किशोरों को अगवा कर किसानों को बेचता था गिरोह, लखनऊ से दिल्ली तक फैले मिले तस्करी के तार; दिखाते हसीन ख्वाब
हापुड़ पुलिस ने किशोरों की मानव तस्करी करने वाले एक गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जो लखनऊ से दिल्ली तक सक्रिय था। यह गिरोह बच्चों को बहला-फुसलाकर अगवा करता था।

हापुड़ पुलिस ने मानव तस्करी करने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
HighLights
लखनऊ से दिल्ली तक फैला था मानव तस्करी का जाल।
किशोरों को बहला-फुसलाकर किसानों को बेचा जाता था।
हापुड़ पुलिस ने चार आरोपितों को गिरफ्तार कर जेल भेजा।
केशव त्यागी, हापुड़। मानव तस्करी के धंधे में लिप्त आरोपितों ने किशोरों को अपना शिकार बनाने के लिए लखनऊ से दिल्ली तक अपना जाल फैलाया हुआ था। वह रेलवे स्टेशन, मेला क्षेत्र और भीड़-भाड़ वाली जगहों पर घंटों रेकी करने के बाद चिन्हित किशोर को अगवा कर ले जाते थे। उन्हें कामगार बताकर किसानों को बेचते। जहां उनसे बंधुआ मजदूरी तक कराई जाती थी।
ऐसे फंसाया मीठे झांसे में
सीओ सिटी वरुण मिश्रा ने बताया कि बरामद किशोर वंश ने माता-पिता की डांट से नाराज होकर घर छोड़ने का फैसला कर लिया। साइकिल लेकर वह ब्रजघाट पहुंच गया। वहां उसे उम्मीद थी कि कुछ नया शुरू कर पाएगा लेकिन तभी गिरोह के सदस्य उसके पास पहुंचे। उन्होंने वंश से कहा, 'बेटा परेशान मत हो। हम अच्छी नौकरी दिलवा देंगे। खाना-पीना सब फ्री मिलेगा। अच्छी कमाई भी होगी।'
रेलवे स्टेशन और सार्वजनिक स्थानों पर रेकी करते
पुलिस के अनुसार, इन मीठे शब्दों के जाल में वंश फंस गया। लखनऊ, संभल, मुरादाबाद और अमरोहा से दिल्ली तक फैले इस गिरोह ने कई किशोरों की जिंदगी बर्बाद की है। गिरोह का सरगना योगेश उर्फ लोकेश व अमित गुप्ता, दीपक और मुकेश शर्मा यह लखनऊ से दिल्ली तक सभी रेलवे स्टेशनों और सार्वजनिक स्थानों पर रेकी करते थे।
पुलिस खंगालेगी नेटवर्क
खासतौर पर वह उन किशोरों को टारगेट करते थे जो घरेलू कलह या डाट-फटकार से तंग आकर भाग निकलते थे। इन बच्चों की नाराजगी और बेबसी को ही आरोपित अपनी ताकत समझते थे। अगवा किए गए किशोरों को योगेश कई-कई सप्ताह या माह तक अपने पास रखता था। फिर किसानों से संपर्क कर उन्हें कामगार के रूप में अच्छे दामों पर बेच देता था। पुलिस चारों आरोपितों को गिरफ्तार कर उन्हें न्यायालय में पेश किया, जहां से सभी को जेल भेज दिया गया। अब पुलिस इनकी कस्टडी रिमांड लेकर और पूछताछ करेगी।
माता-पिता के लिए जरूरी सुझाव
- बच्चों से रोज खुलकर बात करें, उनकी छोटी-बड़ी परेशानियों को गंभीरता से सुनें।
- डांट-फटकार की जगह सही-गलत समझाएं, अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल न करें।
- किशोरों को थोड़ी आजादी दें लेकिन, नजर बनाए रखें।
- हर दिन कुछ समय परिवार के साथ बिताएं
- बच्चों की उपलब्धियों की तारीफ करें, नाकामियों पर सिर्फ आलोचना न करें।
- अगर बच्चा नाराज दिखे तो कारण पूछें और उसके भावनाओं को वैध ठहराएं।
- किसी समस्या में बच्चे अकेले महसूस करें तो काउंसलर या विश्वसनीय व्यक्ति की मदद लें।
बोलीं मनोचिकित्सक
"किशोरावस्था में भावनात्मक उतार-चढ़ाव सामान्य है, लेकिन लगातार नाराजगी या घर छोड़ने की बात करना गंभीर संकेत हो सकता है। बच्चों को अपनी भावनाओं को व्यक्त करने का सुरक्षित माहौल दें, दबाव डालने की बजाय सहानुभूति दिखाएं। अगर बच्चा उदास, चिड़चिड़ा या अकेला महसूस कर रहा हो तो तुरंत किसी काउंसलर या मनोचिकित्सक से मदद लें।"
-डाॅ. स्वाति सिंह, मनोचिकित्सक
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