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Kanpur Naptol Ke Column: वाट्सएप ग्रुप से तौबा.. अब हम न देंगे बधाई

कानपुर शहर में व्यापार मंडल की राजनीतिक गतिविधियों को नापतोल के कालम में पढ़िये। इस बार नेता जी ने कोरोना कर्फ्यू में दुकान खोली तो किसी ने वीडियो बनाकर वायरल कर दिया। एक विधानसभा सीट पर कई व्यापारी नेताओं की नजर लगी है।

By Abhishek AgnihotriEdited By: Published: Thu, 13 May 2021 09:55 AM (IST)Updated: Thu, 13 May 2021 01:24 PM (IST)
कानपुर शहर की व्यापारिक गतिविधियों का कॉलम।

कानपुर, [राजीव सक्सेना]। शहर व्यापारिक गतिविधियों को प्रमुख केंद्र माना जाता है, ऐसे में यहां व्यापारिक राजनीतिक गतिविधियां भी ज्यादा रहती हैं। ऐसी ही व्यापारियों की राजनीति से जुड़ी खबरें जो सुर्खियां नहीं बन पाती हैं लेकिन चर्चा का विषय रहती है उन्हें चुटीले अंदाज में आप तक लाया है हमारा नापतोल के कॉलम...।

दोस्त...दोस्त न रहा

संगठन इसीलिए होते हैं कि सभी लोग एक साथ मजबूती से आगे बढ़ सकें लेकिन एक नेताजी ने अपने ही साथी का वीडियो वायरल कर दिया। हालांकि नैतिकता की दृष्टि से देखा जाए तो नेताजी बिल्कुल सही थे। आखिर कफ्र्यू में जब सब दुकानें बंद कराई गई हैं तो चोरी-छिपे दुकान क्यों खोली गई। किसी ने खुली दुकान का वीडियो बना लिया और कर दिया वायरल। वीडियो नेताजी के पास भी पहुंचा। वे भी इस पर खूब नाराज हुए कि जब सभी लोग दुकान बंद किए हुए हैं तो उनके ही संगठन के एक साथी कैसे और क्यों दुकान खोले हैं। उन्होंने भी तमाम जगह वीडियो बढ़ा दिया। संगठन के नेताओं ने समझाया कि क्योंं अपने साथी का नुकसान कर रहे हो, कुछ कमाई कर लेगा तो क्या हो जाएगा लेकिन नेताजी भी अड़ गए कि दुकान खोली ही क्यों गई। आखिर साथी पर कार्रवाई हुई तब जाकर वह शांत हुए।

वाट्सएप ग्रुप से तौबा

पिछले सप्ताह व्यापारियों का एक वाट््सएप ग्रुप बना। ग्रुप बना तो खींचतान भी खूब मची। अधिकारियों से वार्ता की बात तय हुई और बात हो भी गई लेकिन अलग-अलग संगठन के नेताओं को एक डोर में पिरोने का प्रयास इतना आसान नहीं था। हर तरफ से अलग-अलग तरह की बातें आने लगीं तो एडमिन परेशान हो गए। सबको शांत करने के लिए उन्होंने सिर्फ एडमिन की बात ही पोस्ट हो सके इसकी व्यवस्था कर दी। अब वाट््सएप ग्रुप में लोग अपनी बात नहीं कह पाए तो उन्होंने एडमिन के खिलाफ व्यापारी समूहों में चलने वाले दूसरे वाट््सएप ग्रुपों में अपनी सख्त नाराजगी जतानी शुरू कर दी। कुछ लोगों ने फोन कर सीधे भी एडमिन से नाराजगी जताई। एडमिन भी सबकी बातें सुनते-सुनते पक चुके थे। आखिर उन्हें भी गुस्सा आया और उन्होंने भी वाट््सएप ग्रुप छोड़ दिया। उनके ग्रुप छोड़ते ही तमाम बड़े नेता भी ग्रुप से बाहर हो गए।

देखो खुलवा ही दिया बाजार

चित भी मेरी, पट भी मेरी... कहावत तो सभी ने सुनी होगी। इसे पिछले दिनों एक व्यापारी नेता ने चरितार्थ कर दिया। पुलिस कमिश्नर के सामने दुकान खोलने की बात उठाने वाले व्यापारी नेता ने शहर से लेकर आसपास के जिलों तक के फुटकर व्यापारियों की माल खत्म होने की समस्या रखी। पुलिस कमिश्नर ने जल्द दुकानें खुलवाने की बात कही थी लेकिन किस दिन, यह तय नहीं हुआ। व्यापारी नेता के संगठन के लोगों ने ही उनका जबरदस्त विरोध कर दिया कि उन्होंने दुकानें खुलवाने की बात क्यों की। पदाधिकारियों ने उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही की बात कही तो व्यापारी नेता ने आश्वस्त किया कि दुकान अभी नहीं पांच-छह दिन बाद खुलेंगी। किसी तरह मामला ठंडा पड़ा लेकिन पुलिस ने एक दिन बाद ही दुकानें खुलवा दीं। वाट््सएप ग्रुप में अभी दुकानें न खुलने की बात कहने वाले नेताजी बाजार में घूमकर कहने लगे कि देखा खुलवा दी दुकानें।

हम न देंगे बधाई....

राजनीति क्या कुछ नहीं कराती। शहर में एक विधानसभा सीट खाली है। कई व्यापारी नेताओं की नजर इस पर लगी है। सबसे ज्यादा समस्या यह है कि एक व्यापारिक संगठन के तीन नेता इस पर अपने-अपने जुगाड़ तो फिट कर ही रहे हैं, इसके अलावा वे जनता को बधाई संदेश भी दे रहे हैं। अब संगठन में बड़े पद पर चुनाव हुआ और इसी सीट के एक बड़े दावेदार ने अपने संगठन का सबसे बड़ा पद हासिल कर लिया। जगह-जगह से बधाई संदेश आने शुरू हुए। पूरे प्रदेश से भी और कानपुर के व्यापारियों के भी लेकिन इस सीट के लिए दावा कर रहे उन्हीं के संगठन के पदाधिकारी ने कोई बधाई संदेश तक नहीं दिया। व्यापारियों के बीच इसकी खूब चर्चा हो रही है। सभी का कहना है कि टिकट की दौड़ में छोटे न पड़ जाएं, इसलिए बधाई संदेश न देना भी राजनीति का ही एक हिस्सा है।


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