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    शरीर में जंग लगा देगा आलू पर चढ़ा आयरन वाला रंग, दो रुपये का लालच बना जानलेवा

    Updated: Sun, 31 Aug 2025 02:33 PM (IST)

    गोरखपुर में मिलावटखोर खराब आलू को लाल रंग से रंगकर बेच रहे हैं जिससे लोगों के स्वास्थ्य को खतरा है। खाद्य सुरक्षा विभाग के सहायक आयुक्त ने इसकी पुष्टि की है। आलू बाराबंकी उन्नाव लखनऊ कानपुर से मंगाया जाता है। रंग आलू के छिलके से अंदर तक जाता है। ऐसे आलू का सेवन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है और पेट की गड़बड़ी उल्टी जैसी समस्याएं पैदा कर सकता है।

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    दो रुपये लाभ के लिए आलू रंग कर जीवन से खिलवाड़ कर रहे मिलावटखोर

    जागरण संवाददाता, गोरखपुर। दो रुपये प्रति किलोग्राम लाभ के लिए मिलावटखोर लोगों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं। खराब आलू को लाल रंग से रंगकर बाजार में धड़ल्ले से बेच रहे हैं। इसकी पुष्टि खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन के सहायक आयुक्त डा. सुधीर कुमार सिंह ने की।

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    सहायक आयुक्त ने खुद के इस्तेमाल के लिए बाजार से आलू खरीदकर मंगवाया तो यह सामान्य से ज्यादा लाल दिखा। शक के आधार पर घर में जांच की तो आलू पर आयरन आक्साइड पुता मिला। उन्होंने टीम बनाकर मंडियों में आलू की जांच का निर्णय लिया है।

    सहायक आयुक्त खाद्य ने बताया कि शास्त्री चौक के पास से आलू मंगाया था। आलू देखने में अच्छा लग रहा था, लेकिन इसका रंग सामान्य से ज्यादा लाल था तो खुद ही जांच की। पानी में आलू डालते ही रंग छूटने लगा। जांच में पता चला कि आलू को रेड आक्साइड से रंगा गया है। यह मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है। पिछले वर्ष सहजनवां में रंगकर आलू बेचने का मामला सामने आया था। विभाग की कार्रवाई के बाद मिलावट रुक गई थी।

    बाराबंकी, उन्नाव, लखनऊ व कानपुर से आता है आलू

    गोरखपुर में आलू की पैदावार बहुत कम होती है। कारोबारी इसे बाराबंकी, उन्नाव, लखनऊ, कानपुर आदि जिलों की मंडियों से मंगाते हैं। मिलावटखोर दूसरे जिलों की मंडियों में ही खराब आलू को रेड आक्साइड से रंगवाकर मंगाते हैं। इस आलू की बिक्री में उन्हें प्रति किलोग्राम दो रुपये ज्यादा लाभ होता है। यानी 40 किलोग्राम की बोरी में 80 रुपये अतिरिक्त लाभ के लिए मिलावट का यह धंधा तेजी से बढ़ रहा है। आलू का रंग अच्छा दिखने के कारण लोग इसे आसानी से खरीद लेते हैं।

    छिलके के रास्ते आलू में जाता है रंग

    सहायक आयुक्त खाद्य डा. सुधीर कुमार सिंह ने बताया कि मिलावटखोर आलू के छिलके को लाल रंग में रंगते हैं। यह रंग छिलके के रास्ते आलू में चला जाता है। इस आलू का लंबे समय तक इस्तेमाल स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है।

    चमक बढ़ाने व ताजा दिखाने के लिए करते हैं इस्तेमाल

    सब्जी पर आयरन आक्साइड या अन्य कृत्रिम रंगों का प्रयोग खाद्य मिलावट माना जाता है। खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम (एफएसएसएआइ) तथा अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुसार यह प्रतिबंधित है। कई बार ऐसे रंगों का प्रयोग पुराने आलू को ताजा और चमकीला (लाल या पीला) दिखाने के लिए किया जाता है। यह रंग आलू के छिलके से भीतर तक पहुंच सकता है और नियमित सेवन पर स्वास्थ्य के बहुत नुकसानदायक होता है।

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    रोजाना आता है 25 से 30 टन आलू

    गोरखपुर मंडी में रोजाना 25 से 30 टन आलू आता है। सूत्रों का कहना है कि चार व्यापारी आयरन आक्साइड से लेपित आलू मंगाकर बेच रहे हैं। कम रेट पर मिलने के कारण इस आलू की बिक्री भी ज्यादा हो रही है। महानगर से लगायत ग्रामीण क्षेत्रों में यह आलू बिक रहा है। स्थानीय स्तर पर कुछ व्यापारी आलू में गेरुआ रंग मिट्टी के साथ मिलाते हैं।

    आलू की खरीद करते समय उसके छिलके पर अस्वाभाविक रंग या दाग दिखाई दे तो सतर्क रहें। ऐसे आलू का सेवन न करें जिनमें रंग भीतर तक समाया हो। आलू पर सिर्फ अनुमन्य खाद्य-ग्रेड वैक्स का प्रयोग अंकुरण या खराबी रोकने के लिए किया जा सकता है। यदि आलू संदिग्ध दिख रहा हो तो इसकी सूचना तत्काल खाद्य सुरक्षा विभाग या स्थानीय प्रशासन को दें। स्वास्थ्य की दृष्टि से यह अत्यंत आवश्यक है कि आमजनमानस जागरूक एवं सतर्क रहें।

    -डा. सुधीर कुमार सिंह, सहायक आयुक्त, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन

    आयरन आक्साइड का उपयोग पेंट, सिरेमिक और कास्मेटिक्स में होता है, लेकिन आलू या किसी भी ताजी सब्ज़ी पर कोटिंग के रूप में इसका प्रयोग वर्जित है। आयरन आक्साइड से लेपित आलू खाने पर शरीर में धातु जा सकती है। इससे बुखार के साथ ही पेट की गड़बड़ी, उल्टी, मितली हो सकती है। संवेदनशील व्यक्तियों में आयरन की अधिकता भी हो सकती है। लंबे समय तक इसके सेवन से लिवर, गुर्दे और पाचन तंत्र पर बुरा असर पड़ सकता है।

    -डा. ओंकार राय, वरिष्ठ फिजिशियन