गोद में नन्ही जान और हाथ में जिम्मेदारी: चुनौतियों से लड़कर SIR में जुटीं बरेली की 'सुपर बीएलओ'
बरेली की एक महिला बीएलओ, जिन्हें 'सुपर बीएलओ' कहा जाता है, अपनी गोद में नवजात शिशु के साथ एसआइआर कार्य में लगी हैं। वह अपनी जिम्मेदारियों को बखूबी निभा रही हैं और कठिन परिस्थितियों में भी अपने कर्तव्य पथ पर अडिग हैं। यह महिला जिम्मेदारी और मातृत्व का एक अनूठा उदाहरण पेश कर रही हैं, जो अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं।
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प्रतीकात्मक चित्र
हिमांशु अग्निहोत्री, बरेली। जहां एक तरफ मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) अभियान को लेकर प्रदेश में बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) के उत्पीड़न और तनाव के मामले सामने आ रहे हैं। वहीं बरेली की महिला बीएलओ लोगों के लिए प्रेरणा बन रही हैं। नारी शक्ति अपने कर्तव्य को निजी चुनौतियों से ऊपर रखते हुए समर्पण के साथ निभा रही हैं। कुछ महिला बीएलओ गोद में बच्चा लेकर फील्ड पर पहुंच रही हैं तो किसी ने स्वास्थ्य समस्याओं का काम में बाधा नहीं बनने दिया।
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जिले में तैनात बीएलओ स्वास्थ्य समस्याओं और घरेलू जिम्मेदारियों को निभाते हुए भी फील्ड वर्क को प्राथमिकता दे रहे हैं। वे न केवल अपने काम को बेहतर ढंग से कर रहे हैं, बल्कि यह साबित कर रहे हैं कि दृढ़ संकल्प और सेवा भावना से कोई भी चुनौती बड़ी नहीं होती। महिला बीएलओ घर और बच्चों की जिम्मेदारी के बीच भी अपने कर्तव्य का बखूबी निर्वाहन कर रही हैं।
रात में भी रहती है काम की चिंता
मिनी बाइपास निवासी महिला शिक्षक रजनी अपने छोटे बच्चे को गोद में लेकर घर-घर जाकर सर्वे कर रही हैं, ताकि कोई भी मतदाता छूट न जाए। वह क्यारा ब्लाक के प्राथमिक विद्यालय घुरा राघवपुर में सहायक अध्यापक हैं। बतौर, बीएलओ शहर विधान सभा के बाकरगंज क्षेत्र में एसआइआर का कार्य कर रही हैं।
जहां वह अपने दो बच्चों, आठ माह की बेटी मान्या और पांच साल के बेटे रेयांश के साथ आती हैं। उनके पति प्राइवेट जाब करते हैं, शाम को वह भी रजनी का काम में हाथ बंटाते हैं। पर्यवेक्षक हरीश बाबू शर्मा ने बताया, रजनी का कार्य भी संतोष जनक है। वह सुबह जल्दी क्षेत्र में जाती है, फिर बाकरगंज स्कूल केंद्र पर फीडिंग करती हैं, देर शाम तक फिर क्षेत्र में गणना प्रपत्र जमा करती हैं।
निजी चुनौतियां मात दे रहीं शिक्षिका गीतांजलि
डोहरा रोड निवासी उच्च प्राथमिक विद्यालय बिथरी चैनपुर की सहायक अध्यापक गीतांजलि मौर्य इन दिनों बीएलओ के तौर पर आजमनगर में कार्य कर रही हैं। उनके हृदय की बाइपास सर्जरी हो चुकी है, वह बताती हैं कि पति जगदीश कुमार दूसरे जिले में विद्युत निगम में कार्यरत हैं। सबसे अधिक चिंता बच्चों की रहती है, तीन बच्चों में 12 साल का एक बेटा दिव्यांग है।
ऐसे में उसकी विशेष देखभाल करनी होती है। ऐसी स्थिति में एसआइआर के लिए जाते हुए भी घर की चिंता रहती हैं। क्षेत्र में सकारात्मक और नकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिलती है, कई बार लोग फार्म भर के जमा ही नहीं करते, शादी, आफिस व अन्य कार्यों में व्यस्त होने की बात कहते हैं। वहीं, सक्रिय लोग भी मिलते हैं जो समय से फार्म भरकर दे देते हैं।

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