानपुर में ई-कॉमर्स साइट पर ट्रेडिंग के नाम पर धोखाधड़ी, कारोबारी से ठगे 55.15 लाख रुपये

    Updated: Sat, 03 Jan 2026 03:22 PM (IST)

    कानपुर में एक आर्टिफिशियल ज्वेलरी कारोबारी नवीन कुमार पांडेय ई-कॉमर्स साइट के जरिए साइबर ठगी का शिकार हो गए। ठगों ने उन्हें ऑनलाइन उत्पादों की खरीद-बि ...और पढ़ें

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    ई-कॉमर्स साइट पर ट्रेडिंग करने का झांसा देकर कारोबारी से ठगे 55.15 लाख।

    जागरण संवाददाता, कानपुर। ई-कॉमर्स साइट के जरिए साइबर ठगों ने चकेरी के आर्टिफिशियल ज्वेलरी कारोबारी को अपने जाल में फंसा लिया, उन्हें ऑनलाइन विभिन्न प्रकार के उत्पाद करने और उसी साइट पर बिक्री करने पर ज्यादा लाभांश का लालच दिया। ठगों के जाल में फंसा कारोबारी ने एक माह के भीतर लगभग 55.15 लाख रुपये कई बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिए, लेकिन जब लाभांश नहीं मिला तब ठगी का अहसास हुआ।

    इस दौरान कारोबारी ने निराला नगर स्थित एक्सिस बैंक में सात लाख रुपये भी जमा किए थे, जो खाता जाजमऊ के न्यू अंबेडकर नगर की एक यूएस लेदर फर्म के नाम से खुला था।

    वह वहां पहुंचे तो कोई और रहते मिला। पीड़ित ने डीसीपी क्राइम से गुहार लगाई। उनके आदेश पर साइबर क्राइम थाने में मुकदमा दर्ज हुआ।

    चकेरी के देहलीसुजानपुर भवानी नगर निवासी आर्टिफिशियल ज्वेलरी कारोबारी नवीन कुमार पांडेय के मुताबिक, फेसबुक पर विश ई-कॉमर्स नाम की कैलिफोर्निया की वेबसाइट दिखी थी।

    बताया गया कि कंपनी से जुड़ने पर लोग ऑनलाइन अपने उत्पाद खरीद सकते हैं, जिसे कंपनी द्वारा दूसरी कंपनी को अच्छे दामों पर बिक्री भी करवा देते हैं। वह उस कंपनी के एजेंट के झांसे में आ गए। उन्हें पहले साइकिल भी कुछ और उत्पाद खरीदवाए गए।

    ऐसे ही उनसे चार नवंबर 2025 से दिसंबर तक 5.15 लाख रुपये विभिन्न खातों में ट्रांसफर कराए। इसबीच उनके द्वारा खरीदे गए आनलाइन उत्पादों की बिक्री दिखाकर उन्हें लाभांश भी भेजे, लेकिन कुछ दिन बाद लाभांश मिलना बंद हो गया।

    कारोबारी के मुताबिक, 24 दिसंबर को मध्य प्रदेश के शहडोल निवासी विकास यादव ने फोन कर एक्सिस बैंक में तीन लाख रुपये जमा करने के लिए खाता संख्या दिया था। ये भी कहा कि अगर रुपये नहीं दिया तो एक भी रुपये नहीं वापस होंगे, जिस पर उन्हें ठगी होने का शक हुआ था।

    पीड़ित ने बताया कि एक बैंक खाता निराला नगर स्थित एक्सिस बैंक का था, जिसमें सात लाख रुपये जमा किए थे। उसका पता बैंक से निकलवाय तो वह जाजमऊ के न्यू अंबेडकर नगर का निकला। वहां जाकर पता किया तो कोई फैक्ट्री नहीं थी, बल्कि कई अन्य लोग रह रहे थे।

    उन्होंने आशंका जताई कि वहीं के कुछ लोग भी साइबर ठगों के गिरोह से जुड़े हैं। साइबर क्राइम थाना प्रभारी सतीश चंद्र यादव ने बताया कि मामले की जांच चल रही है, जिन बैंकों में रुपये ट्रांसफर हुए हैं। उन बैंकों का लगा ई-मेल भेज खाताधारकों की जानकारी व रुपये हैं या नहीं। इसकी जानकारी जुटाई जा रही है।