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    दिल्ली-लखनऊ हाईवे पर हुई 67 मौतों का जिम्मेदार कौन? NHAI, चालक या कोई और...

    Updated: Fri, 02 Jan 2026 01:21 PM (IST)

    हापुड़ में दिल्ली-लखनऊ हाईवे (NH-9) पर तेज रफ्तार जानलेवा साबित हो रही है। पिछले दो सालों में 67 लोगों की मौत हुई है, जिसमें 61% हादसे ओवर-स्पीडिंग के ...और पढ़ें

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    हापुड़ में दिल्ली-लखनऊ हाईवे (NH-9) पर तेज रफ्तार जानलेवा साबित हो रही है। सांकेतिक तस्वीर

    ठाकुर डीपी आर्य, हापुड़। दिल्ली-लखनऊ हाईवे पर सफर अब सुखद नहीं रहा। यहां का सफर जानलेवा हो गया है। हाईवे पर सड़कों की हालत बेहतर होने के साथ ही हादसों की संख्या भी बढ़ गई है। पिछले दो सालों में अकेले हापुड़ इलाके में NH-9 पर तेज रफ्तार 67 लोगों की मौत का कारण बनी है।

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    I-RAD के आंकड़ों के अनुसार, हाईवे पर हादसों का मुख्य कारण तेज़ रफ़्तार है। गाड़ियां 120-130 किमी/घंटा की रफ्तार से चल रही हैं। इतनी तेज रफ्तार में अगर अचानक कोई दूसरी गाड़ी सामने आ जाए तो गाड़ी को कंट्रोल करना नामुमकिन हो जाता है, जिससे हादसे होते हैं। हालात ऐसे हैं कि 61 प्रतिशत हादसे ओवर-स्पीडिंग की वजह से हो रहे हैं।

    पिछले पांच सालों में जिले में सड़क हादसों को देखें तो इनमें कमी के बजाय बढ़ोतरी हुई है। पिछले पांच सालों में सड़कों की हालत बेहतर हुई है और बाईपास भी बने हैं। हादसों के कारणों का सर्वे करने वाली संस्था I-RAD के अनुसार, हादसों की जगह भी बदल गई है।

    पहले ज्यादातर हादसे ब्लैक स्पॉट पर होते थे और इन ब्लैक स्पॉट के कुछ खास कारण होते थे। ब्लैक स्पॉट की पहचान खराब इंजीनियरिंग, कम विजिबिलिटी, तीखे मोड़, अवैध कट और बॉटलनेक जैसे कारणों के आधार पर की जाती थी। इन समस्याओं को ठीक करके ब्लैक स्पॉट हटा दिए गए और प्रभावित इलाकों में हादसों की संख्या को कंट्रोल किया गया।

    हाईवे और बाईपास बनने के बाद होने वाले हादसे चिंता का विषय हैं। ये हादसे जिले की दूसरी सड़कों से हाईवे पर शिफ्ट हो गए हैं। अब 70 प्रतिशत हादसे उन इलाकों में हो रहे हैं जहां सड़कों की हालत बहुत अच्छी है।

    I-RAD के सर्वे के अनुसार, हादसे वाली जगहों पर अच्छी सड़कों के बावजूद खराब इंजीनियरिंग, कम विजिबिलिटी, तीखे मोड़, अवैध कट या बॉटलनेक जैसे कोई बड़े कारण नहीं हैं, जिन्हें ब्लैक स्पॉट घोषित करके स्थिति को सुधारा जा सके। हाईवे पर हादसों का मुख्य कारण ओवर-स्पीडिंग है। गाड़ियां हाईवे पर तय स्पीड लिमिट की परवाह किए बिना तेज रफ्तार से चल रही हैं। यहां स्पीड लिमिट 100 किमी/घंटा है। इसके बावजूद गाड़ियां 120-130 किमी प्रति घंटे की रफ़्तार से दौड़ रही हैं।

    अब हर हादसे के बाद एक सर्वे किया जाता है। इसमें पुलिस और प्रशासन की टीम के साथ RTO, NHAI और विशेषज्ञों की टीमें शामिल होती हैं। इन सर्वे का डेटा केंद्र सरकार की i-RAD संस्था इकट्ठा करती है। जांच में पता चला है कि सड़कें अच्छी होने की वजह से ड्राइवर तेज़ रफ़्तार से गाड़ी चला रहे हैं। इससे हादसे हो रहे हैं। ड्राइवर अचानक अपनी तेज़ रफ़्तार गाड़ियों को कंट्रोल नहीं कर पाते हैं।

    यही वजह है कि पिछले दो सालों में ही हापुड़ ज़िले में दिल्ली-लखनऊ हाईवे के 60 किलोमीटर के हिस्से में 233 हादसे हुए हैं। इन हादसों में 67 लोगों की मौत हो गई और 200 से ज़्यादा लोग घायल हुए हैं। इसे कंट्रोल करने के लिए हाईवे पर स्पीड कैमरे लगाए जाने हैं। जिले की पिछली डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट प्रेरणा शर्मा ने सरकार और NHAI को चार बार चिट्ठी लिखी थी।

    मौजूदा डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट अभिषेक पांडे ने भी तीन रोड सेफ्टी मीटिंग में कैमरे लगाने के आदेश दिए हैं। इसके बावजूद, जिम्मेदार विभाग और अधिकारी कैमरे नहीं लगवा पा रहे हैं। यही वजह है कि लोग एक के बाद एक अपनी जान गंवा रहे हैं, जबकि जिम्मेदार लोग सिर्फ़ मीटिंग कर रहे हैं और कुछ नहीं कर रहे हैं।

    सबसे अधिक हादसे हाईवे पर हो रहे हैं। हम इस बारे में NHAI से लगातार बातचीत कर रहे हैं। DM प्रेरणा शर्मा के समय से ही बातचीत चल रही है। NHAI बजट मंजूर नहीं कर रहा है। हमें हर हाल में गाड़ियों की स्पीड कंट्रोल करनी होगी। तब तक हादसे नहीं रुकेंगे।

    - छवि सिंह चौहान - ARTO

    रोड सेफ्टी मीटिंग में स्पीड कैमरे लगाने के साफ़ निर्देश दिए गए हैं। अब हम फिर से सरकार से बातचीत कर रहे हैं। हम लोगों में धीरे गाड़ी चलाने के लिए जागरूकता भी फैला रहे हैं। हम स्पीड लिमिट के साइन भी लगा रहे हैं। हमारी कोशिश है कि हर हाल में हादसों को रोका जाए।

    - संदीप कुमार - एडिशनल डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट