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    बिजनौर में फर्जी स्वास्थ्य बीमा कराकर 32 लाख रुपये, अमरोहा का दंपती गिरफ्तार

    Updated: Sun, 04 Jan 2026 05:54 PM (IST)

    बिजनौर में गंभीर रूप से बीमार लोगों का फर्जी स्वास्थ्य बीमा कराकर 32 लाख रुपये ठगने वाले गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है। पुलिस ने अमरोहा निवासी एक दंपती को ...और पढ़ें

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    जारगण संवाददाता, बिजनौर। गंभीर बीमार व्यक्ति का स्वास्थ्य बीमा कराकर उनकी मौत के बाद 32 लाख रुपये ठगने वाले गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है। गिरोह के माध्यम से बिजनौर और अमरोहा जिले में चार-चार केसों में इस तरह से रकम निकाली जा चुकी है।

    आरोपित गांव में ऐसे व्यक्ति की तलाश करते थे, जो गंभीर रूप से बीमार है। उनका बीमा कराकर स्वजन से खाते खुलवा लेते थे और चेक बुक अपने पास रखते थे। मौत के बाद कंपनी से बीमा कैंसिल करा लेते थे और इसके बाद उपभोक्ता फोरम में जीत जाते थे।

    शहर कोतवाली पुलिस ने अमरोहा निवासी दंपती को गिफ्तार किया है। उन्हें कोर्ट में पेश किया गया, जहां से जेल भेज दिया है। अन्य आरोपितों की तलाश की जा रही है।

    रविवार दोपहर पुलिस लाइन में आयोजित प्रेस वार्ता में एएसपी सिटी डा. कृष्ण गोपाल सिंह ने बताया कि चांदपुर के गांव बाडीवाला निवासीगण फूलवती पत्नी चंद्रहास व मोनू पुत्र तेजराम, निक्की सावन पुत्र बिजेंद्र निवासी शादीपुर थाना कोतवाली देहात व महिपाल पुत्र जबर सिंह निवासी शादीपुर मिलक थाना चांदपुर ने शनिवार को शहर कोतवाली में नवाब अली पुत्र फकीरा व शरद त्यागी पुत्र सत्यपाल निवासीगण गांव पेली थाना मंडी, आशा तारावती, एक अज्ञात अधिवक्ता व एक अज्ञात के खिलाफ फर्जी स्वास्थ्य बीमा कराकर लाखों की धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए केस दर्ज कराया है।

    पुलिस ने इस प्रकरण में नवाब अली व उसकी पत्नी रूखशी अंजुम को गिरफ्तार किया है। एएसपी सिटी ने बताया कि गिरोह के सदस्यों ने आठ केसों में 32 लाख दस हजार रुपये हड़पे हैं। इस तरह के कुल 14 केस पुलिस की जानकारी में आए हैं। दो चांदपुर, एक स्योहारा और एक कोतवाली देहात के प्रकरण में पैसे निकाले जा चुके हैं। अमरोहा में चार मामले में ठगी की गई है।

    छह मामलों में रकम हड़पने का प्रयास चल रहा था। यह सभी मामले बिजनौर जिले के हैं। पुलिस बीमा कंपनी का एजेंट, अधिवक्ता की तलाश की जा रही है। सभी आरोपित अमरोहा के बताए जा रहे हैं।

    सीओ सिटी संग्राम सिंह ने बताया कि गिरोह की कुंडली खंगाली जा रही है। पूरी जांच होने पर अन्य मामले और आरोपित के नाम प्रकाश में आ सकते हैं। टीम में एसएसआइ मर सिंह राठौर, सिपाही नीरज मौजूद रहे।

    गांव-गांव बीमार व्यक्ति को तलाशता है गिरोह

    गिरोह के सदस्य गांव-गांव जाकर बीमार व्यक्ति के बारे में जानकारी करते थे। कुछ मौत कुछ दिनों या महीनों में होने की संभावना है। इनमें कैंसर, टीबी समेत अन्य गंभीर बीमार है। आनलाइन उनका बीमा कराया जाता। गिरोह के लोग बीमार व्यक्ति के नामिनी के दस्तावेज लेकर उसके घर पर ही खाता खुलवा देते थे। फर्जी दस्तावेज के माध्यम से सिम निकालकर उक्त खाते से लिंक कराया जाता था।

    बैंक से ही चेक बुक लेकर अपने पास रख लेते थे। उन्होंने येस बैंक, एचडीएफसी व एक्सिस बैंक में खाते खुलवाए। खातों को स्वयं आपरेट करते थे। मरीज की मौत होने पर संबंधित कंपनी से जांच कराते और बीमा कंपनी द्वारा निरस्त होने पर उपभोक्ता फोरम में अपील करते।

    मामले की पैरवी कर बीमा पास करा लेते। रकम खातों में स्थानांतरण होने के बाद चेक बुक या एटीएम कार्ड से रकम निकाल लेते थे। पीड़ित को इसकी भनक नहीं लग पाती थी।