Kanpur Panki Power Plant: 660 मेगावाट की इकाई ग्रिड से जुड़ी, 8236 करोड़ खर्च कर तैयार हुआ पावर प्लांट
कानपुर का 660 मेगावाट पनकी थर्मल एक्सटेंशन प्रोजेक्ट ग्रिड से जुड़ गया है और अप्रैल 2025 से व्यावसायिक उत्पादन शुरू ...और पढ़ें

HighLights
660 मेगावाट पनकी थर्मल इकाई ग्रिड से जुड़कर उत्पादन शुरू
परियोजना की लागत 8236 करोड़ रुपये तक पहुंची, देरी हुई
आधुनिक सुपर क्रिटिकल तकनीक से लैस, एआई का होगा उपयोग
जागरण संवाददाता, कानपुर। यूपी राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड पनकी स्थित 660 मेगावाट की एक एकल यूनिट थर्मल एक्सटेंशन प्रोजेक्ट (पीटीईपी) आधुनिक बिजली परियोजना तैयार होकर ग्रिड से जुड़ चुकी है। यहां अप्रैल 2025 से व्यावसायिक बिजली उत्पादन भी शुरू हो गया है।
वैसे, इस परियोजना को वर्ष 2022 में पूर्ण होना था, पर ठेका कंपनियों की ढिलाई से जहां एस्टीमेट को तीन बार पुनरीक्षित करना पड़ा। वहीं, स्वीकृत 4700 करोड़ रुपये से 3,536 करोड़ रुपये अधिक खर्च करने पड़े। काम में ढिलाई की वजह से परियोजना कुल 8,236 करोड़ रुपये में पूर्ण हो पाई है। हालांकि, अभी भी कई महत्वपूर्ण सिविल कार्य होने बाकी हैं।
शनिवार को पनकी स्थित अधिकारी अतिथि गृह में यूनिट के मुख्य अभियंता विजय बहादुर ने पत्रकारों को बताया कि यह इकाई अप्रैल 2025 में कमीशन हुई। इसके बाद से लगातार प्रगति पर है। बताया कि प्रबंध निदेशक मयूर महेश्वरी ने इकाई की लगातार समीक्षा की है।
परिणाम ये है कि बिजली उत्पादन इकाई का डीसी (डायरेक्ट करंट) 78 प्रतिशत से बढ़कर अब 83 फीसदी पहुंच गया है, जो काफी बेहतर है। साथ ही पर्यावरण मानकों को पूरा कर रहे हैं। पावर प्लांट अब अपनी क्षमता का अधिक इस्तेमाल कर पा रहा है और पहले से ज्यादा बिजली पैदा कर रहा है।
उन्होंने कहा कि बिनगवां एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) से पानी लेकर परियोजना में पहले से ही प्रयोग कर रहे है। साथ ही जल प्रबंधन के भी उपाय किए गए हैं। वर्षाजल को एकत्र कर रहे हैं, उसे भी प्लांट में उपयोग में ला रहे हैं। प्रतिदिन 40-45 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रतिदिन) पानी की जरूरत पड़ रही है। इकाई में 315 लोग नियमित और अन्य 1500 लोगों को रोजगार मिला हुआ है।
मुख्य अभियंता ने बताया कि ग्रिड की मांग के अनुसार, एसएलडीसी (स्टेट लोड डिस्पैच सेंटर) के द्वारा इकाई में उत्पादन घटाया-बढ़ाया जाता है। इकाई पूरी क्षमता उत्पादन के लिए उपलब्ध है। श्रमिकों के लिए इकाई परिसर में श्रमिक सुविधा केंद्र भी है। इस मौके पर केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआइएसएफ) के कमांडेंट अनुपम त्रिपाठी भी थे।
एआइ के प्रयोग से इकाई को करेंगे हाई-फाई
अधीक्षण अभियंता रामकुमार ने बताया कि परियोजना में एआइ तकनीकी का प्रयोग होगा। इसके लिए काम शुरू हो गया है। आइआइटी के विशेषज्ञों से भी सहयोग लिया जा रहा है। एआइ तकनीकी से डेटा मैनेजमेंट व अन्य कार्य आसान होंगे। इकाई को ट्रिपिंग से पूरी तरह मुक्त करेंगे। इकाई में एयर क्वालिटी के लिए मीटर लगे हैं।
नियंत्रण में धूल, कार्बन उत्सर्जन में भी आई कमी
इंजीनियरों ने बताया कि पनकी में स्थापित यह यूनिट आधुनिक सुपर क्रिटिकल तकनीकी से लैस है। यूनिट में पारंपरिक थर्मल प्लांटों की तुलना में काफी कम काेयले की खपत होती है, जिससे कार्बन उत्सर्जन एवं राख दोनों में कमी आई है। धूल नियंत्रण में हैं। यह प्लांट लिक्यूड डिस्चार्ज बेस है। यूनिट से उत्पादित होने वाली बिजली का शत-प्रतिशत हिस्सा सीधे उत्तर प्रदेश को मिलता है। जिससे विशेष रूप से कानपुर और आसपास के क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति बेहतर हुई है और कटौती से राहत मिली है।
प्रधानमंत्री ने रखी थी आधारशिला
पनकी में बने 660 मेगावाट के थर्मल पावर प्लांट परियोजना को 2018 में स्वीकृत हुआ था। परियोजना की आधारशिला आठ मार्च 2019 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रखी थी।
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