BRD का छात्र 27 साल में भी नहीं कर सका MBBS पास, तीन छात्रों का रिजल्ट रुका; अधर में लटका भविष्य
बीआरडी मेडिकल कॉलेज, गोरखपुर के तीन एमबीबीएस छात्रों का भविष्य अधर में है। एनएमसी के 10 साल में कोर्स पूरा करने के नियम के कारण उनके अंतिम वर्ष के परि ...और पढ़ें

बीआरडी मेडिकल कॉलेज। जागरण
जागरण संवाददाता, गोरखपुर। बाबा राघवदास (बीआरडी) मेडिकल कालेज में अध्ययनरत चार एमबीबीएस छात्रों पर कार्रवाई की तलवार लटक गई है। 27 साल से एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे एक छात्र के अलावा तीन अन्य ऐसे विद्यार्थी हैं, जो 17, 15 और 12 वर्षों में भी पांच वर्षों का पाठ्यक्रम पूरा नहीं कर पाए हैं।
अटल बिहारी वाजपेयी चिकित्सा विश्वविद्यालय, लखनऊ ने इन चारों छात्रों का परीक्षा परिणाम नेशनल मेडिकल काउंसिल (एनएमसी) के उस प्रविधान के चलते रोक दिया है, जिसमें एमबीबीएस पाठ्यक्रम अधिकतम 10 वर्ष में पूरा करना अनिवार्य किया गया है। इस संबंध में नेशनल मेडिकल काउंसिल से स्पष्ट मार्गदर्शन मांगा गया है।
इसी वर्ष एमबीबीएस अंतिम वर्ष की परीक्षा देने वाले चारों छात्र 1998, 2008, 2010 और 2013 बैच के हैं। उनके परीक्षा परिणाम को लेकर जो विवाद उपजा है, वह नियमों में हुए बदलाव से जुड़ा है। बीआरडी मेडिकल कालेज में इन छात्रों का नामांकन कंबाइन प्री मेडिकल टेस्ट (सीपीएमटी) के माध्यम से हुआ था। उस समय मेडिकल शिक्षा और परीक्षाओं का नियमन मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया (एमसीआइ) के अधीन था। एमसीआइ के नियमों में एमबीबीएस कोर्स को अधिकतम 10 वर्षों में पूरा करने को लेकर कोई स्पष्ट या सख्त प्रविधान नहीं था। बाद में एमसीआइ के स्थान पर नेशनल मेडिकल काउंसिल का गठन हुआ और नए नियम लागू किए गए, जिनमें एमबीबीएस पास करने की अधिकतम अवधि 10 वर्ष तय कर दी गई।
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ऐसे में विश्वविद्यालय प्रशासन भी इस मामले में सीधे निर्णय लेने की स्थिति में नहीं है। प्रकरण को गंभीर मानते हुए नेशनल मेडिकल काउंसिल से स्पष्ट मार्गदर्शन मांगा गया है। मेडिकल कालेज परिसर में रिजल्ट रोके जाने को लेकर चर्चाएं तेज हैं। फिलहाल चारों छात्रों का भविष्य एनएमसी के फैसले पर टिका हुआ है। यह मामला देशभर के उन मेडिकल छात्रों के लिए भी नजीर बन सकता है, जो 10 वर्षों के अंदर एमबीबीएस पूरा नहीं कर पाए हैं।
चारों छात्रों के संबंध में जब अटल बिहारी वाजपेयी चिकित्सा विश्वविद्यालय से बात की गई तो पता चला कि एनएमसी के नियमों के चलते रिजल्ट रुका है। इस मामले में एनएमसी से मार्गदर्शन मांगा गया है। वहां से जो भी निर्णय होगा, उसी के आधार पर विवि अगला कदम उठाएगा।
-डाॅ. रामकुमार जायसवाल, प्राचार्य बीआरडी मेडिकल काॅलेज

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