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    'भरत भाई, कपि से उरिन हम नाहीं..'

    By JagranEdited By:
    Updated: Thu, 10 Oct 2019 01:10 AM (IST)

    रामलीला मंचन में श्रीराम-भरत मिलाप ने किया भावविभोर भाई के गले मिलकर रोये भरत ब्लर्ब- 14 वर्ष के वनवास की सीमा बीतते ही कुछ ही क्षणों में विषाद और ह ...और पढ़ें

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    'भरत भाई, कपि से उरिन हम नाहीं..'

    संवाद सहयोगी, हाथरस : श्रीरामलीला महोत्सव में बुधवार को श्रीराम-भरत मिलाप लीला के मंचन ने भावविभोर कर दिया। पहले 14 वर्ष के वनवास की समय सीमा बीतते देख भरत का राम की याद में भावुक होना, फिर हनुमान जी के अचानक पहुंचने से मुख पर प्रसन्नता के भाव उभरना, कुछ ही क्षणों में विषाद और हर्ष के मोहक मंचन ने मंत्रमुग्ध कर दिया।

    आचार्य कृष्णमुरारी व्यास बताते हैं कि भगवान राम रावण का वध करने के बाद लंका का राज्य विभीषण को सौंप देते हैं। उसके बाद हनुमान जी सीताजी को पालकी में बिठाकर राम के पास लाते हैं। रामजी उनकी अग्निपरीक्षा लेते हैं और इसके बाद पुष्पक विमान से सभी अयोध्या लौटते हैं। अयोध्या पहुंचने से पूर्व ही ऋषि भारद्वाज के आश्रम में पुष्पक विमान उतार लिया जाता है। वहां से प्रभु राम के कहने पर हनुमान जी ब्राह्मण का वेश धारण कर अयोध्या जाकर भरत को श्रीराम के वापसी की खुशखबरी सुनाते हैं। राम के आगमन की खबर सुनते ही समूची अयोध्या में खुशियों की लहर दौड़ जाती है। उसके बाद भरत व शत्रुघ्न अयोध्यावासियों के साथ राम का स्वागत सत्कार करने के लिए अगवानी करते हैं। अयोध्या पहुंचते ही श्रीराम दौड़कर भरत को गले से लगा लेते हैं। यहां हनुमान जी की भूमिका को लेकर राम और भरत में मोहक संवाद होता है। श्रीराम कहते हैं कि हनुमान के उनपर इतने उपकार हैं कि वे उनसे कभी उऋण नहीं हो सकते। इसी के साथ लीला को विश्राम दे दिया जाता है। रामलीला में गुरुवार को श्रीराम के राज्याभिषेक का मंचन किया जाएगा। यशोदा ने की राधा की गोद भराई

    रामलीला बाड़े में सुबह के समय रासलीला का आयोजन किया जा रहा है। इसमें श्याम सगाई लीला का मंचन किया गया। लीला का वर्णन करते हुए आचार्य कृष्णमुरारी व्यास बताते हैं कि कृष्ण राधाजी को खेलने के लिए नंदगांव आने का न्योता देते हैं। इसके बाद समय मिलते ही राधाजी अपनी सखियों संग नंदगांव खेलने के लिए जाती हैं। रास्ते में एक-एक कर सखियां दूर होती जाती हैं। उनमें से कोई मानसरोवर तो कोई पीली पोखर आदि जगहों का लुत्फ उठाती हुई राधा से विरत हो जाती हैं। अकेली राधाजी नंदगांव में कृष्ण के घर पहुंचती हैं तो मैया यशोदा उन्हे गोद में उठाते हुए चूनरी उढ़ाते हुए उनकी गोद भराई कर देती हैं। इसे ही कृष्ण जी का राधा के साथ प्रथम मिलन के नाम से भी जाना जाता है। इसी मंचन को देखते हुए भक्तजन राधे-राधे कहते झूमने लगते हैं। काली शोभायात्रा के साथ रावण दहन

    संसू, सिकंदराराऊ : क्षेत्र के गाव बिसाना में विधायक वीरेंद्र सिंह राणा ने राकेट चलाकर रावण का पुतला दहन किया। इससे पूर्व गाव में मा काली की शोभायात्रा निकाली गई। विधायक ने मा काली के स्वरूप की पूजा कर व आरती उतारकर शुभारंभ किया। शोभायात्रा विभिन्न मार्गों से भ्रमण करती हुई दशहरा मेला स्थल पर पहुंची। जहा रावण के साथ भगवान राम का युद्ध हुआ। इसके बाद रावण का पुतला दहन किया गया।

    विधायक वीरेंद्र सिंह राणा ने कहा कि समाज में भ्रष्टाचार, भ्रूण हत्या व अस्वच्छता जैसी बुराइयों को खत्म करने के लिए आमजन को कमर कसनी होगी। उन्होंने बुराई की प्रतीक प्रत्येक सामाजिक कुरीति के खिलाफ जागरूक होकर लड़ाई लड़ने का आह्वान किया, जिससे समाज में रामराज स्थापित किया जा सके।

    इस अवसर टरमेश सिंह, ओजवीर सिंह राणा,योगेश राणा, भूपेंद्र राणा, नवनीत राणा, दीपू राणा,सोनू कुशवाह, पवन कुमार, रजत तोमर, बाबूलाल, प्रेम सिंह आदि मौजूद थे।

    शूर्पणखा नासिका भंग के साथ सीताहरण लीला का मंचन

    संसू, पुरदिलनगर : कस्बा में चल रही रामलीला में कलाकारों ने शूर्पणखा नासिका भंग, सीता-हरण व जटायु मरण आदि लीलाओं का मनोहारी मंचन किया गया। लीलाओं को देख दर्शक भावविभोर हो उठे। रामलीला देखने को दर्शकों की भीड़ लगातार बढ़ रही है। इस मौके पर देवेंद्र कुमार, कन्हैयालाल, जितेंद्र कुमार, नेत्रपाल, उमेश, शिव कुमार, भूपेंद्र सिह, कुंवर पाल, टीटू, बंटी, चंदू आदि थे।