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    गोरखपुर में 10 साल से परीक्षा से दूर MBBS छात्र का रद होगा नामांकन, सिर्फ एक बार दिया है एग्जाम

    Updated: Mon, 05 Jan 2026 07:03 PM (IST)

    गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज ने 11 साल से एमबीबीएस प्रथम वर्ष पास न कर पाने वाले छात्र का नामांकन रद्द करने की प्रक्रिया शुरू की है। आजमगढ़ का यह छा ...और पढ़ें

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    10 साल से परीक्षा से दूर एमबीबीएस छात्र का निरस्त होगा नामांकन।

    जागरण संवाददाता, गोरखपुर। बीआरडी मेडिकल कालेज प्रशासन ने 11 वर्षों से एमबीबीएस का प्रथम वर्ष भी उत्तीर्ण न कर पाने वाले छात्र का नामांकन निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। आजमगढ़ निवासी यह छात्र वर्ष 2014 बैच में एमबीबीएस में दाखिल हुआ था, लेकिन अब तक उसने पाठ्यक्रम का पहला पड़ाव भी पार नहीं किया है।

    कॉलेज प्रशासन के अनुसार छात्र ने दाखिले के बाद केवल एक बार परीक्षा दी थी, जिसमें वह असफल रहा। इसके बाद पिछले 10 वर्षों से न तो उसने परीक्षा फार्म भरा और न ही परीक्षा में शामिल हुआ।

    मामला सामने आने के बाद कालेज के एकेडमिक सेल ने छात्र की शैक्षणिक स्थिति की विस्तृत समीक्षा की। जांच में स्पष्ट हुआ कि छात्र लंबे समय से न पढ़ाई में सक्रिय है और न ही परीक्षा प्रक्रिया में भाग ले रहा है। इसके बावजूद वह कालेज के अभिलेखों में एमबीबीएस छात्र के रूप में दर्ज है।

    रिपोर्ट मिलने के बाद प्रशासन ने उसके नामांकन को निरस्त करने का निर्णय लिया है। कालेज प्रशासन ने छात्र के पिता से संपर्क करने के लिए तीन बार फोन किया, लेकिन वह कालेज नहीं पहुंचे। सोमवार को पंजीकृत पत्र भेजकर उन्हें एक सप्ताह के भीतर कालेज में उपस्थित होने को कहा गया है।

    पत्र में स्पष्ट किया गया है कि निर्धारित समय के भीतर यदि छात्र के पिता या अभिभावक उपस्थित नहीं होते हैं तो नियमों के तहत छात्र का नामांकन निरस्त कर दिया जाएगा।

    प्राचार्य डॉ. रामकुमार जायसवाल का कहना है कि जब छात्र का नामांकन हुआ था, उस समय मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया (एमसीआइ) चिकित्सा शिक्षा और परीक्षाओं का नियमन करती थी।

    उस समय की गाइडलाइन में एमबीबीएस पाठ्यक्रम पूरा करने की अधिकतम समय सीमा का स्पष्ट उल्लेख नहीं था, लेकिन पहले प्रोफेशनल (1.5 वर्ष) की परीक्षा पास करने के लिए अधिकतम चार वर्ष का समय निर्धारित था, जिसे छात्र ने पूरा नहीं किया है।

    इसके अलावा छात्र का पिछले 10 वर्षों से लगातार परीक्षा प्रक्रिया से बाहर रहना भी गंभीर माना गया है। न परीक्षा फॉर्म भरना और न ही किसी प्रकार की शैक्षणिक गतिविधि में भाग लेना यह दर्शाता है कि छात्र ने पाठ्यक्रम को आगे बढ़ाने में कोई रुचि नहीं दिखाई।

    ऐसे में उसका नामांकन बनाए रखना न केवल नियमों के विपरीत है, बल्कि अन्य छात्रों और संस्थान की शैक्षणिक व्यवस्था के लिए भी अनुचित है।