गुलदार हुए कम... अमानगढ़ में बाघों का राज कायम
अमानगढ़ टाइगर रिजर्व में बाघों की बढ़ती संख्या के कारण गुलदारों की आबादी में भारी कमी आई है। एक सर्वेक्षण में 20 में से 15 ग्रिड में गुलदार नहीं मिले, ...और पढ़ें

अमानगढ़ टाइगर रिजर्व। (प्रतीकात्मक फोटो)
जागरण संवाददाता, बिजनौर। बाघ वन का राजा होता है और यह बात वन्यजीवों की दुनिया में एक अघोषित कानून की तरह है। अमानगढ़ टाइगर रिजर्व में चल रही जांच में भी यह बात सामने आ रही है। अमानगढ़ में किए जा रहे सर्वे में 20 में से 15 ग्रिड में गुलदारों का कोई वजूद नहीं मिला है, जबकि बाघ हर ग्रिड में मिल रहे हैं। अमानगढ़ में बाघों के बढ़ते कुनबे से गुलदारों ने वन को लगभग खाली सा ही कर दिया है।
अमानगढ़ टाइगर रिजर्व को इसकी अतुलनीय वन्य संपदा के साथ ही वन्यजीवों की विविधता के लिए भी जाना जाता है। रायल बंगाल टाइगर अमानगढ़ की शान हैं। पिछले कुछ वर्षों में अमानगढ़ के अंदर वन्यजीवों का कुनबा लगातार बढ़ रहा है। माना जाता है कि अमानगढ़ में बाघों के बढ़ते कुनबे से डरकर ही गुलदारों ने वन को छोड़ा और गन्ने के खेतों में ठिकाना बनाया। शुरूआत में अमानगढ़ के पास ही खेतों में गुलदार दिखते थे, जो अब पूरे जिले के खेतों में फैल चुके हैं। अमानगढ़ की तरह ही अब कौड़िया, साहनपुर आदि वन रेंज में भी बाघों का दिखना आम हो गया है।
शासन द्वारा अलीगढ़ मुस्लिम विश्विद्यालय की टीम से जिले में बाघों के स्वभाव पर सर्वे किया जा रहा है। अमानगढ़ में बाघों की गणना से जुड़ी प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। इसी के अंतर्गत ये भी देखा जा रहा है कि यहां पर कितने गुलदार हैं। अमानगढ़ को ढाई-ढाई वर्ग किलोमीटर क्षेत्र के 30 ग्रिड बनाए गए हैं। इनमें से 20 ग्रिड के सर्वे का काम पूरा किया जा चुका है।
20 में से पांच ग्रिड में ही गुलदार होने के सबूत मिले हैं। बाकी से गुलदार लापता हैं जबकि बाघों का हर ग्रिड पर राज मिला है।
पंजों के निशान और मल से पहचान
सर्वे में बाघों और गुलदारों के पंजों के निशान व मल को देखा जा रहा है। बाघों के पंजों के निशान हर ओर मिल रहे हैं। पगडंडियों व रेतीले क्षेत्र में ये निशान देखे जा रहे हैं। अमानगढ़ में बाघों के सामने गुलदारों की संख्या नाममात्र की ही रहने का अनुमान है।
बाघों का कुनबा बढ़ रहा है
सभी वन्यजीवों के संरक्षण के लिए काम किया जा रहा है। अमानगढ़ टाइगर रिजर्व में बाघों का कुनबा बढ़ रहा है। यह स्वाभाविक है कि जहां बाघ अधिक होंगे वहां से गुलदार अपने आप चले जाते हैं। यह प्रकृति के एक नियम की तरह है।-जस सिंह कुशवाहा, डीएफओ

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