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David Dhawan: Kanpur है डेविड धवन का पहला फिल्म स्कूल, पढ़ें ठाकुर के पान से टाकीज के पर्दे तक की उनकी पूरी कहानी

Published: Fri, 06 Nov 2026 10:35 PM (IST)

बॉलीवुड निर्देशक डेविड धवन का बचपन और प्रारंभिक शिक्षा कानपुर में हुई, जिसने उनकी फिल्मों को गहरा प्रभावित किया। स्वरूप ...और पढ़ें

छात्र जीवन में सम्मानित होते डेविड धवन। इंटरनेट मीडिया

छात्र जीवन में सम्मानित होते डेविड धवन। इंटरनेट मीडिया 

HighLights

  1. डेविड धवन ने कानपुर में बिताया बचपन और प्रारंभिक शिक्षा ली

  2. कानपुर की गलियों और संस्कृति का उनकी फिल्मों पर गहरा प्रभाव

  3. मित्रों के साथ क्रिकेट और ठाकुर पान का आनंद लेते थे

विवेक मिश्र, कानपुर। वो मुंबई की चकाचौंध में रहते हैं, पर उनकी हंसी में आज भी कानपुर की गलियों की खनक है। वो डेविड धवन हैं - जिनकी फिल्मों ने पूरे हिंदुस्तान को हंसाया, पर जिनकी हंसी की पहली पाठशाला कानपुर में लगी थी। स्वरूप नगर की सड़कें, बेनाझाबर की गलियां, माल रोड की शामें - यही वो गलियारे थे, जहां वो साइकिल पर सपनों को टांगकर घूमते थे।

बीएनएसडी इंटर कालेज और क्राइस्ट चर्च इंटर कालेज की बेंचों पर बैठकर उन्होंने पढ़ाई से ज्यादा जिंदगी को पढ़ा। मालरोड में चलने वाली टाकीजों के अंधेरे हाल में बैठकर उन्होंने सिर्फ फिल्मों को देखा नहीं बल्कि जिया था।

बेनाझाबर स्थित बृजेंद्र स्वरूप पार्क के ग्राउंड में क्रिकेट की गेंद के पीछे भागते हुए उन्होंने टीम वर्क सीखा और स्वरूप नगर में ठाकुर पान वाले के पान की गिलौरी में उन्हें कनपुरिया अंदाज का असली स्वाद मिला। जी हां, ये शख्सियत हैं बालीवुड के प्रतिष्ठित फिल्म निर्देशक डेविड धवन। इनका नाम सुनते ही लोगों के चेहरों पर मुस्कान आ जाती है।

डेविड धवन का जन्म 16 अगस्त 1951 को त्रिपुरा के अगरतला में एक पंजाबी परिवार में हुआ था। उनका बचपन का नाम राजिंदर धवन था। पिता का हालसी रोड स्थित यूको बैंक में प्रबंधक पद पर ट्रांसफर होने के बाद पूरा परिवार कानपुर आ गया।

वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ डा. अवध दुबे बताते हैं स्वरूप नगर स्थित जहां आज हमारा आरके देवी रिसर्च एंड आइ हास्पिटल है, वहां पहले हमारा मकान था। उसमें ग्राउंड फ्लोर पर डेविड धवन परिवार समेत रहते थे और हमारा परिवार ऊपरी मंजिल पर रहता था।

हमारे परिवार जैसे संबंध रहे। डेविड के साथ बचपन में बृजेंद्र स्वरूप पार्क में काउंटी क्रिकेट साथ खेलना होता था। स्वरूप नगर में एक ठाकुर पान की दुकान होती थी, वहां का पान खाने के शौकीन थे। उन दिनों मैं डाक्टर बनने का सपना लिए मेडिकल की तैयारी कर रहा था।

डेविड को फिल्मी दुनिया में करियर बनाने का जुनून था। उन्होंने मुझे भी साथ में आने के लिए जोर दिया। वर्ष 1967 में मेरा मेडिकल में चयन हो गया और डाक्टरी पढ़ाई करने चला गया। वो फिल्मी दुनिया में आगे बढ़ने के लिए पुणे के फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट (एफटीआइआइ) में पढ़ाई व प्रशिक्षण लेने गए। हम लोग उसके बाद भी संपर्क बने रहे। उन्होंने कहा कि हमें खुशी होती है जब उन्हें सफलता की ओर बढ़ते देखता हूं।

मालरोड स्थित क्राइस्ट चर्च कालेज में रसायन विज्ञान विभाग में प्रोफेसर, रंगकर्मी व अभिनेत्री डा. मीत कमल बताती हैं कि वर्ष 1976 या 77 में बालीवुड के मशहूर फिल्म निर्देशक डेविड धवन क्राइस्ट चर्च व बीएनएसडी इंटर कालेज के पूर्व छात्र रहे हैं। क्राइस्ट चर्च कालेज में पूर्व छात्रों के साथ फोटो आज भी सहेज कर रखा गया है।

वर्ष 1995 से 1998 के बीच में डेविड धवन ने गोविंदा के साथ ''''कुली नंबर वन'''', ''''हीरो नंबर वन'''', ''''बड़े मियां छोटे मियां'''' जैसी सुपरहिट फिल्में दीं। इन फिल्मों को अगर ध्यान से देखें, तो उनमें कानपुर साफ नजर आता है। जैसे वही बोली, वही अंदाज, वही बेफिक्री।

हीरो का चाल-चलन, डायलाग की डिलीवरी, कामेडी का टाइमिंग - सब कुछ ऐसा लगता है, जैसे कहानी मुंबई की नहीं, कानपुर के किसी मोहल्ले की हो। दरअसल, डेविड ने कानपुर में बिताए दिनों को कभी अपने से अलग किया ही नहीं। उन्होंने अपने बचपन को ही पर्दे पर उतार दिया। यही वजह है कि आज डेविड धवन भले ही मुंबई में रहते हों, पर उनकी परवरिश, पढ़ाई और पहला सपना सब कानपुर से ही जुड़ा है।

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