कप्तान साहब का फरमान बेअसर, बॉर्डर की चौकियों से जमकर हो रही है शराब की तस्करी
देवरिया में नए कप्तान के कार्यभार संभालने के बाद शराब और गो तस्करी पर लगाम लगी थी, लेकिन अब उनके तेवर नरम पड़ने से यह फिर से शुरू हो गई है। बॉर्डर की ...और पढ़ें

बॉर्डर की चौकियों से जमकर हो रही है शराब की तस्करी।
जागरण संवाददाता, भाटपाररानी। कार्यभार सम्भालते ही कप्तान साहब के तेवर से शराब और गो तस्करों के बीच भय का माहोल बन गया। जनपदवासियों को लगा कि तस्करी का खेल बंद हो गया, समय के साथ साहब का तेवर थोड़ा नरम हुआ और फिर शुरू हुआ तस्करी का खेल। इससे यह कहावत चरितार्थ हो रही है कि राजा को खबर ही नहीं, भीलों ने बांट लिया वन।
बता दें कि साहब जब जनपद में पहुंचे तो शराब तस्करी पर नकेल कसने की कवायद तेज हो गई। लगा कि देवरिया से बिहार की सप्लाई थम सी गई। फिर इसके बाद हालात और परिस्थितियां बदली, साहब के तेवर नरम हुए। बार्डर के थानेदारों ने अपने पैकारो से पुनः तस्करी का कार्य शुरू करा दिया।
चुकी मोटी कमाई का मामला है। बार्डर पर दारोगा इसलिए भी आना चाहता है। गौ तस्करी और शराब तस्करी की वजह से यहां अकूत धन मिलता है। यह धन कमाने के लिए थानेदार किसी स्तर तक जा सकते हैं। खुलम खुल्ला तो नहीं लेकिन चोरी छिपे तस्करी का काम बेख़ौफ़ चल रहा है।
ये हैं शराब तस्करी के मुफीद रास्ते
कुकुर घाटी नंदपुर मार्ग, भिंगारी भोरे मार्ग, भिंगारी बिरमा पट्टी मार्ग, चकिया रामपुर बुजुर्ग मार्ग, भवानी छापर जैतपुरा मार्ग, प्रतापपुर चीनी मार्ग, बनकटा जगदीश से मैदानिया मार्ग, बनकटा-मैरवा मार्ग, सुंदरपार रामपुर बुजुर्ग मैरवा मार्ग, छेरिया पंडितपुरा मार्ग, जैतपुरा रामकोला मार्ग आदि के रास्ते शराब तस्करी के लिए मुफीद हैं। श्रीरामपुर थाना क्षेत्र इन दिनों शराब तस्करी को लेकर चर्चा में है। इन गांवों के पगडंडियों का रास्ता तो और भी सुरक्षित है।
ठीक से जांच हो तो जद में आएंगे बड़े नाम
शराब के धंधे में छोटे लोग तो केवल कुरियर का कार्य करते हैं। इस धंधे के सिंडिकेट तो बड़े रसूख के लोग है। जिनका सरकार में मंत्री में और कप्तान के ऑफिस में भी आना जाना लगा रहता है। जिसकी वजह से चाह कर भी यह तस्करी रुक नहीं पा रही है। यदि ठीक से जांच हो तो कई जनपद के बड़े नाम जद में आ सकते हैं।

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