एम्स गोरखपुर का अनोखा कारनामा: आंख के सामने सांस की नली में पड़ी पाइप, नहीं हुआ दर्द
एम्स गोरखपुर में एक दुर्लभ तकनीक का सफल प्रयोग हुआ है। इस तकनीक से मरीज की आंख के सामने से नाक के रास्ते सांस की नली में पाइप डाला गया बिना किसी दर्द या बेचैनी के। यह तकनीक मुंह बंद होने की स्थिति में भी मरीज को सांस लेने में मदद करती है। इस सफलता के लिए डॉ. संतोष शर्मा और उनकी टीम को बधाई।

जागरण संवाददाता, गोरखपुर। किसी रोगी की आंख के सामने नाक के रास्ते सांस की नली में पाइप डाली जाए और उसे बेचैनी, खांसी व कोई दर्द न हो तो कल्पना कीजिए कि आपरेशन का तनाव कितना कम हो जाएगा। मुंह बंद होने के बाद बिना दर्द नाक के रास्ते सांस की नली में ट्यूब डालने की यह विधि एम्स गोरखपुर के एनेस्थीसिया विभाग के डाक्टरों ने अपनाई है।
प्रो. संतोष शर्मा के नेतृत्व में अल्ट्रासाउंड गाइडेड सुपीरियर लेरिंजियल ब्लाक व फाइबर आप्टिक ब्रोंकोस्कोपी तकनीक का इस्तेमाल करते हुए डाक्टरों ने गले की नसों में सुन्न करने वाला इंजेक्शन लगाया गया और पाइप डाल दी।
गोरखपुर के सोनबरसा निवासी एक युवक बाइक से जा रहा था। हादसे में उसका चेहरा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था। सिर के अगले हिस्से, दाईं आंख के पास की हड्डी और चेहरे की हड्डियां टूट गई थीं। गुटखा खाने के कारण युवक के मुंह में ओरल सबम्यूकस फाइब्रोसिस नामक का रोग हो चुका था।
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इस कारण उसका मुंह पूरी तरह नहीं खुल पा रहा था। युवक को तत्काल आपरेशन की जरूरत थी लेकिन मुंह न खुलने के कारण सामान्य इंट्यूबेशन (मुंह के रास्ते ट्यूब डालने की प्रक्रिया) संभव नहीं थी। इस कारण एनेस्थीसिया देना डाक्टरों के लिए चुनौती बन गया था।
गोरखपुर एम्स। जागरण
बिना बेहाेश किए डाली पाइप
युवक की गंभीर स्थिति को देखते हुए अल्ट्रासाउंड गाइडेड सुपीरियर लेरिंजियल ब्लाक के जरिये गले की नसों को सुन्न किया। इसके बाद फाइबर आप्टिक ब्रोंकोस्कोप की मदद से बिना बेहोश किए ट्रैकियल ट्यूब डाली गई। नाक के रास्ते भोजन की नली में ट्यूब डालना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है लेकिन सांस की नली में इसे डालते ही रोगी को खांसी, बेचैनी और दर्द होता है।
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इनकी रही भूमिका
प्रो. संतोष शर्मा ने पाइप डाला तो दंत रोग विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर व मैक्सिलोफेशियल सर्जन डा. शैलेश कुमार और उनकी टीम ने जटिल सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया।टीम में एनेस्थीसिया विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डा. विजेता वाजपेयी, जूनियर रेजिडेंट डा. आशुतोष, नर्सिंग आफिसर पंकज, दिव्या और ध्रुवी का विशेष योगदान रहा। कार्यकारी निदेशक व मुख्य कार्यपालक अधिकारी डा. विभा दत्ता, एनेस्थीसिया विभागाध्यक्ष प्रो. विक्रम वर्धन ने टीम को बधाई दी है।
प्रो. संतोष शर्मा, एनेस्थीसिया विभाग, एम्स गोरखपुर। जागरण
एम्स गोरखपुर में इस दुर्लभ तकनीक का सफल प्रयोग न सिर्फ चिकित्सा जगत के लिए एक उपलब्धि है, बल्कि यह दिखाता है कि आधुनिक तकनीक और विशेषज्ञता मिलकर गंभीर परिस्थितियों को भी सफलतापूर्वक संभाल सकती हैं। -प्रो. संतोष शर्मा, एनेस्थीसिया विभाग, एम्स गोरखपुर
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