Pension scam: पेंशन अंशदान से रेलकर्मियों को 28.35 करोड़ का घाटा, CBI जांच की मांग
गोरखपुर के यांत्रिक कारखाने में पेंशन अंशदान घोटाले से 1890 रेलकर्मियों को भारी नुकसान हुआ है। कर्मचारियों की सहमति के बिना उनके पेंशन फंड को सरकारी बैंकों से निजी बैंकों में स्थानांतरित कर दिया गया। रेलवे प्रशासन ने घोटाले के खुलासे के बाद हटाए गए लेखाधिकारी को ही फिर से जिम्मेदारी सौंप दी है। एनई रेलवे मजदूर यूनियन ने सीबीआई जांच की मांग की है।

जागरण संवाददाता, गोरखपुर। यांत्रिक कारखाना गोरखपुर में पेंशन अंशदान से 1890 रेलकर्मियों का 28 करोड़ 35 लाख का घाटा हुआ है। ढाई साल से चल रही विजिलेंस जांच के बाद भी पेंशन घोटाला का खुलासा नहीं हो सका है। आज तक पता नहीं चल सका कि कर्मचारियों के पेंशन का अंशदान किस अधिकारी और कर्मचारी ने उनकी बिना सहमति के सरकारी से प्राइवेट बैंक में स्थानांतरित कर दिया।
रेलवे प्रशासन ने पेंशन घोटाला का खुलासा होने के बाद जिस लेखाधिकारी को हटाया था, फिर से उसी लेखाधिकारी को यांत्रिक कारखाना में नई पेंशन स्कीम की देखभाल की जिम्मेदारी सौंप दी है।
रेलवे प्रशासन के ढुलमुल रवैये से कर्मचारी संगठनों में आक्रोश है। एनई रेलवे मजदूर यूनियन (नरमू) के महामंत्री केएल गुप्ता ने पूर्वोत्तर रेलवे की महाप्रबंधक से पेंशन घोटाला की सीबीआइ से जांच कराने की मांग की है।
नरमू के महामंत्री ने महाप्रबंधक को बताया है कि तत्कालीन महाप्रबंधक सीवी रमन के कार्यकाल में यांत्रिक कारखाना में एनपीएस के 1890 कर्मचारियों के अंशदान खाते को बिना कर्मचारियों की सहमति से सरकारी बैंक से प्राइवेट एजेंसी में स्थानांतरित कर दिया गया था। महाप्रबंधक ने आश्वासन दिया था कि मामले की जांच सीबीआइ से कराई जाएगी।
नौ मार्च 2024 और दस मई 2024 को हुई स्थायी वार्ता तंत्र की बैठक में भी इस प्रकरण को प्रमुखता से उठाया गया था। इसके बाद भी मामले को लेकर रेलवे प्रशासन उदासीन बना रहा। पेंशन के अंशदान घोटाले में एक-एक कर्मचारी का 1,50000 रुपये का घाटा हुआ। जो रेलवे भर्ती बोर्ड के घोटाले से भी कई गुणा अधिक है। कर्मचारी अंशदान में हुई कटौती को लेकर परेशान हैं, लेकिन कहीं कोई सुनवाई नहीं है।
एनपीएस अंशदान घोटाले में पूरी तरह से लेखा विभाग के कर्मचारी एवं अधिकारी शामिल हैं। एक अधिकारी को कुछ समय के लिए मुख्यालय भेजा गया तथा फिर उसी पद पर लगा दिया गया ताकि एनपीएस अंशदान घोटाले की लीपापोती कर समाप्त कर सकें। भी हाल ही में रेलवे भर्ती बोर्ड का मामला सीबीआइ को रेफर किया गया। सीबीआइ ने जांच भी शुरू कर दी है।
सीबीआइ जब भर्ती में फर्जीवाड़ा की जांच कर सकती है ताे पेंशन घोटाला की जांच क्यों नहीं कर सकती। वर्ष 2022-23 में यांत्रिक कारखाना स्थित कार्मिक व लेखा विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के रैकेट ने कर्मचारियों का पेंशन अंशदान बिना उनकी अनुमति के सरकार के अधीन बैंकों एसबीआइ, यूटीआइ और एलआइसी की जगह प्राइवेंट बैंकों में बदल दिया था।
कर्मचारियों को जानकारी हुई तो कारखाना में हड़कंप मच गया। पेंशन में घोटाला को लेकर दैनिक जागरण ने 18 अक्टूबर 2023 के अंक में 'दो हजार रेलकर्मियों का फंसा पेंशन, बिना सहमति के बदल गया शेयर' शीर्षक से खबर प्रकाशित कर प्रकरण का खुलासा किया था।
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दो तरह से शेयर में लगती है पेंशन की जमा पूंजी
पेंशन की जमा पूंजी शेयर में दो तरह से लगती है। एक एक्टिव मोड में और दूसरा आटो मोड में। तैनाती के दौरान रेलकर्मी की सहमति से ही एसबीआइ और एलआइसी आदि बैंक और अन्य कंपनियों में जमा पूंजी का शेयर लगता है। सेवाकाल के दौरान रेलकर्मी स्वयं या डीपीओ की अनुमति से निवेश का विकल्प बदल सकते हैं। शेयर की बोली और निगरानी नेशनल सेक्योरिटी डिपाजिटरी लिमिटेड (एनएसडीएल) के अधीन की जाती है।
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