All Souls Day Special: कानपुर का अनोखा कब्रिस्तान, जहां नाम नहीं अंकों से होती है कब्रों की पहचान; 300 साल पुराना है इतिहास
कानपुर के कचहरी स्थित ऐतिहासिक गोरा कब्रिस्तान में कब्रों की पहचान अंकों से होती है, जो 1700 ईस्वी में स्थापित ...और पढ़ें

सिविल लाइंस स्थित गोरा कब्रिस्तान में कब्र पर अंकित 19 का अंक। जागरण वहीं, लेखक जोई येलांड द्वारा सिविल लाइंस स्थित गोरा कब्रिस्तान पर लिखी गई पुस्तक का पृष्ठ। कानपुर इतिहास समिति
HighLights
1700 में अस्तित्व में आया था सिविल लाइंस का गोरा कब्रिस्तान
1950 के बाद किसी को नहीं दफनाया गया यहां, विदेश से भी आते हैं शोधार्थी
इंग्लैड से आई लेखिका ने मिट चुके शिलालेखों वाली कब्रों को पुराने रिकार्ड से नंबर दिए
पुरातत्व विभाग की देख-रेख में है कब्रिस्तान, सार्वजनिक रूप से जाने की अनुमति नहीं
मोहम्मद दाऊद खान, कानपुर। आल सोल्स डे पर आज हम आपको एक ऐसे कब्रिस्तान की जानकारी देते हैं, जहां अंकों से कब्रों की पहचान होती है। यह कचहरी के पास स्थित संरक्षित ईसाई कब्रिस्तान है, जो 1700 ईस्वी में अस्तित्व में आया था। हालांकि वर्ष 1950 के बाद से यानी 76 वर्षों से यहां किसी को नहीं दफनाया गया है।
इस कब्रिस्तान की देखरेख की जिम्मेदारी भारतीय पुरातत्व विभाग के पास है। यहां विदेश से शोधार्थी आते रहते हैं। इसको गोरा कब्रिस्तान भी कहते हैं। यहां हर कब्र पर अंक लिखे हैं। सबसे पुरानी कब्र पर अंकों में 1781 दर्ज है। माना जाता है कि यह अंक उस वर्ष को दर्शाते हैं, जब शव को कब्र में दफन किया गया।
कानपुर इतिहास समिति के महासचिव अनूप शुक्ला बताते हैं कि गोरा कब्रिस्तान में हर कब्र पर अंक लिखा है। वे बताते हैं कि कुछ कब्रों पर शिलालेख नहीं थे, इंग्लैंड की लेखिका जोई येलांड ने उनका सर्वेक्षण किया, पुराने रिकार्ड खंगाले, अग्रेजों के समय के इमेजिंग स्केच देखे, उसमें दर्ज कब्रों में दफन अंग्रेजों के नाम व कब्रों की स्थिति देखी। उनके आधार पर उनकी पहचान की गई।
इसके बाद उनको अंक दिए गए। हालांकि कई कब्रों पर अभी भी शिलालेख लगे हैं। यहां अंक एक पर जान से की पत्नी एनी की कब्र है। 1787 अंक वाली कब्र कर्नल जान स्टेट की, 1804 अंक वाली कब्र एलन लुईस की, 1852 अंक वाली कब्र जान बैनेट की, 1855 वाली कब्र कर्नल जान की है।
सिविल लाइंस स्थित गोरा कब्रिस्तान । जागरण
1200 कब्रों में 704 सही हालत में मिली
इंग्लैंड की लेखिका जोई येलांड ने सिविल लाइंस स्थित गोरा कब्रिस्तान के 1983 में सर्वेक्षण के बाद ए गाइड टू द कचहरी सिमेट्री एंड द अर्ली हिस्ट्री आफ कानपुर पुस्तक लिखी थी। इसके अनुसार 1200 कब्रों वाले कब्रिस्तान में 704 कब्रें सही हालत में पाई गईं। इनमें से 291 कब्रों पर शोक लेख लिखे शिलापट्ट भी थे। जोई येलांड की पुस्तक के अनुसार कानपुर में 6000 अंग्रेज दफन किए गए। इनमें से लगभग 1000 अंग्रेज क्रांति के दौरान मारे गए थे।
हीरामन का पुरवा में दफन होते थे अंग्रेज सिपाही, कब्जों में गुम हो चुकी कब्रें
हीरामन का पुरवा स्थित गोरा कब्रिस्तान में सार्जेंट के नीचे की रैंक के सिपाही दफन किए जाते थे। यह कब्रिस्तान कब्जों में गुम हो चुका है। यहां कब्रिस्तान पर ही पक्के मकान बन चुके हैं। वर्तमान समय में स्थिति यह है कि केवल गोरा कब्रिस्तान का नाम ही बाकी रह गया है। इसी तरह मीरपुर में भी गोरा कब्रिस्तान कब्जों की भेंट चढ़ चुका है। यहां भी मकानों के नीचें कब्रें दब चुकी हैं।
देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।
