गोरखपुर में SIR अभियान से राजस्व अदालतों में कामकाज ठप, नए साल में सुनवाई की उम्मीद
गोरखपुर में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के चलते राजस्व अदालतों का कामकाज ठप है। नायब तहसीलदार से लेकर डीएम तक सभी अधिकारी एसआइआर अभियान ...और पढ़ें

एसआइआर अभियान की व्यस्तता से ठप हैं ज्यादातर राजस्व अदालतें, सिर्फ तारीखें पड़ रहीं। जागरण
जागरण संवाददाता, गोरखपुर। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) अभियान के चलते जिले की ज्यादातर राजस्व अदालतों का कामकाज पिछले करीब दो महीनों से लगभग ठप पड़ा है। नायब तहसीलदार, तहसीलदार, उपजिलाधिकारी (एसडीएम), अपर जिलाधिकारी (एडीएम) से लेकर जिलाधिकारी (डीएम) तक सभी अधिकारी एसआइआर अभियान से जुड़े दायित्वों में व्यस्त हैं, जिसके कारण उनके न्यायालयों में नियमित सुनवाई नहीं हो पा रही। इस दौरान अधिकांश मामलों में केवल अगली तारीख ही दी जा रही। अब नए साल में ही इन अदालतों में सुनवाई हो सकेगी।
राजस्व मामलों की सुनवाई ठप रहने से वादकारियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा। रुस्तमपुर के अभय शाही का कहना है कि उन्होंने खोराबार में छोटा सा प्लाट खरीदा था। मकान बनवाना है। लेकिन, दाखिल-खारिज लंबित है। शाहपुर के माधव शुक्ला वरासत के लिए भटक रहे। माधव का कहना है कि तीन तारीख मिल चुकी है।
यह तो नजीर है। सैकड़ों की संख्या में लोग जमीन से जुड़े विवाद, कब्जा, नामांतरण, वरासत, पैमाइश, समेत अन्य राजस्व प्रकरणों में फैसले के नाम पर दो माह से सिर्फ तारीख पर तारीख पा रहे है। अदालतों में पहुंचने पर उन्हें यह जानकारी दी जा रही कि अधिकारी चुनावी कार्य में व्यस्त हैं और सुनवाई के लिए नई तिथि दी जाएगी। इससे लोगों को बार-बार तहसील और कलेक्ट्रेट के चक्कर लगाने पड़ रहे।
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उधर, अधिकारियों के अनुसार एसआइआर अभियान चुनाव आयोग का एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम है, जिसमें मतदाता सूची को शुद्ध और अद्यतन करने का कार्य किया जा रहा है। इस अभियान में जिले के लगभग सभी राजस्व अधिकारियों की तैनाती होने से न्यायालयीन कार्य प्रभावित हुआ। हालांकि प्रशासन का कहना है कि यह स्थिति अस्थायी है और अभियान समाप्त होते ही कोर्ट का नियमित संचालन शुरू कर दिया जाएगा।
सूत्रों के मुताबिक 26 दिसंबर के बाद राजस्व अदालतों में नियमित रूप से सुनवाई शुरू होने की संभावना है। नए साल में लंबित मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निस्तारित करने के निर्देश दिए जा सकते हैं, ताकि प्रभावित वादकारियों को जल्द राहत मिल सके। फिलहाल फरियादियों की नजरें 26 दिसंबर के बाद कोर्ट के दोबारा पटरी पर आने पर टिकी हैं, जिससे लंबे समय से रुके मामलों में सुनवाई आगे बढ़ सके।

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