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    बदल गया एक और कैलेंडर, गाजियाबाद में जहरीली हवा का संकट जारी; 2025 में सिर्फ 6 दिन मिली अच्छी हवा

    Updated: Thu, 01 Jan 2026 05:29 AM (IST)

    गाजियाबाद में 2025 में केवल छह दिन ही साफ हवा मिली, जबकि 359 दिन वायु गुणवत्ता संतोषजनक से गंभीर श्रेणी में रही। यह स्थिति पिछले कई वर्षों से बनी हुई ...और पढ़ें

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    दिल्ली मेरठ एक्सप्रेस- वे पर छाया स्मॉग। जागरण

    जागरण संवाददाता, साहिबाबाद। फिर से एक वर्ष और कम होने के साथ दीवारों पर नया कैलेंडर इस उम्मीद में टांग दिया है कि इस वर्ष साफ हवा मिलेगी। यही उम्मीद वैसे तो शहरवासियों ने बीते वर्ष भी की थी, लेकिन पूरे वर्ष जहरीली हवा सांसों पर मंडराती रही। अधिकारियों की लापरवाही से हवा में शामिल जहरीले कणों से सांसें घुटती रहीं।

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    जिले की 45 लाख से अधिक की आबादी ने महज छह दिन ही साफ हवा में सांस ली। बाकी 359 दिन संतोषजनक, मध्यम, खराब, बेहद खराब व गंभीर श्रेणी में रही। यह स्थिति महज वर्ष 2025 की ही नहीं रही उससे पहले के वर्षों में भी यही स्थिति रही।

    अधिकारी हर बार केवल कागजी योजनाएं तैयार करते रहे और लोगों की उम्मीद पर पानी फेरते रहे। वर्ष के अंतिम दिन भी लोगों को बेहद खराब हवा में रहना पड़ा। पेश है साहिबाबाद से राहुल कुमार की रिपोर्ट...

    वर्ष 2025 में कितने दिन किस श्रेणी में रही हवा

    श्रेणी दिन
    अच्छी 06
    संतोषजनक 90
    मध्यम 135
    खराब 66
    बेहद खराब 53
    गंभीर 14

    वर्ष 2025 में कब-कब साफ रही हवा

    दिनांक एक्यूआई
    14 जुलाई 40
    15 जुलाई 41
    31 जुलाई 47
    26 अगस्त 44
    एक सितंबर 48
    दो सितंबर 48

    बीते छह वर्ष में कितने दिन साफ व गंभीर श्रेणी में रही हवा

    वर्ष साफ गंभीर
    2020 13 24
    2021 10 22
    2022 12 02
    2023 10 03
    2024 15 03
    2025 06 14

    बीते छह साल में अधिकतम प्रदूषण की स्थिति

    वर्ष एक्यूआई
    2020 484
    2021 485
    2022 487
    2023 478
    2024 467
    2025 459

    छह वर्ष में सील की गईं अवैध फैक्ट्रियां

    वर्ष सील फैक्ट्री
    2020 180
    2021 353
    2022 380
    2023 308
    2024 294
    2025 307

    एक्यूआई के आधार पर हवा की श्रेणी

    श्रेणी एक्यूआई
    अच्छी 0 से 50
    संतोषजनक 51 से 100
    मध्यम 101 से 200
    खराब 201 से 300
    बेहद खराब 301 से 400
    गंभीर 401 से ऊपर

    शहर में प्रदूषण के हॉटस्पॉट व मुख्य कारक

    • मोहननगर: वाहनों का दबाव, सड़क पर उड़ती धूल।
    • राजनगर एक्सटेंशन: वाहनों का दबाव, निर्माण कार्य व सड़क की धूल।
    • लोनी : अवैध औद्योगिक क्षेत्र, वाहनों का दबाव, खुले में बिकती निर्माण सामग्री, सड़कों की धूल।
    • भोपुरा-दिल्ली बार्डर: अवैध फैक्ट्री, खुले में बिकती निर्माण सामग्री व सड़क पर उड़ती धूल।
    • सिद्धार्थ विहार : वाहनों का दबाव, निर्माण कार्य, टूटी सड़कें, उड़ती धूल, निर्माण सामग्री।
    • कनावनी पुस्ता रोड : वाहनों का दबाव, निर्माण कार्य, टूटी सड़कें, उड़ती धूल, निर्माण सामग्री।
    • विजय नगर एंड साउथ साइड जीटी रोड : एनएच-नौ वाहनों का दबाव, टूटी सड़कें, धूल, निर्माण कार्य, औद्योगिक उत्सर्जन।
    • लालकुआं : सड़कों पर उड़ती धूल, वाहनों का दबाव, निर्माण गतिविधियां।

    इन बिंदुओं पर कार्य करने की जरूरत

    • टूटी सड़कों की मरम्मत होने से मिलेगी बड़ी राहत।
    • अधिक धूल वाले इलाकों में पानी का छिड़काव हो।
    • शहर में जाम की समस्या को दूर किया जाए।
    • उम्र पूरी कर चुके वाहनों को सील किया जाए।
    • अधिक प्रदूषण वाले इलाकों में प्रदूषण के कारकों पर रोक लगे।
    • अवैध फैक्ट्रियां सील हों, नई अवैध फैक्टरी न खुलें।
    • सभी फैक्ट्रियों में नियम के अनुसार चिमनी लगें।
    • लोनी जैसे अधिक प्रदूषित इलाके में ई-वेस्ट जलाने पर रोक लगे।

    प्रदूषण रोकथाम की जिम्मेदारी 20 से अधिक विभागों को मिली हुई है। प्रदूषण बोर्ड निगरानी व कार्रवाई का कार्य करता है। इस वर्ष और बेहतर तरीके से कार्य किया जाएगा।


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    -अंकित सिंह, क्षेत्रीय अधिकारी, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड