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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 28, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Gorakhpur जिला महिला अस्पताल में गर्भवती के साथ क्रूरता, डॉक्टर ने बिना अंग सुन्न किए कर दिया ऑपरेशन

By Jagran NewsEdited By: Pragati Chand
Published: Mon, 28 Aug 2023 09:23 AM (IST)

पीड़ित राखी के चेहरे पर नौ दिन पूर्व हुए आपरेशन का दर्द उभर आया। वह अपने आंसुंओं को रोक नहीं ...और पढ़ें

पीड़ित प्रसूता राखी गुप्ता, मरीज रंजीता व वार्ड में भर्ती महिलाएं। -जागरण
पीड़ित प्रसूता राखी गुप्ता, मरीज रंजीता व वार्ड में भर्ती महिलाएं। -जागरण

HighLights

  1. पूरे रुपये न मिलने पर जिला महिला अस्पताल में डाक्टर ने गर्भवती के साथ की क्रूरता
  2. दर्द से तड़पती रही गर्भवती, डॉक्टर को नहीं आई दया
  3. आपरेशन के लिए चार से सात हजार रुपये वसूलने का आरोप

गोरखपुर, गजाधर द्विवेदी। कमर के नीचे का अंग सुन्न हुए बिना पेट चीरने का दर्द नौवें दिन रविवार को भी प्रसूता के चेहरे पर उभर आया। उनकी आंखों से आंसू बहने लगे और बोल नहीं फूट रहे थे। मोतीराम की राखी गुप्ता का डाक्टरों ने अंग सुन्न हुए बिना पेट चीर दिया। वह दर्द से तड़प उठीं। उनके पति ने आरोप लगाया कि डाक्टर ने आपरेशन के लिए सात हजार रुपये की मांग की थी, उन्हें सिर्फ पांच हजार रुपये दिए गए थे। इस वजह से उन्होंने ऐसा किया। बच्चे की तबीयत भी खराब हो गई। उसे मेडिकल कालेज में भर्ती कराना पड़ा। अन्य कई प्रसूताओं से भी आपरेशन के लिए रुपये लिए गए हैं। उन्हें कई दवाएं बाहर से भी खरीदनी पड़ी हैं।

यह है मामला

जिला महिला अस्पताल की हालत सुधरने का नाम नहीं ले रही है। कुछ दिन पहले रुपये लेते एक डाक्टर का वीडियो भी वायरल हुआ था। इसके बाद प्रशासन सख्त हुआ। कुछ दिन सख्ती रही लेकिन पुन: व्यवस्था पटरी से उतर गई है। जागरण टीम रविवार को जिला महिला अस्पताल के 100 बेड मैटर्निटी विंग में पहुंची। आपरेशन के बाद वार्ड में भर्ती राखी गुप्ता का टांका अभी कटा नहीं था, लेकिन वे मेडिकल कालेज जाने की तैयारी कर रही थीं, क्योंकि उनका नवजात वहीं भर्ती है। पूछने पर उनका दर्द उभरकर सामने आ गया। आंखें आंसुओं से भर गईं।

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डाक्टर ने सात हजार रुपये की मांग

पति भोलू कुमार मद्धेशिया ने बताया कि 19 अगस्त को सुबह 11 बजे राखी को भर्ती कराया गया। दो बजे उन्हें आपरेशन थियेटर में बुलाया गया। डाक्टर ने सात हजार रुपये की मांग की। मेरे पास मात्र पांच हजार रुपये थे, वही दे दिया। राखी ने कहा कि मुझे इंजेक्शन लगाया गया लेकिन अंग अभी सुन्न नहीं हुआ था। डाक्टर पेट में चीरा लगाने लगीं तो दर्द हुआ। मैंने यह बात डाक्टर को बताई तो उन्होंने कहा कि इतना दर्द होता है। उन्होंने चीरा लगा दिया। मैं दर्द से तड़प उठी। उठकर बैठ गई। पुन: इंजेक्शन लगाया गया। इसके बाद प्रसव कराया गया। इस दर्द की वजह से मैं बेचैन हो गई थी, हिलने-डुलने से बच्चा पेट में फंस गया। पैदा होने के बाद उसकी तबीयत खराब हो गई। आनन-फानन उसे मेडिकल कालेज में भर्ती कराया गया। दवाएं भी बाहर से मंगानी पड़ी थीं। दवाएं खासकर दर्द की और एंटीबायोटिक बाहर से खरीदने की कई प्रसूताओं ने शिकायत की है।

नंदानगर की रंजीता से आपरेशन के लिए पांच हजार रुपये मांगे गए थे, चार हजार देने पर आपरेशन हुआ। सहजनवां के अरविंद से चार हजार रुपये मांगे गए थे लेकिन उन्होंने सीएमओ कार्यालय से कहलवाकर निश्शुल्क कराया। खजनी की रागिनी के स्वजन व अंजनी ने भी दवाएं बाहर से मंगाने की बात कही है। उनका कहना है कि ज्यादातर दवाएं यहां से मिल गईं लेकिन कुछ दवाएं बाहर से लानी पड़ीं।

क्या कहते हैं डॉक्टर

जिला महिला अस्पताल प्रमुख अधीक्षक डा. जय कुमार ने बताया कि आपरेशन से पूर्व एनेस्थेटिस्ट रीढ़ की हड्डी में बेहोशी की दवा इंजेक्शन के जरिये लगाते हैं, इससे कमर के नीचे का हिस्सा सुन्न हो जाता है। यदि किसी का सुन्न नहीं हुआ तो उसे दोबारा इंजेक्शन लगाया जाता है। बिना अंग सुन्न हुए आपरेशन करने या आपरेशन के लिए रुपये मांगने की शिकायत किसी ने नहीं की है। शिकायत मिलने पर जांच कराई जाएगी और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।