गोरखपुर बना ट्रांजिट सेंटर, एजेंटों के जरिए नेपाल पहुंच रही करोड़ों की रकम
गोरखपुर रेलवे स्टेशन पर 50 लाख रुपये की नकदी के साथ राजीव जायसवाल की गिरफ्तारी ने भारत-नेपाल सीमा पर सक्रिय एक बड़े हवाला नेटवर्क का खुलासा किया है। ज ...और पढ़ें

ढाई प्रतिशत कमीशन पर काम करती है कैश ढोने वाली टीम,एजेंसियां हुई अलर्ट। सांकेतिक तस्वीर
- साइड स्टोरी : तीन
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- एजेंटों से लूट होने के बाद शुरू हुई मामले की जांच बीच में ही ठंडी पड़ गई
जागरण संवाददाता,गोरखपुर: रेलवे स्टेशन पर 50 लाख रुपये के साथ पकड़े गए राजीव जायसवाल के मामले की छानबीन ने हवाला नेटवर्क की उस परत को उजागर कर दिया है, जो लंबे समय से नेपाल सीमा पर सक्रिय है। जांच में सामने आया है कि नेपाल के व्यापारी, जिन्हें भारत में तात्कालिक रूप से बड़ी नकदी की जरूरत होती है, सीधे बैंकिंग चैनल की बजाय हवाला नेटवर्क से जुड़े सेंटरों का सहारा ले रहे हैं। यह पूरा तंत्र टोकन सिस्टम, एजेंट और कैश कैरियर के भरोसे संचालित हो रहा है, जिसमें गोरखपुर एक अहम ट्रांजिट सेंटर बन चुका है।
जांच एजेंसियों को मिले इनपुट के मुताबिक, नेपाल में कारोबारी पहले हवाला नेटवर्क से जुड़े स्थानीय सेंटर पर नेपाली या भारतीय मुद्रा जमा करते हैं। इसके बदले उन्हें एक कोड या टोकन दिया जाता है। इसके बाद वही कारोबारी या उनका प्रतिनिधि सीमा पार कर भारत में प्रवेश करता है और तय सेंटर पर वही टोकन दिखाकर भारतीय रुपये हासिल कर लेता है। इस पूरी प्रक्रिया में न बैंकिंग सिस्टम शामिल होता है और न ही किसी तरह का औपचारिक लेन-देन, जिससे यह नेटवर्क लंबे समय तक जांच की जद से बाहर बना रहा।हवाला के इस खेल में नकदी लाने और ले जाने के लिए अलग-अलग टीमें काम कर रही हैं। जांच में सामने आया है कि इन टीमों में शामिल लोगों को कुल रकम का लगभग ढाई प्रतिशत कमीशन दिया जाता है। यानी 50 लाख रुपये ले जाने पर करीब सवा लाख रुपये तक का भुगतान एजेंट को किया जाता है। यही वजह है कि सीमावर्ती जिलों के कई युवक इस नेटवर्क से जुड़ते चले गए। सिद्धार्थनगर, महाराजगंज, कुशीनगर और गोरखपुर जैसे जिले इस नेटवर्क की अहम कड़ियां माने जा रहे हैं।सूत्रों के अनुसार, लंबे समय से चल रहे इस खेल में गोरखपुर एक प्रमुख कैश हब के रूप में उभरा है। यहां से नकदी इकट्ठा कर नेपाल बार्डर से सटे सेंटरों तक एजेंटों के माध्यम से पहुंचाई जाती है। इसके बाद वही रकम अलग-अलग व्यापारिक जरूरतों के लिए नेपाल में खपाई जाती है। हैरानी की बात यह है कि अब तक इस नेटवर्क को संचालित करने वाले मुख्य सरगनाओं का स्पष्ट पता नहीं चल सका है। जांच एजेंसियां मानती हैं कि यह नेटवर्क एक व्यक्ति नहीं, बल्कि कई स्तरों पर बंटे आपरेटरों के जरिए चलाया जा रहा है।यह पहला मौका नहीं है जब हवाला नेटवर्क की परछाई सामने आई हो। इससे पहले भी सीमावर्ती इलाकों में हवाला से जुड़े लोगों के साथ लूट की घटनाएं हो चुकी हैं। उन मामलों की छानबीन में भी इस तरह के अवैध नकदी लेन-देन के संकेत मिले थे, लेकिन जांच किसी ठोस नतीजे तक नहीं पहुंच सकी।एक बार फिर बड़ी रकम पकड़े जाने के बाद पुराने मामलों की फाइलें खंगाली जा रही हैं।आयकर विभाग, स्थानीय पुलिस और खुफिया एजेंसियां समन्वय के साथ इस पूरे तंत्र को समझने और उसके मास्टरमाइंड तक पहुंचने की कोशिश में जुटी हैं।

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