कानपुर (जागरण संवाददाता)। आइपीएस सुरेंद्र दास के आत्महत्या मामले में पुलिस ने सुसाइड नोट से लेकर सरकारी आवास पर मिले साक्ष्यों को सुरक्षित कर लिया है। पुलिस परिजन की तहरीर मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की बात कह रही है। उनके भाई नरेंद्र के मुताबिक अंतिम संस्कार के बाद होने वाले संस्कार पूरे होते ही मां इंदू व परिजन से बातचीत कर आगे का निर्णय लिया जाएगा। भाई की मौत के जिम्मेदारों को किसी भी सूरत में नहीं छोड़ेंगे, चाहे वह कोई भी हो।

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भाई नरेंद्र ने बताया कि इस घटना से अभी मां इंदू उबर नहीं पाई है। आज दूध-भात के चलते उनसे कोई बात नहीं हुई। अभी तक की परिस्थितियों व बयानबाजी से साफ है कि सुरेंद्र ने पारिवारिक कलह के चलते ही कदम उठाया। आगे क्या करना है जल्द निर्णय लिया जाएगा वहीं पत्नी डॉ. रवीना की तरफ से इस पर कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। उनके पिता डॉ. रावेंद्र सिंह ने सोमवार को सभी आरोपों को निराधार बताते हुए दोनों के बीच मधुर संबंध होने की बात कही थी।

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दूसरी तरफ पुलिस आइपीएस सुरेंद्र दास के सुसाइड से जुड़े सारे तथ्यों को एकत्र करने के साथ उनसे जुड़े बयानों को भी जांच के दायरे में लाने की तैयारी कर रही है। एसपी क्राइम राजेश कुमार का कहना है कि आइपीएस सुरेंद्र दास के सुसाइड मामले में पुलिस ने घटनास्थल से सामान व कुछ साक्ष्य एकत्र किए हैं। परिजन की तरफ से तहरीर मिलने के बाद ही जांच प्रक्रिया पर विचार किया जाएगा। अभी तक कोई तहरीर नहीं मिली है।

बेटी सदमे में, नहीं लेंगे कोई सरकारी मदद

आइपीएस के ससुर डॉ. रावेंद्र सिंह ने कह कि मेरी बेटी पति की मौत से सदमे में है, उसकी हालत शब्दों में बयां नहीं की जा सकती, ऊपर से बेतुके सवाल-जवाब पूरे परिवार को मानसिक प्रताडऩा दे रहे हैं। सुरेंद्र के सुसाइड नोट से लेकर उनके किसी घनिष्ठ ने कभी दोनों के बीच के संबंधों पर अंगुली नहीं उठाई। सर्वोदय नगर स्थित ईएसआइ हास्पिटल कैंपस निवासी डॉ. सिंह आइपीएस सुरेंद्र की मौत के बाद से बेटी रवीना के साथ लखनऊ में रिश्तेदार के घर पर हैं।

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उन्होंने फोन पर बताया कि किसी भी महिला के लिए पति की मौत दुनिया का सबसे बड़ा कष्ट होता है। जैसी मेरी बेटी पर बीत रही है, किसी के साथ ऐसा न हो। श्री सिंह ने साथ में यह भी बताया कि परिवार बेटी के लिए कोई भी सरकारी मदद, नौकरी या सुविधा लेने का न ही इच्छुक है और न ही लेगा। हम लोग सिर्फ बेटी को इस सदमे से और पुरानी यादों से निकालने व हादसे की पीड़ा से दूर ले जाने के लिए माहौल बदलने की कोशिश कर रहे हैं।

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Posted By: Abhishek