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    Gonda News: घर पर नहीं धरना स्थल पर जलाएंगे दीप, करेंगे पूजन-अर्चन, 12 किसान दो वर्षों से अनवरत धरने पर बैठे

    By Amit pandeyEdited By: Shivam Yadav
    Updated: Mon, 24 Oct 2022 07:04 AM (IST)

    अब किसानों के टेंट कनात भी फट चुके हैं। ठंडी बरसात व गर्मी की तपिश झेल चुके किसानों पर प्रशासनिक अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों को तरस नहीं आया। दीपावली ...और पढ़ें

    वह धरने से हटने को तैयार नहीं है।

    हलधरमऊ [ एसपी तिवारी]। परसागोंडरी शिवशंकर पुरवा के 12 किसान दो वर्षों से धरने पर बिना धूप व छांव की परवाह किए डटे हैं लेकिन, इनकी आवाज शासन तक नहीं पहुंच सकी। अधिकारी भी मूक बने हुए हैं। दीपावली का पर्व भी किसान घर के बजाय धरना स्थल पर मनाएंगे। खेत में ही दीया जलाने के साथ पूजन-अर्चन करेंगे। इन किसानों की मजबूरी समझने के लिए जनप्रतिनिधियों ने भी गंभीरता नहीं दिखाई। ऐसे में इनके परिवारजन तंगहाली का जीवन गुजारने को विवश हैं।

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    गांव के मजरे शिवशंकर पुरवा के पास से सरयू नहर खंड प्रथम धनाईपट्टी नहर निकल रही थी। इसके विरोध में पांच नवंबर 2020 से किसान कमलेश, बृजेश, दिनेश, रंगनाथ, पृथ्वीनाथ, रघुनाथ मिश्र, कैलाशनाथ, राधेश्याम शुक्ल, शकुंतला, अर्जुन प्रसाद, राहुल, खुशीराम सहित 12 किसान खेत में टेंट का लगाकर धरने पर बैठ गए थे। 

    अवैध तरीके से बैनामा कराने का आरोप

    किसानों का कहना है कि नहर विभाग अवैध तरीके से बिना बैनामा कराए मृतक हो चुके व्यक्तियों से जमीन का अधिग्रहण कर लिया था। उन लोगों को जमीन का कोई मुआवजा भी नहीं दिया गया। बावजूद इसके नहर की खोदाई शुरू करा दी गई। अधिकारियों से शिकायत की गई लेकिन, उस पर कोई सुनवाई नहीं हुई। थक हारकर उन लोगों ने धरने पर बैठने का फैसला किया। 

    नहर विभाग ने किया अन्याय

    किसान रघुनाथ मिश्र का कहना है कि नहर विभाग ने अन्याय किया है। मृतक हो चुके लोगों से फर्जीवाड़ा करके जमीन का अधिग्रहण कर लिया। एक पैसा मुआवजा नहीं मिल सका है। जब तक नए सर्किल रेट से मुआवजा नहीं मिल जाएगा तब तक वह लोग धरने पर बैठे रहेंगे। जान चली जाएगी लेकिन, वह अपनी जमीन खोदने नहीं देंगे। 

    धरने से हटने को तैयार नहीं

    अब किसानों के टेंट कनात भी फट चुके हैं। ठंडी, बरसात व गर्मी की तपिश झेल चुके किसानों पर प्रशासनिक अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों को तरस नहीं आया। दीपावली को लेकर इनके मन भी उल्लास है लेकिन, वह धरने से हटने को तैयार नहीं है। परिवारजन घरों में जहां दीप जलाकर खुशियां मनाएंगे। वहीं ये किसान अपनी जमीन बचाने के लिए धरने पर बैठकर पूजन अर्चन करेंगे। 

    दो साल से अधूरी है नहर

    किसानों के विरोध के चलते 16 बीघा का रकबा करीब एक किलोमीटर लंबाई में जमीन का विवाद है। गत दो वर्षों से धनईपट्टी नहर अधूरी है। किसानों से बात कर समस्या का निस्तारण किए जाने का प्रयास किया गया होता तो नहर की खोदाई भी हो चुकी होती।

    प्रशासन की बात नहीं मान रहे किसान

    एसडीएम हीरालाल यादव का कहना है कि किसानों को लगातार समझाने बुझाने का प्रयास किया गया लेकिन, वह मानने को तैयार नहीं है। जो गलत है। फिर भी मामले को किसी तरह से सुलझाए जाने का प्रयास जारी है।