सहजन सिर्फ सब्जी ही नहीं दवा भी है, बचाता है गंभीर बीमारियों से
सहजन एक चमत्कारिक पेड़ है। इसके फल और पत्ते औषधीय गुणों से युक्त हैं। कई गंभीर बीमारियों के रोकथाम में यह काम आता है। ...और पढ़ें

गोरखपुर, जेएनएन। सहजन सिर्फ सब्जी के लिए ही काम नहीं आता है, अपितु यह एक औषधि है। इसके सेवन से कई चमत्कारिक परिणाम मिल सकते हैं। कई बीमारियों में यह बेहतर ढंग से काम करता है। पर्यावरण को भी यह सुरक्षित रखता है। इन्हीं गुणों को देखते हुए देवरिया जिले में वन विभाग ने सहजन के पौधे रोपने की तैयारी शुरू कर दी है।
इसकी पौध पर्यावरण को संजीवनी देगा। वहीं लोगों के स्वास्थ्य के साथ ही जेब की सेहत भी सुधारेगा। वन विभाग इस वर्ष जिले में सहजन के पौधे को रोपने की तैयारी कर रहा है। इस पेड़ की पत्तियां एवं फली बाजार में अच्छी कीमत पर बिकती हैं। सहजन की पत्तियां एवं फली दवा में काम आती हैं। किसान इसकी डिमांड कर रहे हैं। तीन से चार वर्ष में यह पेड़ तैयार हो जाता है। यह पर्यावरण के लिए भी काफी फायदेमंद होता है। वन विभाग के अधिकारियों की मानें तो सहजन के पेड़ जिले व आस-पास के क्षेत्र में कम पाए जाते हैं।
यह होता है फायदा
कृषि वैज्ञानिक डा. एमके पांडेय ने बताया कि पशुओं को खिलाने पर उनके दूध की मात्रा में बढ़ोतरी होती है। यह जिस भूमि पर लगाया जाता है उसके लिए भी फायदेमंद है। भूमि की पत्तियों व छाल के सड़ने से भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ जाती है। औषधीय गुणों का खजाना डा.केके श्रीवास्तव ने बताया कि सहजन का सेवन कई तरह की बीमारियों से निजात दिलाता है। सब्जी खाने से जोड़ों के दर्द, गैस, गुर्दे व मूत्राशय की पथरी से निजात मिलती है। इसकी पत्ती वात, उदरशूल, नेत्र रोग, गठिया, जड़ प्लीहा दमा, जलोधर जैसी बीमारियों के इलाज में सहायक है। पत्तियों में आयरन की मात्रा अधिक होती है। 50 ग्राम पत्तियों की सब्जी विटामिन के एक कैप्सूल से अधिक असरदार है।
एक नजर में सहजन
- 1200 रुपये प्रति किलो तक बिकता है सहजन की पत्तियों का चूर्ण।
- 400 रुपये किलो बिकती है सहजन की पत्ती।
- संतरे से सात गुना अधिक मिलता है विटामिन सी।
- गाजर से चार गुना अधिक मिलता है विटामिन ए।
- दही से चार गुना अधिक मिलता है कैल्शियम।
इसकी पौध पर्यावरण को संजीवनी देगा। वहीं लोगों के स्वास्थ्य के साथ ही जेब की सेहत भी सुधारेगा। वन विभाग इस वर्ष जिले में सहजन के पौधे को रोपने की तैयारी कर रहा है। इस पेड़ की पत्तियां एवं फली बाजार में अच्छी कीमत पर बिकती हैं। सहजन की पत्तियां एवं फली दवा में काम आती हैं। किसान इसकी डिमांड कर रहे हैं। तीन से चार वर्ष में यह पेड़ तैयार हो जाता है। यह पर्यावरण के लिए भी काफी फायदेमंद होता है। वन विभाग के अधिकारियों की मानें तो सहजन के पेड़ जिले व आस-पास के क्षेत्र में कम पाए जाते हैं।
यह होता है फायदा
कृषि वैज्ञानिक डा. एमके पांडेय ने बताया कि पशुओं को खिलाने पर उनके दूध की मात्रा में बढ़ोतरी होती है। यह जिस भूमि पर लगाया जाता है उसके लिए भी फायदेमंद है। भूमि की पत्तियों व छाल के सड़ने से भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ जाती है। औषधीय गुणों का खजाना डा.केके श्रीवास्तव ने बताया कि सहजन का सेवन कई तरह की बीमारियों से निजात दिलाता है। सब्जी खाने से जोड़ों के दर्द, गैस, गुर्दे व मूत्राशय की पथरी से निजात मिलती है। इसकी पत्ती वात, उदरशूल, नेत्र रोग, गठिया, जड़ प्लीहा दमा, जलोधर जैसी बीमारियों के इलाज में सहायक है। पत्तियों में आयरन की मात्रा अधिक होती है। 50 ग्राम पत्तियों की सब्जी विटामिन के एक कैप्सूल से अधिक असरदार है।
एक नजर में सहजन
- 1200 रुपये प्रति किलो तक बिकता है सहजन की पत्तियों का चूर्ण।
- 400 रुपये किलो बिकती है सहजन की पत्ती।
- संतरे से सात गुना अधिक मिलता है विटामिन सी।
- गाजर से चार गुना अधिक मिलता है विटामिन ए।
- दही से चार गुना अधिक मिलता है कैल्शियम।

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