आज से सार्वजनिक सेवा वाहनों में एआइएस-140 ट्रैकिंग सिस्टम अनिवार्य, यात्रियों की सुरक्षा होगी और मजबूत
केंद्र सरकार ने सार्वजनिक सेवा वाहनों में एआईएस-140 व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस और आपातकालीन बटन अनिवार्य किया है। यह व्यवस्था नए पंजीकरण, नवीनीकरण ...और पढ़ें
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जागरण संवाददाता, गाजियाबाद। यात्रियों की सुरक्षा को और मजबूत करने की दिशा में केंद्र सरकार ने सार्वजनिक सेवा वाहनों के लिए बड़ा कदम उठाया है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के निर्देश पर अब सभी राष्ट्रीय परमिट प्राप्त सार्वजनिक सेवा वाहनों में एआइएस-140 मानक का व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (वीएलडीटी) और आपातकालीन सहायता बटन लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। यह व्यवस्था चरणबद्ध तरीके से लागू होगी।
सहायक सम्भागीय परिवहन अधिकारी (प्रशासन) मनोज कुमार सिंह ने बताया कि आज से नए वाहन पंजीकरण, पंजीकरण नवीनीकरण तथा स्वामित्व हस्तांतरण के समय वाहन पोर्टल के माध्यम से एआइएस-140 डिवाइस की अनिवार्य जांच की जाएगी।
बिना निर्धारित मानक के उपकरण लगे होने पर पंजीकरण संबंधी प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकेगी। इसके अलावा 1 अप्रैल से फिटनेस प्रमाण पत्र और प्रदूषण जांच प्रमाण पत्र (पीयूसीसी) के दौरान भी वाहनों में एआइएस-140 ट्रैकिंग सिस्टम की जांच अनिवार्य होगी।
इसी तिथि से मोटर वाहन नियम 90 के अंतर्गत परमिट जारी करते समय भी वाहन पोर्टल पर इस सिस्टम की पुष्टि की जाएगी। परिवहन विभाग के अधिकारियों के अनुसार यह नियम बस, टैक्सी, आटो, ई-रिक्शा सहित उन सभी सार्वजनिक सेवा वाहनों पर लागू होगा, जिनके लिए परमिट आवश्यक होता है।
इस सिस्टम के माध्यम से वाहनों की रियल-टाइम लोकेशन की निगरानी की जा सकेगी और किसी आपात स्थिति में यात्रियों को तुरंत सहायता मिल सकेगी। परिवहन विभाग ने वाहन स्वामियों, संचालकों और परिवहन व्यवसाय से जुड़े लोगों से अपील की है कि वे निर्धारित समय सीमा से पहले अपने वाहनों में मानक के अनुरूप एआइएस-140 ट्रैकिंग डिवाइस और इमरजेंसी बटन लगवा लें।
यह होता है एआइएस मानक-140 व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग सिस्टम
एआइएस-140 मानक व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (वीएलटीडी) भारत सरकार द्वारा निर्धारित एक जीपीएस-आधारित सिस्टम है, जो सार्वजनिक परिवहन में लगाया जाता है, ताकि वाहन की रियल-टाइम लोकेशन ट्रैक हो सके और आपात स्थिति में सुरक्षा के लिए एक आपातकालीन राहत बटन के माध्यम से तुरंत अलर्ट भेजा जा सके, जिससे यात्रियों, खासकर महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा बढ़े और वाहनों पर नियंत्रण बेहतर हो सके।

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