जानवर भी सर्दी से परेशान, इससे बचने को हाथी करता है खास तरह का स्नान, अन्य वन्यजीवों के भी राहत पाने के अनोखे तरीके
अमानगढ़ टाइगर रिजर्व में वन्यजीव सर्दी से बचने के लिए अनोखे तरीके अपना रहे हैं। कड़ाके की ठंड में हाथी खुद को गर्म रखने के लिए 'रेत स्नान' कर रहे हैं। ...और पढ़ें

अमानगढ़ टाइगर रिजर्व में अपने ऊपर रेत डालता हाथी। सौ. एआर रहमान।
जागरण संवाददाता, बिजनौर। प्रकृति में रहने वाला हर वन्यजीव खुद ही अपने को बचाने के लिए जीवन के हर दांव पेंच सीखता है। वन्यजीव खुद भी अपने आप को प्रकृति के हिसाब से रहने के लिए ढाल लेते हैं। अमानगढ़ में भी इस समय यही देखने को मिल रहा है। हाथी खुद को गरम रखने के लिए अपने ऊपर गरम रेत डाल रहे हैं। इसे गरम रेत से नहाना भी कहते हैं। बाकी वन्यजीव भी खुद को गरम रखने के लिए दूसरे तरीके अपनाते हैं।
इन दिनों सर्दी अपने चरम पर है। बिजनौर उत्तर प्रदेश के सबसे ठंडे जिलों में से एक है। लोग सर्दी से बचने के लिए हीटर, अलाव आदि का सहारा ले रहे हैं। लेकिन वन्यजीवों की दुनिया अलग है। फिर भी वन्य जीवों को ठंड से कोई नुकसान नहीं होता है। इसका कारण है कि वन्य जीव खुद को सर्दी से बचने का हर तरीका जानते हैं।
हाथी इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। अमानगढ़ टाइगर रिजर्व में बने वाटर होल पर गर्मियों में एक तरह से हाथियों के झुंड का कब्जा रहता है। हाथी सूंड से एक दूसरे पर पानी डालकर नहलाते हैं। साथ ही खुद पर कीचड़ डालते हैं ताकि उनका शरीर ठंडा रहे। लेकिन सर्दियों में ठंड से बचने की युक्ति भी हाथियों के पास है।
विशेषज्ञों के अनुसार अत्यधिक ठंड होने पर वे एक दूसरे से सटकर खुद को गरम रखते हैं। साथ ही जहां हाथी खड़े होते हैं, वहां की रेत गरम हो जाती है। इस रेत को वे सूंड में भरकर अपने ऊपर डालते हैं। यह रेत उन्हें ठंड से राहत देती है।
ऐसे बचते हैं ठंड से
हाथी की तरह अन्य वन्यजीव भी रेत ठंड से बचने के लिए अलग तरीके अपनाते हैं। बाघ व गुलदार सर्दियों में रात भर अपनी टेरेटरी में घूमता है। साथ ही वह झाड़ियों में छिपकर बैठता है। हिरन आदि के झुंड शीतलहर से बचने के लिए झाड़ियों की आड़ में एक दूसरे से सटकर बैठते हैं। बंदर आदि तो सीधे धूप में ही बैठे देखे जाते हैं।
इन्होंने कहा
वन्यजीवों के ठंड से बचने के अपने अपने तरीके होते हैं। झुंड में रहने वाले वन्यजीव अलग तरीके से ठंड से बचते हैं और अकेले रहने वालों के अपने तरीके हैं। वन्यजीव खुद को हर परिस्थिति के अनुसार ढाल लेते हैं।
पीपी सिंह, मुख्य वन संरक्षक- बरेली जोन

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