बच्चों की 5 गंभीर बीमारियों पर AI जैसी निगरानी! स्वास्थ्य विभाग और WHO रखेगा 'गिरते-उठते ग्राफ' पर नजर
स्वास्थ्य विभाग की बड़ी पहल: टीकाकरण से रोकी जाने वाली 5 बीमारियों का रिकॉर्ड अब ऑनलाइन। UDSP पोर्टल पर डेटा अपलोड होते ही मरीज की EPID बनेगी, जिससे देश के किसी भी अस्पताल में सही इलाज मिल सकेगा। यह प्रणाली इलाज और जांच में होने वाली गलतियों को रोकेगी।

बरेली जिला अस्पताल
अनूप गुप्ता, जागरण, बरेली। बच्चों को लगने वाली पांच बड़ी बीमारियों के नियंत्रण में ढिलाई करना आसान नहीं होगा। पांच गंभीर रोग, जिसमें एकाएक अंग को लुंज-पुंज करना यानी लकवा, खसरा, गलाघोंटू, काली खांसी और नवजात हो होने वाली टेटनेस को शामिल गए हैं। इन रोगियों का पता लगने पर अब तक चिकित्सक उनका कार्ड बनाते थे। उसमें उनका क्या इलाज चल रहा है, जो जांचें जरूरी बताई गईं हैं, वे हुई है या नहीं आदि की निगरानी नहीं पा रही थी।
इसकी तत्काल स्क्रीनिंग शुरू करने के लिए चिकित्सक को हाथोंहाथ मरीज का रिकार्ड यूडीएसपी फैसिलिटी पोर्टल पर अपलोड होगी। इसके साथ इसमें नजदीक की लैब भी लिंक रहेगी, जहां जांच कराई जा रही है। इससे फायदा यह होगा कि इन रोगों से पीड़ित बच्चों का सारा डेटा स्वास्थ्य विभाग के पास स्क्रीन पर रहेगा तो उन्हें निगरानी करना करना भी आसान होगा।
स्वास्थ्य विभाग की सूची में वीपीडी यानी टीकाकरण से रोकथाम वाली बीमारियों में लकवा, गलाघोंटू, खसरा, काली खांसी और नवजात टेटनस हैं। इनका वैक्सीन लगाकर इलाज तो हो रहा था कि लेकिन मरीजों का सारा ब्योरा मैनुअल ही था। इन बीमारियों का इलाज करने वाला चिकित्सक एक कार्ड बनाकर मरीजों को देता था। उस पर दवाएं, जांचें आदि दर्ज रहता था।
कई बार डाक्टर की हैंडराइटिंग आदि न समझ आने पर लैब में मरीजों की गलत जांचें होने की आशंका बनी रहती थी। चूंकि डिजिटल डेटा नहीं बन पा रहा था, इसलिए स्वास्थ्य विभाग उसकी स्क्रीनिंग भी नहीं कर पा रहा है। इसे देखते हुए बदलाव किया गया है। अब चिकित्सक को इलाज शुरू करते ही यूनिफाइड डीसीजी सर्विलांस प्लेटफार्म (यूडीएसपी) पोर्टल पर मरीज की पूरी रिपोर्ट अपलोड करनी होगी।
इससे इससे लिंक लैब के पास ही यह सूचना खुद ही पहुंच जाएगी कि मरीज को कौन सी जांचें करानी है। उसकी रिपोर्ट भी इस पर देखी जा सकेगी। इससे चिकित्सक को इलाज करने में आसानी होगी। साथ स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को भी इसकी आनलाइन स्क्रीनिंग करने में काफी आसानी रहेगी। इससे गंभीर बीमारियों से पीड़ित बच्चों का सही से इलाज भी मुमकिन हो सकेगा।
डब्ल्यूएचओ के पास भी रहेगा बीमारियों के उठता-गिरता ग्राफ
बच्चों की इन पांच गंभीर बीमारियों के आंकड़ों पर स्वास्थ्य विभाग के साथ ही वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) तक की नजर रहेगी। इससे फायदा ये होगा कि अब आसानी से जा सकेगा कि वैक्सीन से रोकी जा रही कौन सी बीमारी ज्यादा फैल रही है और कौन कम। आनलाइन होने से इसका काफी हद तक सही डेटा मिल सकेगा। मैनुअल होने से इसकी सही और त्वरित जानकारी न मिल पाने से इसकी रोकथाम के प्रयास शुरू होने में काफी समय लग जाता था।
