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नए साल से 14 अंकों का होगा ई-वे बिल, सॉफ्टवेयर अपडेट करना अनिवार्य

Published: Fri, 06 Nov 2026 11:09 PM (IST)

नए साल 2027 से ई-वे बिल 14 अंकों का हो जाएगा, जिसके लिए कारोबारियों को अपने सॉफ्टवेयर अपडेट करने होंगे। ...और पढ़ें

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HighLights

  1. एक जनवरी 2027 से ई-वे बिल 14 अंकों का होगा

  2. कारोबारियों को अपने कंप्यूटर सॉफ्टवेयर अपडेट करने होंगे

  3. शुरुआती त्रुटियों पर अर्थदंड न लगाने की मांग

अखिलेश तिवारी, कानपुर। अब माल परिवहन से जुड़े कारोबारियों को नए साल से ई-वे बिल जारी करने के लिए बदले हुए नंबरिंग फार्मेट के अनुसार तैयारी करनी होगी। एक जनवरी,2027 से ई-वे बिल मौजूदा 12 अंकों के स्थान पर 14 अंकों का हो जाएगा। इसी प्रकार, कंसोलिडेटेड ई-वे बिल नंबर भी 10 के बजाय 11 अंकों का होगा। जीएसटी नेटवर्क (जीएसटीएन) ने इस बदलाव के बारे में चार नवंबर को एडवाइजरी जारी की है। इससे कारोबारियों को नए साल से पहले अपने कंप्यूटर साफ्टवेयर को बदलना पड़ेगा।


जीएसटीएन के अनुसार, देश में ई-वे बिल की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में मौजूदा नंबरिंग सिस्टम की क्षमता से भविष्य में काम नहीं चल पाएगा। इसे देखते हुए नंबरों की संख्या बढ़ाने का निर्णय लिया गया है, जिससे बढ़ते लेनदेन के बावजूद सिस्टम सुचारु रूप से काम कर सके। इस बदलाव का सबसे अधिक असर उन कारोबारियों पर पड़ेगा, जो अकाउंटिंग व एंटरप्राइज रिसोर्स प्लानिंग (ईआरपी) साफ्टवेयर के माध्यम से ई-वे बिल जनरेट करते हैं।


सीए हिमांशु सिंह ने बताया कि अब जीएसटी सुविधा प्रदाताओं, साफ्टवेयर कंपनियों व एपीआइ इंटीग्रेटर्स को भी अपने सिस्टम में जरूरी तकनीकी संशोधन करने होंगे। साफ्टवेयर कंपनियों को ई-वे बिल नंबर दर्ज करने को डेटाबेस में निर्धारित फील्ड का विस्तार करने के साथ डेटा वैलिडेशन, एपीआइ व प्रिंटिंग से जुड़ी व्यवस्थाओं को भी अपडेट करना होगा।

ऐसा नहीं करने पर नए फार्मेट वाले ई-वे बिल को साफ्टवेयर में सेव करने, प्रिंट करने व दूसरे सिस्टम में भेजने में दिक्कत आ सकती है। जीएसटीएन जल्द ही नए नंबरिंग फार्मेट की जांच के लिए सैंडबाक्स एनवायरमेंट उपलब्ध कराएगा। इसके माध्यम से साफ्टवेयर कंपनियां और तकनीकी सेवा प्रदाता नई व्यवस्था लागू होने से पहले अपने सिस्टम की टेस्टिंग कर सकेंगे।

उत्तर प्रदेश युवा ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के संरक्षक श्याम शुक्ला ने नई व्यवस्था को अतिरिक्त आर्थिक दबाव बताया। उन्होंने कहा कि इसमें व्यावहारिक समस्या होगी। इसलिए पहले तीन महीने तक ई-वे बिल जारी करने में होने वाली त्रुटियों पर अर्थदंड नहीं लगे और ट्रांसपोर्टरों को सुधार का मौका दिया जाए।

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