आयुष विश्वविद्यालय में 50 लाख की औषधियों का उत्पादन, स्वचालित मशीनों से बढ़ी क्षमता
महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय की फार्मेसी में स्वचालित मशीनों के उपयोग से औषधि उत्पादन क्षमता बढ़ी है। 31 दिसंबर ...और पढ़ें

महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय। जागरण
HighLights
स्वचालित मशीनों से आयुष विश्वविद्यालय में औषधि उत्पादन बढ़ा।
31 दिसंबर 2025 तक 50 लाख रुपये की दवाएं बनीं।
मधुमेह रोगियों के लिए मधुमेहारी औषधि का विशेष उत्पादन।
संवाद सूत्र, भटहट। महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय में संचालित फार्मेसी में औषधि निर्माण की क्षमता में वृद्धि हुई है। स्वचालित मशीनों के उपयोग से 31 दिसंबर 25 तक लगभग 50 लाख रुपये मूल्य की औषधियों का उत्पादन हुआ है। फार्मेसी में बनने वाली औषधियों की आपूर्ति औषधि भंडार कक्ष में की गई है।
आयुष विश्वविद्यालय के कुलपति डा. के रामचंद्र रेड्डी ने बताया कि ओपीडी में मांग को देखते हुए औषधियों का उत्पादन बढ़ाया गया है। पहले चूर्ण को हाथों से छाना जाता था, जिससे समय अधिक लगता था। अब सिफ्टर मशीन के प्रयोग से बड़े और महीन कण स्वतः अलग हो रहे हैं, जिससे कम समय में अधिक मात्रा में औषधि निर्माण संभव हो सका है।
ओपीडी में सर्वाधिक मांग वाली औषधियों में मधुमेहारी, अश्वगंधा, अर्जुन छाल चूर्ण, हरितकी, विभीतकी, हिंग्वाष्टक, मंजिष्ठा और त्रिफला चूर्ण का नियमित निर्माण किया जा रहा है।
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उन्होंने बताया कि 11 औषधियों के मिश्रण से बनने वाली मधुमेहारी के निर्माण में सर्वाधिक परिश्रम लगता है। कुलपति के शोध से तैयार औषधि मधुमेह रोगियों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो रही है।
कुलपति ने बताया कि नए वर्ष में बड़ी फार्मेसी के निर्माण के साथ ही उसके समीप विश्वविद्यालय के शिक्षण स्टाफ के लिए अलग भवन का निर्माण भी कराया जाएगा।