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    गाजियाबाद में प्राधिकरण की AI तकनीक से अवैध निर्माण पर नहीं कसा शिकंजा, जेई और सुपरवाइजर बेपरवाह

    Updated: Sun, 04 Jan 2026 10:37 PM (IST)

    गाजियाबाद प्राधिकरण ने जनवरी 2025 तक एआई तकनीक और सैटेलाइट डेटा का उपयोग कर अवैध निर्माण पर शिकंजा कसने की योजना बनाई थी। पहले चरण में जोन-एक और जोन-द ...और पढ़ें

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    जागरण संवाददाता, गाजियाबाद। गाजियाबाद विकास प्राधिकरण ने जनवरी 2025 में प्राधिकरण क्षेत्र के सभी आठ जोन में अवैध निर्माण पर शिकंजा कसने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) तकनीक का सहारा लिया गया। इसके लिए खास तौर पर तैयार सॉफ्टवेयर से सैटेलाइट डाटा एकत्रित करने की योजना थी।

    पहले चरण में एक हजार वर्ग मीटर या इससे अधिक अधिक भूखंड पर अवैध निर्माण को चिह्नित कर उस पर अंकुश लगाना था। शुरूआती फेज में जोन-एक और जोन-दो पर फोकस किया गया, लेकिन अवैध निर्माण पर अंकुल नहीं लगाया जा सका।

    भूखंड पर अवैध निर्माण और नक्शे के विपरीत निर्माण पर अंकुश लगाने में प्राधिकरण की टीम फेल साबित हुई। अवैध निर्माण पर रोक और अवैध कालोनियों को विकसित होने से रोकने के लिए जीडीए हाइटेक तकनीक का सहारा ले रही है।

    इनफोर्समेंट जियाट्रिक्स सॉफ्टवेयर से सैटेलाइट डेटा के आधार पर अवैध निर्माण को चिह्नित करने के लिए प्राधिकरण ने निजी कंपनी से करार किया। ताकि नक्शे के विपरीत निर्माण होने पर इसका आसानी से पता लगाया जा सकेगा।

    जीडीए अधिकारियों के मुताबिक जनवरी माह 2025 के अंत तक इस तकनीक के तहत प्रक्रिया को शुरू करना था, जो जनवरी 2026 में भी अधर में है। इस तकनीक के लिए सेटेलाइट इमेज के जरिये पायटल प्रोजेक्ट के तौर पर जोन-एक और जोन दो का डेटा नहीं जुटाया जा सका।

    अवैध निर्माण पर जेई व सुपरवाइजर की जवाबदेही

    प्राधिकरण के संबंधित क्षेत्र में अवैध निर्माण होने पर सुपरवाइजर और अवर अभियंता को जिम्मेदार बनाया गया था, जिसमें जोन से स्थानांतरण के समय संबंधित अधिकारी उस सेटेलाइट इमेज पर हस्ताक्षर करके आने वाले अधिकारी को देंगे।

    सैटेलाइट से इमेज भी ली जाएगी, जिसमें वहां की वर्तमान स्थिति दर्शाई जाएगी। इसकी रिपोर्ट प्रवर्तन टीम को भेजी जाएगी और संबंधित से स्पष्टीकरण लिया जाएगा। इसमें अभी तक एक मामले में भी किसी को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सका।



    एआई सॉफ्टवेयर की मदद से सैटेलाइट इमेज से अवैध निर्माण को चिह्नित करने की योजना को तेजी से आगे बढ़ाया जाएगा। इसमें क्षेत्र की एक इमेज तीन माह पहले और दूसरी इसके बाद की इमेज की जांच कराई जाएगी। नक्शों व इमेज का सॉफ्टवेयर से मिलान न होने पर अवैध निर्माण पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

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    नन्द किशोर कलाल, उपाध्यक्ष जीडीए