पूर्व सांसद मलूक नागर के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी, अप्रैल में छोड़ दिया था बसपा का साथ
बिजनौर लोक सभा सीट से पूर्व सांसद रहे मलूक नागर के खिलाफ कोर्ट ने गैर जमानती वारंट जारी किया है। चुनावी आचार संहिता के मामले में कोर्ट ने ये आदेश जारी किया है। आपको बता दें कि मलूक नागर ने 17वीं लोकसभा के लिए बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर बिजनौर से चुनाव लड़ा था। इसमें उन्हें जीत मिली थी।

जागरण संवाददाता, बिजनौर। चुनावी आचार संहिता के मामले में बिजनौर लोक सभा सीट से पूर्व सांसद रहे मलूक नागर के खिलाफ कोर्ट ने गैर जमानती वारंट जारी किया है। मलूक नागर ने 17वीं लोकसभा के लिए बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर बिजनौर से चुनाव लड़ा था। इसमें उन्हें जीत मिली थी।
इससे पहले उन्होंने बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार के रूप में 2009 और 2014 में उत्तर प्रदेश के मेरठ और बिजनौर लोकसभा क्षेत्रों से अपनी किस्मत आजमाई थी, लेकिन इसमें उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। मलूक नागर पेशे से एक बिजनेसमैन हैं।
अप्रैल 2024 में बसपा से दिया था इस्तीफा
आपको बता दें कि मलूक नागर पर कई गंभीर धाराओं में मुकदमें भी दर्ज हैं। उन्होंने उत्तर प्रदेश के हापुड़ के एसएसवी डिग्री कॉलेज से बीएससी जीव विज्ञान की डिग्री ली है। वहीं बसपा सांसद मलूक नागर ने अप्रैल 2024 में पार्टी का साथ छोड़ दिया था। उन्होंने राष्ट्रीय लोकदल का दामन थाम लिया था।
रालोद प्रमुख ने दिलाई थी सदस्यता
रालोद प्रमुख जयंत चौधरी ने उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाई थी। सांसद ने बसपा प्रमुख को एक पत्र लिखकर अपना दर्द बयां किया था और इस्तीफे की वजह भी बताई थी। सांसद ने कहा था, ''मौजूदा हालातों और राजनीतिक माहौल को देखकर, आज मैं, मेरे बड़े भाई श्री लखीराम नागर, (पूर्व मंत्री, उ.प्र. सरकार), मेरी धर्मपत्नी सुधा नागर, (पूर्व ज़िला पंचायत अध्यक्ष) हम सभी, बहुजन समाज पार्टी को छोड़ रहे हैं।''
मायावती को लिखा था पत्र
सांसद ने बसपा प्रमुख मायावती के नाम भी एक पत्र लिखा था- ''हमारे परिवार में करीब पिछले 39 वर्षों से लगातार कांग्रेस व बसपा द्वारा कई बार ब्लॉक प्रमुख व कई बार चेयरमैन जिला परिषद/अध्यक्ष जिला पंचायत व कई बार विधायक (M.L.A/M.L.C) व उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री व देश में सांसद लगातार रहते आ रहे हैं, इस करीब 39 वर्षों में पहली बार ऐसा हुआ कि हम विधायक भी नहीं लड़ पाए और सांसद भी नहीं लड़ पाए।
पत्र में बयां किया था दर्द
सांसद ने आगे लिखा था ''हमने दिसंबंर 2006 में आपके आशीर्वाद से बसपा पार्टी की सदस्यता ग्रहण की थी, आपके आशीर्वाद से हम कई पदों पर रहे, इसके लिए हम हमेशा आपके आभारी रहेंगे। हमारे परिवार की राजनीतिक हैसियत और सामाजिक हैसियत या देश स्तर पर पहचान वाला कोई भी व्यक्ति नहीं जो हमारे जितना लंबा समय के लिए बसपा पार्टी में रहा हो, उसे कुछ सालों में बसपा पार्टी द्वारा निकाल दिया गया या वह खुद बसपा पार्टी छोड़कर चला जाता है। मैं दावे से कह सकता हूं कि बसपा पार्टी में मैंव मेरे परिवार को इतने लंबे समय तक कई बार उतार-चढाव देखने के बाद भी बसपा पार्टी में ही रहे।''
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