तुरंत बनेंगी ईपीआइडी, सभी अस्पतालों में मिलेगी इलाज
इन बीमारियों के इलाज के लिए सभी जिला अस्पताल के साथ, 26 नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य विभाग, 36 हेल्थ एंड वैलनेस सेंटर, 15 सीएचसी और 80 से ज्यादा पीएचसी हैँ। इन सभी अस्पतालों के लिए लागिंग आइडी दी है। इसे खोलने के बाद चिकित्सक डेटा को स्क्रीनिंग के लिए फीड कर कसेंगी। इसमें मरीज का पंजीकरण होने के साथ उसकी एक ईपीआइडी भी तैयार हो जाएगी। इससे वह अपना कहीं भी इलाज करा सकेगा। अगर डाक्टर का पर्चा आदि ले जाना भूल भी जाता है तो भी उसकी आइडी से उसकी बीमारी का ब्योरा चिकित्सक आसानी से देख सकेंगे।
बीमारियां और उनके लक्षण
लकवा : एक वायु रोग है, जिसे पैरालिसिस, लकवा और पक्षाघात के नाम से भी जानते हैं। इसमें मांसपेशियों की कार्यविधि प्रभावित हो जाती है। इस हालत में शरीर के किसी एक भाग की मांसपेशियां काम नहीं करती है। यानी ऐसी अवस्था में लकवा से ग्रस्त व्यक्ति एक से ज्यादा मांसपेशियों को हिलाने में असमर्थ होता है। यह स्थिति तब आती है, जब मांसपेशियों और मस्तिष्क के बीच संचार सही से नहीं हो पाता है। छह से 15 साल का कोई बच्चा, जिसका कोई अंग लुंज-पुंज हो गया हो।
खसरा : बच्चे को बुखार के साथ-साथ चेहरे और शरीर पर लाल दाने हो जाते हैं। यह सामान्य रैश नहीं, खसरा हो सकता है। खसरा एक अत्यधिक संक्रामक वायरल बीमारी है, जो बच्चों को अधिक प्रभावित करती है, लेकिन अगर समय रहते पहचान और इलाज न किया जाए तो यह जानलेवा भी साबित हो सकती है।
गलाघोंटू : इसे डिप्थीरिया भी कहते हैं। बैक्टीरियल इंफेक्शन होने और समय पर इलाज नहीं मिलने पर इसके खतरनाक टााक्सिन मरीज की किडनी, उसके लिवर और नर्वस सिस्टम को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं। इस बीमारी से मरीज का श्वसन तंत्र प्रभावित होता है। डाक्टरों के मुताबिक, गर्भवती महिलाओं और पांच साल से कम उम्र के बच्चों को डिप्थीरिया से संक्रमित होने का ज्यादा खतरा होता है.
काली खांसी : किसी व्यक्ति को कम से कम दो सप्ताह से खांसी हो एवं इसमें से कोई एक भी लक्षण हो। जैसे खांसी का लगातार होना, खांसने के बाद सांस लेने में जोरदार आवाज होना, खांसने के फौरन बाद उल्टी आना शामिल है।
नवजात टिटनेस : कोई नवजात, जिसे तीन से 28 दिन की आयु के बीच सामान्य रूप से मां के दूध को सही से न चूस पाना, न रोना और शरीर में कड़ापन के साथ अकडाहट होना इसका मुख्य लक्षण है।
वैक्सीन से रोकी जानी वाली बीमारियां यानी वीपीडी के लिए यूडीएसपी पोर्टल पर मरीज का तुंरत ब्योरा अपलोड करना होगा। इसके लिए सभी सरकारी अस्पतालों को लागिंग दे दी गई है। मरीज की आनलाइन स्क्रीनिंग करने में काफी आसानी होगी। इसकी ट्रेनिंग भी दे दी गई है।
- डा. प्रशांत रंजन, जिला प्रतिरक्षण अधिकारी
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