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    कम खुराक में दोगुणा अंडा देगी बाराबंकी में विकसित देशी मुर्गी, ‘केरी देवेंद्रा’ है प्रजाति

    By Deepak Mishra Edited By: Dharmendra Pandey
    Updated: Fri, 02 Jan 2026 06:21 PM (IST)

    Desi Breed of Hen Developed in Barabanki: ड्यूल पर्पज लो-इनपुट टेक्नोलाजी के तहत विकसित मुर्गी का नाम केरी देवेंद्रा रखा गया है। प्रजाति अंडा और मांस- ...और पढ़ें

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    चकगंजरिया जहांगीराबाद में विकसित देशी मुर्गी केरी देवेंद्रा के चूजे : जागरण

    दीपक मिश्रा, जागरण, बाराबंकी : चकगंजरिया अनुसंधान प्रयोगशाला में गाय की प्रजाति विकसित करने से कुक्कुट को अधिक विकसित करने की ओर जो मजबूत कदम बढ़ाया उसका अप्रत्याशित परिणाम सामने आया है। यहां पर तीन वर्षों के परीक्षण के बाद ‘केरी देवेंद्रा’ देशी मुर्गी की प्रजाति को विकसित किया गया है।

    ‘केरी देवेंद्रा’ देशी मुर्गी सामान्य मुर्गियों की तुलना में दोगुणा अंडा उत्पादन कर रही हैं। इनके पालन में न तो महंगे दाने की जरूरत होती है और न ही अतिरिक्त संसाधनों की, जिससे गरीब और मध्यम वर्गीय ग्रामीण परिवारों को सीधा लाभ मिलेगा। देशी चूजों को बढ़ाया देने के लिए प्रथम चरण में यूपी के 11 जिले चयनित किए गए हैं, जहां इनकी आपूर्ति होगी।

    अधीक्षक कुक्कुट फार्म चकगंजरिया, अशोक वर्मा ने बताया कि चकगंजरिया में केरी देवेंद्रा के नाम से देशी मुर्गी विकसित की गई हैं। यह प्रजाति आने वाले समय में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ ही प्रदेश को कुक्कुट पालन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाएगी। चक गंजरिया की प्रयोगशाला में देशी प्रजाति की मुर्गी सीएआरआर को आधुनिक विज्ञानी पद्धतियों से उन्नतिशील बनाया है। ड्यूल पर्पज लो-इनपुट टेक्नोलाजी के तहत विकसित मुर्गी का नाम केरी देवेंद्रा रखा गया है। प्रजाति अंडा और मांस-दोनों उद्देश्यों के लिए समान रूप से उपयोगी है।

    सामान्य देशी मुर्गियां प्रतिवर्ष औसतन 100 से 120 अंडे देती हैं, वहीं यह उन्नत देशी प्रजाति केरी देवेंद्रा 200 से 220 अंडे प्रतिवर्ष देने की क्षमता रखती हैं। इतना ही नहीं, इस प्रजाति की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी अधिक पाई गई है, जिससे दवाओं पर होने वाला खर्च भी कम हो जाएगा।

    बाजार के दाने की आवश्यकता नहीं

    केरी देवेंद्रा की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे बाजार से खरीदे गए महंगे दाने पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। घरों में बचा भोजन, रसोई का अवशेष और स्थानीय स्तर पर उपलब्ध प्राकृतिक आहार से ही यह मुर्गियां पोषित हो जाएंगी। इससे ग्रामीण परिवारों पर आर्थिक बोझ कम पड़ेगा और कुक्कुट पालन एक सहज आजीविका का साधन बन सकेगा।

    इन जिलों में होगी आपूर्ति

    चकगंजरिया की उन्नत देशी मुर्गी को प्रदेश भर में फैलाने की योजना तैयार की गई है। प्रथम चरण में चयनित 11 जिलों में अयोध्या, अंबेडकरनगर, रायबरेली, उन्नाव, लखनऊ, हरदोई, सीतापुर, बाराबंकी, कानपुरनगर, गोंडा, लखीमपुर खीरी में 10-10 हजार चूजे उपलब्ध कराए जाएंगे। इससे प्रजाति का संरक्षण और विस्तार होगा, बल्कि गांव-गांव में कुक्कुट पालन को नया आधार भी मिलेगा।

    ग्रामीण आय और पोषण को मिलेगा बल

    मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डा. अतुल अवस्थी ने बताया कि केरी देवेंद्रा मुर्गी से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार, पोषण सुरक्षा और महिला सशक्तीकरण को नई दिशा मिलेगी। घर में उत्पादित अंडे बच्चों और महिलाओं के पोषण स्तर को बेहतर बनाएंगे। अतिरिक्त अंडों की बिक्री से परिवार की आय में भी इजाफा होगा।