17 करोड़ की GST चोरी में दो आरोपित गिरफ्तार, बुलंदशहर-बरेली के हैं बदमाश, तीन सदस्यों का दिल्ली के शाहीनबाग से है कनेक्शन
औराई पुलिस व क्राइम ब्रांच ने 17 करोड़ रुपये की जीएसटी चोरी के दो आरोपित मोहम्मद फैजान (बरेली) और देवेन्द्र कुमार (बुलंदशहर) को माधोसिंह रेलवे ...और पढ़ें

जागरण संवाददाता, भदोही। औराई पुलिस व क्राइम ब्रांच की टीम ने बुधवार को 17 करोड़ की जीएसटी चोरी करने के दो आरोपित बरेली के देवरानिया रीक्षा निवासी मोहम्मद फैजान व बुलंदशहर शिकारपुर के अजनारा के रहने वाले देवेन्द्र कुमार को माधोसिंह रेलवे स्टेशन के पास से गिरफ्तार कर लिया। उनके पास से पुलिस ने फर्मों से जुड़े रजिस्ट्रेशन दस्तावेज, फर्जी इनवाइस व ई-वे बिल, बैंक खाते से संबंधित कागज, मोबाइल-लैपटाप बरामद किया है।
फर्जी फर्म खोलकर करोड़ों की जीएसटी चोरी करने वाले तीन आरोपित दिल्ली के शाहीनबाग निवासी सरगना हाजी इरफान, उसके दो बेटे दानिश व तनवीर अब भी फरार हैं। सहायक आयुक्त राज्य कर मनोज अग्रवाल ने सात जुलाई को औराई कोतवाली में जोगेंद्र के खिलाफ 17 करोड़ की जीएसटी चोरी की प्राथमिकी दर्ज कराई थी।अपर पुलिस अधीक्षक शुभम अग्रवाल ने बताया कि तहरीर में जानकारी दी गई है कि जोगेंद्र ने कूटरचित बिजली के बिल समेत अन्य कागजों का प्रयोग कर 17 करोड़ की जीएसटी चोरी की है। जांच में मिला कि जोगेंद्र डमी नाम है।
करते हैं नकली दस्तावेज तैयार
गिरोह का सरगना हाजी इरफान के साथ उसके बेटे दानिश व तनवीर पैन कार्ड का गलत इस्तेमाल कर नकली दस्तावेज तैयार करते हैं। पुलिस की पूछताछ में आरोपितों ने बताया कि इरफान व उसके बेटे ने उन्हें आधार कार्ड, पैन कार्ड देकर औराई व झारखंड के लिए भेजा था। कहा कि वह औराई पहुंचेंगे तो वहीं पर आगे की अन्य योजना बताई जाएगी। वे लोग फर्म खोलकर जो माल कागजों में आपूर्ति करते हैं, उसमें दोनों खाताधारक बनकर खातों से रुपये निकालकर इरफान व उसके बेटे को देते हैं।
इसमें उन्हें 20 प्रतिशत मिलता है।अपर पुलिस अधीक्षक ने बताया कि ये लोग फर्जी पैन कार्ड का इस्तेमाल कर नकली दस्तावेज लगाकर जीएसटी नंबर ले लेते थे। टैक्स क्रेडिट गलत उठाना व बड़ी मात्रा में बिक्री छिपाकर टैक्स चोरी करते रहे। गिरोह के सदस्य विभिन्न राज्यों में फर्जी फर्मों का पंजीयन कराते थे। फर्जी नाम, पता और दस्तावेज का इस्तेमाल करते थे। इन फर्मों के फर्जी इनवाइस और ई-वे बिल खुद तैयार करते थे। बिना किसी वास्तविक सामान की खरीद के कागजों में लेन-देन दिखाकर इनपुट टैक्स क्रेडिट का गलत लाभ उठाते थे।

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