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    फर्रुखाबाद: मतदाता सूची में ढाई लाख से अधिक विसंगतियां, उम्र और रिश्तों की गड़बड़ी ने बढ़ाई बीएलओ की मुश्किल

    Updated: Thu, 01 Jan 2026 03:51 PM (IST)

    फर्रुखाबाद में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण में ढाई लाख से अधिक मतदाताओं के विवरण में तार्किक विसंगतियां सामने आई हैं। इनमें पिता के नाम में गड़ ...और पढ़ें

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    जागरण संवाददाता, फर्रुखाबाद। विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) के अंतिम चरण में पहुंचते ही मतदाता सूची में दर्ज करीब ढाई लाख से अधिक मतदाताओं का विवरण निर्वाचन आयोग के लिए बड़ी चिंता बन गया है। उम्र, रिश्तों और पारिवारिक संरचना से जुड़ी ऐसी अनेक तार्किक विसंगतियां सामने आई हैं, जो सामान्य सामाजिक ढांचे से मेल नहीं खा रहीं।

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    सबसे ज्यादा मामले पिता के नाम में विसंगति के हैं, जहां 1.38 लाख से अधिक मतदाताओं के रिकार्ड में नामों का मेल नहीं बैठ रहा। इन्हीं कारणों से बूथ लेवल अधिकारी अब घर-घर जाकर सत्यापन में जुटे हैं और कई मामलों में मतदाताओं से दस्तावेज जुटाने के लिए बार-बार संपर्क करना पड़ रहा है।

    जांच में सामने आया है कि बड़ी संख्या में ऐसे वोटर रिकार्ड हैं, जहां माता-पिता और संतान के बीच उम्र का अंतर पंद्रह वर्ष से कम या पचास वर्ष से अधिक दर्ज है। कुछ मामलों में दादा-दादी या नाना-नानी और मतदाता की उम्र का अंतर चालीस वर्ष से भी कम पाया गया है।

    इसके अलावा एक ही परिवार में पांच से अधिक संतानों के नाम दर्ज होना, पिता के नाम का मेल न खाना और मतदाता का लिंग गलत दर्ज होना जैसी गड़बड़ियां भी सामने आई हैं। आयोग की ओर से इन गंभीर तार्किक विसंगति वाले मामलों के विशेष सत्यापन के निर्देश हैं।

    आंकड़ों के मुताबिक जिले में कुल 2,43,169 मतदाता ऐसे हैं, जिनके विवरण में किसी न किसी तरह की तार्किक गड़बड़ी पाई गई है। इनमें सबसे बड़ा हिस्सा पिता के नाम में विसंगति का है, जहां 1,38,027 मतदाताओं के रिकार्ड में पिता का नाम अन्य दस्तावेजों या पुराने रिकार्ड से मेल नहीं खा रहा।

    इसी तरह छह से अधिक संतानों वाले परिवारों के 19,903 मामले चिन्हित किए गए हैं। माता-पिता और संतान के बीच पंद्रह वर्ष से कम उम्र का अंतर 59,173 मामलों में पाया गया, जबकि पचास वर्ष से अधिक का अंतर 12,090 मामलों में दर्ज है। दादा-दादी या नाना-नानी से उम्र का अंतर चालीस वर्ष से कम होने के 13,976 मामले सामने आए हैं।

    इन विसंगतियों को दूर करने के लिए बीएलओ को निर्देश हैं कि वे जन्मतिथि, माता-पिता से संबंध और अन्य जरूरी दस्तावेजों के आधार पर स्थिति स्पष्ट कराएं। संबंधित मतदाताओं से प्रमाण पत्र, पहचान पत्र और पारिवारिक विवरण मांगे जा रहे हैं। यदि सत्यापन पूरा नहीं हुआ या प्रस्तुत दस्तावेज संतोषजनक नहीं पाए गए, तो ऐसे मामलों में नाम कटने की कार्रवाई भी की जा सकती है।

    उप जिला निर्वाचन अधिकारी अरुण कुमार ने स्पष्ट किया कि आयोग का उद्देश्य मतदाता सूची को साफ, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाना है। जिन मतदाताओं के पास सही दस्तावेज हैं, उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है। सत्यापन पूरा होते ही उनका नाम सूची में सुरक्षित रहेगा।

    प्रशासन का जोर इस बात पर है कि अंतिम मतदाता सूची में केवल सही और पूरी तरह सत्यापित नाम ही शामिल हों, ताकि आगे किसी तरह का विवाद न खड़ा हो।

    जनपद में तार्किक विसंगतियों का आंकड़ा

    विसंगति की श्रेणी - संख्या
    छह से अधिक संतानों वाले परिवार - 19,903
    पिता के नाम में विसंगति - 138,027
    माता-पिता से आयु में 15 वर्ष से कम अंतर - 59,173
    माता-पिता से आयु में 50 वर्ष से अधिक अंतर - 12,090
    दादा-दादी/नाना-नानी से आयु में40 वर्ष से कम अंतर - 13,976
    कुल तार्किक विसंगतियां - 2,43,169