देवरिया राजस्व रिकॉर्ड में मजार-कब्रिस्तान की संदिग्ध प्रविष्टि, मचा हड़कंप
देवरिया में राजस्व अभिलेखों में मजार और कब्रिस्तान की प्रविष्टि संदिग्ध मिलने पर विवाद हो रहा है। अधिवक्ता जयदीप गुप्ता ने अभिलेख दुरुस्ती का वाद दाखिल किया है। भूमि पहले बंजर थी लेकिन 1993 में मजार-कब्रिस्तान के रूप में दर्ज हुई। एडीएम की रिपोर्ट में अभिलेख उपलब्ध नहीं होने पर कार्रवाई शुरू की गई। विधायक शलभ मणि त्रिपाठी ने भी शिकायत की है जिसके बाद ध्वस्तीकरण की मांग उठी है।

जागरण संवाददाता, देवरिया। राजस्व अभिलेखों में मजार व कब्रिस्तान का नाम अंकित करने की प्रविष्टि संदिग्ध मिलने के बाद मामला सुर्खियों में है। इस मामले में अपर जिला शासकीय अधिवक्ता जयदीप गुप्ता की ओर से राजस्व संहिता की धारा 32/38 के तहत अभिलेख दुरुस्ती का वाद एसडीएम सदर श्रुति शर्मा की कोर्ट में दाखिल किया गया था। जिसे आनन-फानन में एएसडीएम अवधेश निगम के कोर्ट में स्थानांतरित कर दी गई है। वाद के स्थानांतरित करने की पुष्टि अधिकारियों ने की है।
गोरखपुर रोड स्थित रेलवे ओवरब्रिज से सटे मजार व कब्रिस्तान ग्राम मेहड़ा नगर अंदर तप्पा धतुरा के जिस भूमि पर मजार व कब्रिस्तान बना है, वह नान जेड ए की भूमि है। तहसील प्रशासन के मुताबिक, 1399 फसली खतौनी में बंजर अंकित था।
इसका रकबा 0.124 हेक्टेयर है। वर्ष 1993 में एडीएम वित्त एवं राजस्व के न्यायालय से जारी परवाना के आधार पर मजार व कब्रिस्तान दर्ज किया गया। एडीएम वित्त एवं राजस्व ने अपनी रिपोर्ट में तहसील व जिला मुख्यालय पर मजार व कब्रिस्तान का नाम अंकन के आदेश के संबंध में कोई पत्रावली या अभिलेख उपलब्ध नहीं की जानकारी दी तो विधिक कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
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सदर विधायक डा.शलभ मणि त्रिपाठी की ओर से जून में सीएम योगी आदित्यनाथ से मजार को लेकर शिकायत की गई थी। इस मामले में कुछ लोगों ने मजार को अवैध रूप से बनाए जाने की शिकायत की है। साथ ही ध्वस्तीकरण की मांग की है।
वर्षों पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक रामनगीना यादव ने मजार के वजूद को लेकर सवाल खड़े किए थे। जिसके बाद उनकी हत्या कर दी गई थी।
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