हाथरस में बंदरों और कुत्तों का आतंक बढ़ा: दहशत में आए शहरवासी, रोजाना 200 से अधिक लोग हो रहे शिकार
हाथरस में कुत्तों और बंदरों का आतंक बढ़ गया है, जिससे लोग दहशत में हैं। महिलाएं और बच्चे अकेले बाहर निकलने से डर रहे हैं। जिला अस्पताल में प्रतिदिन 20 ...और पढ़ें

बंदर।
संवाद सहयोगी, जागरण. हाथरस। शहर में कुत्तों और बंदरों की बढ़ती संख्या लोगों के लिए बड़ी समस्या बन गई है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि पिछले वर्ष की तुलना में इस साल बंदरों और कुत्तों का आतंक ज्यादा बढ़ गया है, जिससे आमजन दहशत में हैं। स्थिति यह है कि महिलाएं और बच्चे घरों से अकेले निकलने में डर रहे हैं। वहीं, जिला अस्पताल में हर दिन वैक्सीन लगवाने वालों की भीड़ लग रही है।
चिकित्सकों के अनुसार हर दिन लगभग 200 लोगों को वैक्सीन लगवाने के लिए आ रहे हैं। इनमें से 150 के करीब नए मामले हैं। बाकी दूसरी और तीसरी डोज वाले लोग शामिल हें। पिछले छह माह में शहर में 175 गंभीर घाव से पीड़ित लोगों को इम्यूनोग्लोबुलिन की डोज लगाई गई है।
छह माह में 175 गंभीर घायलों को लगाई गई इम्यूनोग्लोबुलिन की डोज
शहर में कई इलाकों में सुबह मंदिर जाने वाली महिलाओं को अब किसी न किसी व्यक्ति को साथ लेकर जाना पड़ता है। बच्चों को विद्यालय लाने-ले जाने के लिए भी दो लोगों की ड्यूटी लगानी पड़ती है और हाथ में डंडा लेकर चलना आम बात बन गई है। इससे लोगों के दैनिक कामकाज पर असर पड़ रहा है। बच्चे न तो अकेले स्कूल जा पा रहे हैं और न ही वहां वापस आ पा रहे हैं। शहरवासियों और आसपास के ग्रामीणों ने नगर पालिका से जल्द कार्रवाई कर बंदरों और कुत्तों के आतंक से राहत दिलाने की मांग की है।
हाल ही में हुए मामले
- छोटा नबीपुर में बंदर से बचने के प्रयास में किशोरी छत से गिरी।
- सासनी के चामड़ मोहल्ला में बंदर झुंड ने बच्ची को छत से गिराया।
- तमनागढ़ी में बंदर से कपड़ा छुड़ाने में हाईटेंशन लाइन की चपेट में आई महिला बचाने आए पति की मृत्यु।
- गांव दरियापुर में बंदर के धक्के से अधेड़ छत से गिरा।
- नगला भुस में छत पर बंदरों को भागने गए युवक को लगा करंट।
- रुहेरी के निकट कुत्ते के टकराने बाइक गिर गई। हादसे में भाजपा नेता की मृत्यु हो गई।
खून निकल रहा है तो एआरवी के साथ सीरम भी लगवाना जरूरी
कुत्ता काटने के बाद अगर उस जगह पर सिर्फ खरोंचें ही आईं हैं तो एआरवी लगाने से रोकथाम हो जाती है, लेकिन अगर जख्म से खून का रिसाव शुरू हो जाता है तो तत्काल सीरम देना जरूरी होता है। सीएमएस डा. सूर्य प्रकाश का कहना है कि सीरम जल्द से जल्द लगना चाहिए, लेकिन अगर कोई एआरवी पहले लगवा ले और चार-पांच दिन बाद सीरम चढ़ाने को कहे तो उसका फायदा नहीं होता, क्योंकि उस समय पर एंटी बाडीज बन चुकी होती हैं। एआरवी की सभी पांच डोज पूरी करानी बेहद जरूरी होती है। जिला अस्पताल में प्रतिदिन 200 से अधिक लोग कुत्ते के शिकार होकर आते हैं। वहीं, जून से अब 175 लोगों को सीरम लगाया जा चुका हैं।
माहवार लगाई एआरवी
अगस्त-5500
अक्टूबर- 5865
नवंबर- 5909
दिसंबर- 6120
नोट- इसमें पहली, दूसरी और तीसरी वैक्सीन शामिल है।
बच्चों को अकेले बाहर भेजने में डर लगता है। कुत्ते सड़क पर बैठे रहते हैं, अचानक हमला कर देते हैं। कई बार शिकायत की जा चुकी है, लेकिन कोई पकड़ने नहीं आता है। ओमवीर सिंह
बंदर लगातार स्कूली बच्चों पर हमला करते रहते है। नगर में इनकी संख्या लगातार बढ़ रही है। स्कूली बच्चों मैं बंदरों को लेकर डर का माहौल है। मयंक वार्ष्णेय

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