वाराणसी-लखनऊ रेलमार्ग के दोहरीकरण को लेकर बड़ा अपडेट, मार्च से ट्रेनें भरेंगी रफ्तार
वाराणसी-लखनऊ रेलमार्ग पर जंघई जंक्शन से गौरा स्टेशन के बीच 29 किलोमीटर लंबी रेल लाइन दोहरीकरण का कार्य मार्च के अंत तक पूरा हो जाएगा। 339 करोड़ रुपये ...और पढ़ें

मार्च तक पूरा होगा 339 करोड़ की लागत से हो रहा दोहरीकरण कार्य।
जागरण संवाददाता, मीरगंज (जौनपुर)। वाराणसी- लखनऊ रेलमार्ग पर स्थित जंघई जंक्शन से गौरा स्टेशन के बीच 339 करोड़ रुपये की लागत से करीब 29 किलोमीटर लंबी रेल लाइन का दोहरीकरण कार्य तेजी से किया जा रहा है।यह निर्माण कार्य मार्च के अंतिम सप्ताह तक पूरा कर लिया जाएगा। इससे ट्रेनों की रफ्तार जहां बढ़ेगी तो वही यात्रियों के समय की बचत होगी।
वाराणसी-लखनऊ रेल मार्ग की दूरी करीब 303 किमी हैं। इस लंबे रेलखंड में अधिकांश हिस्सों पर पहले ही दोहरीकरण का काम पूर्ण हो चुका है। केवल जंघई जंक्शन से गौरा स्टेशन तक करीब 29 किमी रेल लाइन दोहरीकरण का कार्य नहीं हुआ था।
जिसके चलते वाराणसी से प्रतापगढ़ लखनऊ की तरफ आने-जाने वाली ट्रेनों की रफ्तार में कमी हो रही थी। जिसे अब युद्ध स्तर पर कार्य को पूरा करने का काम चल रहा हैं जो मार्च के अंतिम सप्ताह तक पूरा कर लिया जाएगा।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार इस रेलखंड का दोहरीकरण पिछले कई वर्षों से चल रहा था। जिसे रेलवे ने कई खंडों में विभाजित करते हुए प्रत्येक 20-30 किलोमीटर हिस्से पर अलग-अलग चरणों में निर्माण कार्य को पूरा कर गौरीगंज से लखनऊ के बीच ट्रायल सफलतापूर्वक पूरा कर ट्रेनों का संचालन हो रहा हैं।
अब मात्र जंघई से गौरा तक रेल दोहरीकरण का कार्य बाकी था। जिसके चलते एक ही ट्रैक पर जब दो दिशाओं की ट्रेनें चलती तो अक्सर स्पेशल ट्रेनों या सुपरफास्ट एक्सप्रेस को रास्ता देने के लिए किसी भी स्टेशन या बीच रास्ते में रोकना पड़ता हैं।
इससे उनका समय खराब होता और यात्रियों को परेशानी झेलनी पड़ती है किंतु अब रेल दोहरीकरण से इन समस्याओं से यात्रियों को जल्द ही निजात मिल जाएगी।
रेल दोहरीकरण से सबसे बड़ा लाभ यात्रियों को समय पर गंतव्य तक पहुंच जायेगे,तो वही दोहरीकरण के कारण रूट पर ट्रैफिक कम होगी और ट्रेनें तेज गति से दौड़ सकेंगी, इसके साथ ही समय की काफी बचत होगी।
दोहरीकरण के बाद एक दिशा के लिए अलग ट्रैक मिलने से ट्रेनों को बिना रुकावट चलाया जा सकेगा। इससे न केवल ट्रेनें समय पर चलेंगी, बल्कि रेल यात्रियों को बेहतर सुविधा भी मिलेगी। रेलवे ट्रैक की संख्या बढ़ाए जाने के साथ-साथ छोटे और बड़े स्टेशनों पर इंफ्रास्ट्रक्चर को भी अपग्रेड किया जा रहा है। -कोमल सिंह, स्टेशन अधीक्षक, जंघई।

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