विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 26, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

गोरखपुर रामगढ़ताल पर वेटलैंड की घोषणा पांच साल पहले, अब होगा सीमांकन

Published: Fri, 26 Sep 2025 03:30 PM (IST)Updated: Fri, 26 Sep 2025 03:36 PM (IST)

गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) रामगढ़ताल के सीमांकन और पिलर लगाने की तैयारी कर रहा है जिसमें लगभग 18 लाख रुपये ...और पढ़ें

वेटलैंड डीएम के निर्देश पर जीडीए ने शुरू की सीमांकन और पिलर लगाने की तैयारी
वेटलैंड डीएम के निर्देश पर जीडीए ने शुरू की सीमांकन और पिलर लगाने की तैयारी

HighLights

  1. रामगढ़ताल का सीमांकन करेगी जीडीए |
  2. अतिक्रमण हटाने का अभियान शुरू |
  3. पर्यावरण समिति की बैठक में निर्णय |

जागरण संवाददाता, गोरखपुर। रामगढ़ताल को वेटलैंड (आर्द्रभूमि) घोषित कर चारों ओर 50 मीटर के दायरे में निर्माण प्रतिबंधित करने का काम पांच साल पहले ही पूरा हो गया लेकिन, सीमांकन कर हदबंदी नहीं हो सकी। इसकी वजह से कुछ स्थानों पर अतिक्रमण भी हो गया। अब डीएम दीपक मीणा के निर्देश पर गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) ने सर्वेक्षण के साथ ही पिलर लगाने की तैयारी शुरू कर दी है।

गुरुवार को विकास भवन सभागार में आयोजित जिला पर्यावरण समिति की प्रस्तावित बैठक में भी ताल किनारे के प्रतिबंधित क्षेत्र को सुरक्षित रखने के प्रयासों के साथ ही ताल में गिरने वाले नालों को पूरी तरह टैप करने पर चर्चा हुई।

रामगढ़ताल को सात दिसंबर 2020 को आर्द्रभूमि घोषित कर नोटिफिकेशन जारी किया गया था। लेकिन, अभी तक ताल के प्रभावित क्षेत्र (जोन आफ इन्फ्लुएंस ) के 50 मीटर दायरे में सीमांकन और पिलर लगाने का काम शुरू नहीं हो सका।

जिला पर्यावरण समिति की पिछली बैठक में डीएम दीपक मीणा ने प्राधिकरण को निर्देश दिया था कि ताल के 50 मीटर के भीतर स्थित सभी अतिक्रमण का चिह्नांकन और सीमांकन का कार्य जल्द पूरा किया जाए, ताकि चिह्नित अतिक्रमण हटाया जा सके। डीएम के निर्देश के क्रम में जीडीए ने इस कार्य के लिए आंतरिक समिति का गठन कर दिया है।

0.65 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से स्टेशन सर्वेक्षण कराने पर तकरीबन आठ लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है। इसके अलावा सर्वेक्षण के बाद पिलर लगाने पर तकरीबन 10 लाख रुपये खर्च होंगे। जीडीए इन दोनों कार्यों के लिए जल्द ही टेंडर जारी कर चयनित फर्म से काम शुरू कराने की तैयारी में जुटा है।

ताल की चौहद्दी

गजट (7 दिसंबर 2020) के अनुसार, रामगढ़ताल आर्द्रभूमि उत्तर की ओर पैडलेगंज चौकी से कुशीनगर-देवरिया मार्ग तक, पूर्व में महादेव झारखंडी ग्राम संख्या-2, दक्षिण देवरिया बाईपास मार्ग और ग्राम सिक्टौर तक और पश्चिम में पैडलेगंज चौकी से सर्किट हाउस रोड होते हुए प्राणि उद्यान और देवरिया बाईपास तक है।

यह भी पढ़ें- रंग-बिरंगी भी होगी सीएम ग्रिड की सड़क, लाल, आसमानी और भूरे कलर से होगी पुताई

नंबर गेम

  • 742.245 हेक्टेयर कुल रामगढ़ताल आर्द्रभूमि है
  • 529.169 हेक्टेयर ताल क्षेत्र है जिसका स्वामित्व जीडीए के पास
  • 177.325 हेक्टेयर राजकीय संपत्ति है जिसका स्वामित्व प्राधिकरण के पास
  • 35.751 हेक्टेयर में निजी काश्तकार

अब तक तीन निर्माण ध्वस्त, तीन को किया गया सील

डीएम के निर्देश के क्रम में जीडीए के सचिव पुष्पराज सिंह ने 24 सितंबर को जिला पर्यावरण समिति के सचिव व प्रभागीय वनाधिकारी को पत्र जारी कर बताया गया कि अब तक 50 मीटर के प्रभावित क्षेत्र में 10 अवैध अतिक्रमण चिह्नित किए जा चुके हैं। इनमें से तीन को ध्वस्त कराने के साथ ही तीन निर्माण को सील कराया जा चुका है।

ताल किनारे प्रभावित परिक्षेत्र के चिह्नांकन के लिए सर्वेयर नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। साथ ही मौके पर सीमांकन किए जाने के लिए पिलर का आयाम निर्धारित करते हुए आगणन तैयार कर लिया गया है। जल्द ही सीमांकन कर लिया जाएगा।