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    ग्राम समाज की भूमि पर अतिक्रमण को लेकर इलाहाबाद HC सख्त...तो टूटेंगे तालाब और पार्क की जमीनों पर बने 300 घर

    Updated: Fri, 29 Aug 2025 04:20 PM (IST)

    इलाहाबाद हाईकोर्ट ने धौलाना में ग्राम समाज की भूमि पर अतिक्रमण के मामले में सख्ती दिखाई है। कोर्ट ने हापुड़ के जिलाधिकारी और तहसीलदार को अतिक्रमण हटाने के लिए उठाए गए कदमों का ब्यौरा मांगा है। भूमि के मापन के बाद ग्रामीणों ने आक्रोश व्यक्त किया क्योंकि कई घर ग्राम समाज की भूमि पर बने हैं। तहसीलदार ने ग्रामीणों को शांत किया।

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    ग्राम समाज की जमीन पर कब्जों को लेकर हाईकोर्ट सख्त, 300 घरो पर लटकी तलवार

    जागरण संवाददाता, धौलाना। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने धौलाना में ग्राम समाज की भूमि पर कथित अतिक्रमण के मामले में सख्त रुख अपनाया है। 25 अगस्त 2025 को ग्रामीण जगमोहन सिंह की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायालय ने हापुड़ के जिला अधिकारी और धौलाना तहसीलदार को शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया। इसमें खसरा संख्याओं की भूमि की श्रेणी और अतिक्रमण हटाने के लिए उठाए गए कदमों का विवरण मांगा गया है। अगली सुनवाई 9 सितंबर 2025 को निर्धारित की गई है।

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    मापी गईं जमीनें

    हाई कोर्ट के आदेश पर शुक्रवार को 10 पटवारियों की टीम ने याचिका में चिह्नित खसरा संख्याओं 417(मि), 1055(क), 1175(म), 1250(ग), 1480, 1506, 1521, 1553(ड), 1599, 1610(ख), 1611, 1621, 1635(मि), 1635(घ) और 2261 की नापतोल की। इनमें तालाब, सड़क, शहीद पार्क, खेल का मैदान, खाद गड्ढा, और कुम्हार गड्ढा जैसी सार्वजनिक उपयोग की भूमि शामिल हैं। टीम ने विवादित भूमि की माप जोखकर रिपोर्ट तैयार की।

    आक्रोशित ग्रामीणों ने किया हंगामा

    नापतोल की जानकारी मिलते ही ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया। करीब 100 से अधिक लोग उपजिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे और हंगामा शुरू कर दिया। अनुमान है कि इन खसरा संख्याओं की भूमि पर 300 से अधिक मकान बने हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वे दशकों से इन मकानों में रह रहे हैं और उनकी निजी जमीन को गलत तरीके से ग्राम समाज की जमीन में दर्ज किया जा रहा है। मौके पर तनाव की स्थिति बन गई।

    तहसीलदार ने किया बीच-बचाव

    नायब तहसीलदार अमर पाल सिंह ने ग्रामीणों को समझा-बुझाकर शांत किया और वापस भेजा। उपजिलाधिकारी रेनू सिंह ने बताया कि हाई कोर्ट के आदेशानुसार ग्राम समाज की भूमि की नापतोल की जा रही है। 

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