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12वीं के छात्र ने बनाया AI पालना, रोते बच्चे को हंसाएगा, झुलाएगा, लोरी सुनाएगा, इसके साथ और भी हैं इसकी वि‍शेषताएं

By Amar Singh Edited By: Praveen Vashishtha
Published: Thu, 01 Jan 2026 07:00 AM (IST)

उत्‍तर प्रदेश के बुलंदशहर नि‍वासी हि‍ंंदी माध्‍यम के छात्र आदित्य कुमार ने 'एआइ पालना' बनाया है। यह पालना बच्चे के ...और पढ़ें

एआइ पालना के साथ आदित्य। जागरण

एआइ पालना के साथ आदित्य। जागरण

HighLights

  1. एआइ पालना तैयार करने वाले आदित्य यूपी बोर्ड के हिंदी मीडियम के हैं छात्र

  2. पालने में बच्चे के रोने व टायलेट करने पर आएगा मोबाइल पर अलर्ट 

अमर सिंह राघव, जागरण, बुलंदशहर। निदा फाजली के एक शेर का मिसरा है, किसी रोते हुए बच्चे को हंसाया जाए। इस मिसरे से बुलंदशहर के 12वीं के छात्र आदित्य कुमार ने कितनी प्रेरणा ली है, यह तो नहीं पता, लेकिन उसने रोते बच्चे को हंसाने का एक जतन जरूर कर दिया है। अभी कुछ दिन पहले ही एआइ रोबोट टीचर बनाकर आदित्य चर्चित हुआ था। अब उसने एआइ पालना बनाया है। यह बच्चे को झुलाने के साथ लोरी भी सुनाएगा और माता-पिता का मददगार बनेगा।

आदित्य शहर की बीसा कालोनी निवासी कंपाउंडर अशोक कुमार के दूसरे नंबर के बेटे हैं। शहर के शिवचरन इंटर कालेज में 12वीं का छात्र है। भौतिक, रसायन और जीवविज्ञान विषय लेकर पढ़ाई कर रहे यूपी बोर्ड के हिंदी मीडियम के इस छात्र के वैज्ञानिक दृष्टिकोण के स्कूल के प्रधानाचार्य अरविंद सिंह भी मुरीद हो गए हैं।

उनका कहना है कि आदित्य नए-नए प्रयोग कर रहा है। अब उसने एआइ पालना तैयार कर अपने उज्ज्वल भविष्य का परिचय दिया है। अपने नए नवाचार एआइ पालने के बारे में आदित्य ने बताया कि सामान्य पालने में ही प्रोग्रामिंग चिप, सेंसर और कैमरा लगाया गया है। इसके बाद पालने को मोबाइल से कनेक्ट कर दिया।

साफ्टेवयर में प्रोग्रामिंग चिप के जरिये पालना नियंत्रित होगा। बच्चे के रोने पर सेंसर के जरिये मोबाइल पर अलर्ट आ जाएगा। दूर बैठे ही पालने को हिलाने-डुलाने का आप्शन रहेगा। क्लिक करते ही पालना बच्चे को झुलाने लगेगा। उसे लोरी सुनाने के लिए स्पीकर लगाए हैं। बच्चे के टायलेट करने पर मोबाइल में अलर्ट मैसेज आएगा। इसमें लगभग दो हजार रुपये का खर्च होगा।

आदित्य ने बताया कि दो साल पहले इस तरह का पालना तैयार करने का विचार आया था। अब जाकर वह विचार साकार हो पाया है। वह एआइ पालना का पेटेंट कराने की तैयारी भी कर रहे हैं। आदित्य ने बताया कि शिक्षकों एवं दोस्तों की आर्थिक मदद से वह दोनों नवाचार कर पाए हैं।

आदित्य के भौतिक विज्ञान शिक्षक हरिओम सक्सेना का कहना है कि छोटे बच्चे को संभालना कितना मुश्किल होता है, यह उन माता-पिता से पूछिए जो संयुक्त परिवार में नहीं रहते हैं। आज के दौर में जहां माता-पिता दोनों नौकरीपेशा होते हैं, संयुक्त परिवारों में भी बच्चे को संभालना आसान नहीं रहा। आदित्य का यह नवाचार बहुत ही सामयिक और महत्वपूर्ण है। पालना बनाने वाली कंपनियों ने अगर इस पर ध्यान दिया तो इसके बहुत सुखद परिणाम देखने को मिल सकते हैं।

अक्टूबर 2025 में बनाया था एआइ रोबोट टीचर

आदित्य ने राजवैरीपाइ (आरपीआइ) चिपसेट में लार्ज लैंग्वेज माडल (एलएलएम) चिप का प्रयोग कर एआइ रोबोट टीचर तैयार किया था। रोबोट टीचर में एलएलएम के जरिये ही सभी विषय अपलोड किए थे। एआइ रोबोट टीचर बनाने में 25 हजार रुपये खर्च हुए थे। लखनऊ में लगी माध्यमिक शिक्षा की विज्ञान प्रदर्शनी में इस नवाचार को पुरस्कार स्वरूप बीस हजार रुपये मिले थे।