फतेहपुर में एआरटीओ के निलंबन बाद जांच में तेजी की उम्मीद, गिरफ्तार हो सकते हैं कई अफसर
फतेहपुर में एआरटीओ के निलंबन के बाद अवैध मौरंग परिवहन और ओवरलोडिंग मामले की जांच में तेजी आने की उम्मीद है। एसटीएफ की रिपोर्ट के 48 दिन बाद यह कार्रवा ...और पढ़ें

जागरण संवाददाता, फतेहपुर। चोरी से मौरंग परिवहन करने व ओवरलोडिंग के मामले में एसटीएफ विभाग द्वारा दर्ज कराई रिपोर्ट के 48 दिन बाद एआरटीओ पर निलंबन की गाज गिरने के बाद कार्रवाई में तेजी आने की उम्मीद है...। जिससे अब नामजद अफसर भी गिरफ्तार हो सकते हैं।
हालांकि अब तक पुलिस की कार्रवाई शिथिल रही है। पुलिस टीमें विवेचना दौरान नाम प्रकाश में आने पर दो ढाबा संचालकों को जेल भेज दिया है लेकिन अभी तक नामजद आरोपितों की गिरफ्तारी नहीं हो सकी।
बता दें कि एसटीएफ लखनऊ की टीम ने 12 नवंबर को थरियांव थाने में लोकेशनबाज धीरेंद्र सिंह, विक्रम, एआरटीओ अधिकारी के ड्राइवर बबलू पटेल, खनन अधिकारी देशराज सिंह, गनर राजू व मुकेश तिवारी के विरुद्ध चोरी से अवैध मौरंग परिवहन करने का मुकदमा दर्ज कराया था।
जिसमें एसटीएफ ने धीरेंद्र व विक्रम को गिरफ्तार कर वाराणसी जेल भेज दिया था। पुलिस ने विवेचना दौरान दबंग ढाबा संचालक विकास पटेल को गिरफ्तार कर वाराणसी जेल भेजा है। विवेचक व सीओ थरियांव वीर सिंह ने बताया कि आरोपितों की धरपकड़ के लिए टीमें काम कर रही हैं।
उधर सदर कोतवाली में खान निरीक्षक बिपेंद्र कुमार राजभर ने बीते 23 नवंबर 2025 को देवांश, रामू यादव, इसके सहयोगी वाहन, कपिल तिवारी निवासी रायबरेली के साथ आठ अज्ञात लग्जरी गाड़ी नंबरों पर सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम, खान एवं खनिज अधिनियम, चोरी आदि की धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया था।
पुलिस ने बहुआ स्थित पार्थ ढाबा संचालक देवांश प्रताप सिंह को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। मुकदमे के 48 दिन बाद एआरटीओ पर निलंबन की गाज गिरने से अब जांच में तेजी आने की उम्मीद है जिससे नामजद अधिकारी व लोकेशनबाजों को पुलिस शीघ्र गिरफ्तार कर सकती है। इंस्पेक्टर तारकेश्वर राय ने बताया कि धरपकड़ को टीमें छापेमारी कर रही हैं।

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